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100 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से चली तेजस, यात्रियों ने किया स्वागत

  • यात्रियाें ने की टिप्पणी, अगर सुविधा बेहतर मिले तो कीमत मायने नहीं रखती 

रेलहंट ब्यूरो, नई दिल्ली

160 किमी की रफ्तार का दावा करने वाली पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस 4 अक्टूबर को लखनऊ से सुबह 9.55 पर अपने पहले सफर पर निकली. लखनऊ से उन्नाव, कानपुर होते हुए दिल्ली मार्ग पर चली तेजस की रफ्तार कुसुंभी से सोनिक स्टेशन के बीच 100 किमी प्रति घंटा रही. उन्नाव से सुबह 10.44 बजे ट्रेन रवाना हुई तो पटरी पर इंतजार कर रहे लोगों ने टिप्पणी की ” कोई खास नहीं ”. कही-कही ट्रेन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी चली लेकिन ट्रेन की औसत रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा ही दर्ज की गयी. ट्रेन का पहला सफर यात्रियों ने खास बताया और कहा कि यह शानदार अनुभव रहा है. अधिक कीमत तब कोई बात नहीं होती जब सुविधाएं बेहतर हो, जो इस ट्रेन में उपलब्धक करायी गयी हे.

तेजस एक्सप्रेस का पहले दिन कानपुर सेंट्रल से लेकर नई दिल्ली में भी जोरदार स्वागत किया गया. ट्रेन में पहले दिन 415 यात्री दिल्ली और गाजियाबाद के लिए रवाना हुए. शुक्रवार को पहले दिन अपने निर्धारित समय सुबह दस बजकर चालीस मिनट के बजाय ये ट्रेन सुबह ग्यारह बजकर तीन मिनट पर कानपुर सेंट्रल आयी. दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था. स्टेशन पर माहौल उत्सव जैसा था. कोई ट्रेन के साथ सेल्फी ले रहा था तो कोई भीतर जाकर सीटों पर बैठ कर उसका अनुभव लेने में लगा था.

ट्रेन में पहले दिन यात्रा करने वालों ने अनुभव को लाजबाव बताया. लोगों का कहना था कि ट्रेन की सीटें हवाई जहाज जैसी ही हैं. ऑटोमेटिक गेट की भी तारीफ की गयी. यात्रियों ने बताया कि तेजस के अंदर फ्लाइट की तरह ही मैगजीन, पानी और खाने के लिए लजीज व्यंजन परोसे गए. केबिन क्रू ने बताया कि यात्रियों को सफर के दौरान बेहतर अहसास हो, इसके लिए उन्हें यह सुविधाएं दी गईं. कई यात्रियों ने तेजस के सफर को ऐतिहासिक करार दिया. यात्रियों ने कहा कि देश की ट्रेनों में इससे अच्छी सुविधा मुहैया नहीं कराई जा सकती. सुविधाओं के सामने किराया कोई मायने नहीं रखता. सफर पूरी तरह सुरक्षित और आनंद देने वाला है.

ट्रेन में खाना से लेकर पेपर-मैगजीन आदि के वितरण की व्यस्था एयर होस्ट्रेस के समान महिला परिचारिका के जिम्मे है. उन्हें बकायदा पीली और काली रंग की ड्रेस दी गयी है. जो ट्रेन के भीतर सुखद अहसास कराती हैं. यात्रियों से बात करने का अंदाज भी बेहतर और शालीन है जो यात्रा के अनुभव को और सुखद बना देता है.

 

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