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RPF DIG के बिछाये ‘जाल’ में फंस गये इंस्पेक्टर, कोयला चोरी में संलिप्तता पर मांगा गया स्पष्टीकरण !

फाइल फोटो

RAIPUR. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) बिलासपुर जोन में आरपीएफ डीआईजी ने ऐसा जाल बिछाया जिसमें कई इंस्पेक्टर एक साथ उलझ गये हैं. मामला कोयला चोरी के मामलों में कार्रवाई और आरपीएफ इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से जुड़ा है. डीआईजी मोहम्मद शाकिब ने कुछ दिन पहले ही कोयला चोरों के खिलाफ विशेष ड्राइव चलाने का फरमान जारी किया था. इस आदेश पर अनुपालन करते हुए बिलासपुर आरपीएफ कमांडेंट ने कंट्रोल ऑर्डर निकाला और सभी स्टेशन और पोस्ट प्रभारियों को कार्रवाई करने के आदेश दिए.

ड्राइव का आदेश आते ही कई इंस्पेक्टरों ने आनन-फानन में कोयला चोरों पर कार्रवाई की और मामले दर्ज किया. लेकिन पूरे मामले का खेल तब सामने आया जब अचानक डीआईजी ने दूसरा आदेश निकाल दिया, इसमें कहा गया कि विभिनन्न क्षेत्रों में इंस्पेक्टरों की कोयला चोरी को लेकर मौन स्वीकृति है और अब कार्रवाई को लेकर उसने स्पष्टीकरण मांगा गया है.
डीआईजी के दोनों आदेश के बीच फंस चुके आरपीएफ इंस्पेक्टर भी यह मान रहे हैं कि उन्हें ट्रैप करने के लिए यह स्वांग रचा गया. बताया तो यहां तक जा रहा है कि करीब आधा दर्जन से अधिक इंस्पेक्टर कोयला के खेल में उलझ गये है. बताया जाता है कि डीआईजी के आदेश पर चलाये गये अभियान में कोयला चोरी को लेकर 12 लोगों पर केस दर्ज किया गया. अब यहीं केस दर्ज करना इंस्पेक्टरों के लिए जंजाल बन गया है.

उन्हें समझ नहीं आ रहा कि स्पष्टीकरण में क्या जबाव दे? अगर कोयला चोरों के मुख्यालय के आदेश के बाद पकड़ा गया तो साफ है कि यह चोरी पहले भी हो रही थी. तब सवाल यह उठता है कि इंस्पेक्टर मौन क्यों थे? हालांकि वरीय इंस्पेक्टर डीआईजी के आदेश पर भड़के हुए है. कई लोगों का कहना है कि सेक्शन में कहां क्या चल रहा है इसकी पूरी जानकारी ऊपर तक होती है. अगर यह जानकारी डीआईजी तक नहीं पहुंची तो इसके लिए पूरी तरह उनके अधीन संचालित होने वाले सीआईबी और आईवीजी के लोग जिम्मेवार है? ऐसे मामलों की जांच उनसे क्यों नहीं करायी गयी?

फिलहाल यह मामला तकनीकी पेंच में फंस गया और अभियान में सक्रियता दिखाने वाले इंस्पेक्टर इस बात का जबाव खोलने में लगे है कि काेयले की चोरी हो रही थी तब वह क्यों अभियान चलाने के आदेश का इंतजार कर रहे थे ?

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