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कोटा डिवीजन : रेलवे यूनियनों ने नहीं छोड़ा कार्यालय, प्रशासन ने भेजा 2.62 करोड़ बकाया का रिकवरी नोटिस

रेलवे ने यूनियन को भेजा बकाया नोटिस - 1
  • 17 दिसंबर 2024 से 30 नवंबर 2025 की अवधि के लिए किराया और डेमरेज निर्धारित की गयी 
  • वित्तीय अनुशासन में गोलमाल और मनमानी पर बड़ा एक्शन लेने की तैयारी में  रेलप्रशासन 

KOTA. कोटा रेल मंडल ने अपने तरह के पहले निर्णय में रेलवे एम्पलाइज यूनियनों को कार्यालयों पर करोड़ों रुपये बकाया जमा कराने की नोटिस जारी की है. मान्यता का चुनाव हारने के बावजूद कार्यालय खाली न करने और किराया जमा नहीं कराने को लेकर यह नोटिस भेजा गया है. रेलवे ने कार्यालय का किराया और डेमरेज मिलाकर कुल 2 करोड़ 62 लाख 59 हजार रुपये की रिकवरी करने की तैयारी की है.

रेलवे एम्पलाइज यूनियन के कार्यालयों पर 2.62 करोड़ से अधिक की रिकवरी नोटिस जारी होने से यूनियन नेता सकते में है. हालांकि रिकवरी 17 दिसंबर 2024 से 30 नवंबर 2025 की अवधि के बीच की होगी. राशि कोटा मंडल के विभिन्न स्टेशन पर स्थिति यूनियन कार्यालयों के लिए तय की गई है, जिनमें कोटा, तुगलकाबाद, भरतपुर, बयाना, गंगापुर, सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी, रामगंजमंडी, शामगढ़ और विक्रमगढ़ आलोट शामिल हैं.

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रेलवे प्रशासन के सूत्रों की माने तो प्रशासन की से अग्रिम सूचना दिये जाने के बावजूद यूनियनों द्वारा निर्धारित समयावधि के बाद भी कार्यालय परिसर खाली नहीं किया गया और न ही नियमानुसार किराया ही जमा कराया गया. इसके बाद रेलवे की ओर से डेमरेज जोड़कर किराया की राशि वसूली के लिए पहल की गयी है. डेमरेज के नियमों के अनुसार तय अवधि के बाद हर माह किराया दोगुना होता जाता है, यही कारण है कि बकाया राशि अधिक हो गयी ह्रै.

उधर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भोपाल यूनियन कार्यालय के लिए भी 65 लाख 66 हजार 400 रुपये की रिकवरी नोटिस जारी की गयी है. इसके लिए संबंधित WCREU यूनियन के 12 कार्यालयों को नोटिस जारी किया गया है. तय समय में राशि जमा नहीं होने की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जायेगी.

गौरतलब है कि मान्यता चुनाव हारने के बाद संबंधित यूनियन को कार्यालय खाली करना था. रेलवे ने मंडल स्तर पर कार्यालय के उपयोग की अनुमति केवल एक वर्ष के लिए दी थी, लेकिन इसके बावजूद न तो कार्यालय खाली किए गए और न ही नियमित रूप से किराया जमा कराया गया. कई स्थानों पर लंबे समय से किराया बकाया चल रहा था.

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रेलवे प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्ति के उपयोग में नियमों का पालन अनिवार्य है. किसी भी संगठन को बिना अनुमति या किराया भुगतान के कार्यालय उपयोग करने की छूट नहीं दी जा सकती. इस कार्रवाई को रेलवे द्वारा अनुशासन और वित्तीय पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

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