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Urban Bank : अब शेयरधारक ही बन सकेंगे डायरेक्टर, नागपुर AGM का प्रस्ताव सहकारिता मंत्रालय से स्वीकृत

  • सदस्यों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के जोखिम का भी होगा कवर, सदस्यों को विकल्प चुनने का मिलेगा मौका 
  • पिछले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर द्वारा बाहरी या रिटायर्ड व्यक्ति को डायरेक्टर बनाने का नियम बदला गया  

KOLKATA. रेलवे अर्बन बैंक में अब रिटायर्ड अथवा बाहरी लोग बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल नहीं हो सकेंगे. नागपुर में 96वीं वार्षिक आम बैठक में पारित प्रस्ताव को सहकारिता मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद नया कानून लागू हो गया है. यहां बताना लाजिमी होगा कि पिछले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने अर्बन बैंक के कानून में ऐसा प्रावधान कर दिया था कि कोई भी बाहरी या रिटायर्ड व्यक्ति अर्बन बैंक का डायरेक्टर बन सकता था. अब इस बदलाव की मंजूरी मिल गयी है. अब भविष्य मे केवल और केवल रेलवे के शेयरधारक ही अर्बन बैंक के डायरेक्टर बन सकेंगे.

अर्बन बैंक यानी SE, SEC and ECo Railway Employees Co-Operative Credit Society Ltd के नागपुर में आयोजित Annual General Meeting में कई बदलावों का मसौदा पास किया गया था. अर्बन बैंक डेलिगेट मुंद्रिका प्रसाद के अनुसार इनमें अधिकांश बदलावों को Ministry of Cooperation (सहकारिता मंत्रालय) से मंजूरी मिल चुकी है. रबीन्द्र कुमार अग्रवाल, सेन्ट्रल रजिस्टार को-ऑपरेटिव सोसाइटी, नई दिल्ली ने मुख्य प्रबंधक अर्बन बैंक को लिखे पत्र मे इसकी जानकारी दी है.

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इसके साथ ही अर्बन बैंक में पुराने कई विवादास्पद कानून को भी हटाने की मंजूरी मिल चुकी है. अर्बन बैंक की ओर से जारी बयान में यह बात कही गयी है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने नागपुर के 96वीं वार्षिक आम बैठक में सोसाइटी के उप-नियमों में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन/जोड़ने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें दो बहुत महत्वपूर्ण नए क्लॉज़ शामिल हैं. क्लॉज़ नंबर 60(2)(c) और क्लॉज़ नंबर 60(6), जिन्हें सोसाइटी के उप-नियमों में जोड़ा जाएगा ताकि उन सदस्यों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के जोखिम को कवर किया जा सकेगा जिनके नाम पर मृत्यु की तारीख तक सोसाइटी का बकाया लोन हैऔर कुल बकाया राशि का भुगतान किया जा सके.

लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति द्वारा स्वीकृत प्रति 1,000/- रुपये या उसके बड़े हिस्से पर भुगतान की गई 2.50 रुपये की फीस का अतिरिक्त ट्रांसफर गारंटी फंड में किया जाएगा, जिसे सोसाइटी लोन स्वीकृत करते समय गारंटी फंड (मृत्यु राहत) में जमा के रूप में इकट्ठा करेगी. यह मौजूदा सिस्टम के अलावा होगा जिसमें उप-नियमों के क्लॉज़ 60(2)(a) के अनुसार आवेदक सदस्य द्वारा प्राप्त लोन की वास्तविक राशि पर प्रति 1,000/- रुपये या उसके बड़े हिस्से पर 1.00 रुपये की फीस ली जाती है, जो गारंटी फंड में जमा होती है.

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2.50 रुपये की फीस का यह अतिरिक्त ट्रांसफर 12 जनवरी, 2026 से स्वीकृत सभी लोन आवेदनों पर लागू होगा, ताकि उस सदस्य की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर बकाया लोन का भुगतान किया जा सके, जिस पर मृत्यु की तारीख तक सोसाइटी का कर्ज है. ऐसी राहत तभी दी जाएगी जब मृतक सदस्य ने मृत्यु की तारीख से पिछले 6 (छह) महीनों में रेलवे में कम से कम 135 (एक सौ पैंतीस) दिन ड्यूटी की हो.

सोसायटी के उप-नियमों के नए पेश किए गए क्लॉज़ नंबर 60(6)(d) के अनुसार गारंटी फंड से मृत्यु मामलों के निपटारे के संबंध में आवश्यक कार्य नियम और प्रक्रियाएं जल्द ही जारी की जाएंगी. यदि इस बीच गारंटी फंड (मृत्यु राहत) में ऐसा अतिरिक्त शुल्क देने वाले किसी सदस्य की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो जाती है, तो उसका निपटारा उपरोक्त कार्य नियमों और प्रक्रियाओं के जारी होने के बाद किया जाएगा.

जो सदस्य 09.01.2026 तक लोन लेंगे और जिनके नाम पर 12.01.2026 तक बकाया लोन है, वे भी निर्धारित प्रारूप में अपना विकल्प जमा करके और प्रति 1,000/- रुपये स्वीकृत लोन या उसके बड़े हिस्से पर 2.50 रुपये की आवश्यक फीस जमा करके, 30 मार्च, 2026 की तारीख तक गारंटी फंड (मृत्यु राहत) में जमा करने के लिए, दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के ऐसे जोखिम का कवरेज प्राप्त करने का विकल्प चुन सकते हैं. यह फीस स्वीकृत लोन पर गिनी जाएगी, न कि बकाया लोन पर.

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