- 52 सप्ताह में 34 चोरी की घटनाएं, RPF की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाये सवाल
- कांड्रा, सीनी, डीपीएस, टाटा, बंडामुंडा में लगातार बढ़ी हैं चोरी की घटनाएं
- डीआरएम ने RPF की सुरक्षा व्यवस्था को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है
- ट्रेनों की टाइमिंग ठीक करने को रुटीन ट्रैक रिनुअल कार्य पांच माह के लिए टाला गया
CHAKRADHARPUR. चक्रधरपुर रेलमंडल में ट्रेनों की लेट-लतीफी को लेकर लगातार यात्री संगठन अभियान चला रहे हैं. आलम यह है कि चक्रधरपुर को लेट डिवीजन और SER जोन को लेट जोन की संज्ञा देकर हैसटैग अभियान #LateDivisionCKP #LateZoneSER चल रहा है. इस अभियान के बीच सीकेपी डीआरएम तरुण हुरिया ने रविवार को मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा. डीआरएम का दावा है कि अब तक ट्रेनों की लेट-लतीफी के लिए डिवीजन में सिग्नल केबुल की चोरियों बड़ा कारण बनी है. इसके बाद हाथी और फॉग ट्रेनों के विलंब का दूसरा बड़ा कारण है.
डीआरएम तरुण हुरिया ने स्पष्ट किया कि उनके लिए ट्रेनों की पंक्चुअलिटी प्राथमिकता है न की लोडिंग. ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में लोडिंग को प्राथमिकता कभी नहीं माना गया. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेनों का परिचालन सामान्य करने के लिए रुटीन ट्रैक रिनुअल कार्य को पांच माह के लिए टाल दिया गया है. अब धीरे-धीरे चक्रधरपुर डिवीजन में ट्रेनों का परिचालन सामान्य हो जायेगा. डीआरएम का कहना था कि किसी भी कारण से अगर एक ट्रेन पांच मिनट लेट होती है तो उसका प्रभाव पीछे की दूसरी ट्रेनों पर 10 से 30 मिनट और अधिक के लिए बढ़ जाता है.
डीआरएम ने मीडिया के सामने स्वीकार किया कि बीते 52 सप्ताह में 34 चोरी की घटनाएं हुई. ये घटनाएं कांड्रा, सीनी, डीपीएस, टाटा, बंडामुंडा क्षेत्र में लगातार हो रही है. इससे ट्रेनों का परिचालन सामान्य करने में बाधा आ रही है. बीते नौ जनवरी को सीनी महाली के बीच ऐसी ही चोरी की घटना में ट्रेनाें का परिचालन पांच से सात घंटे तक प्रभावित रहा. चोर सिग्ननिंग रुम को तोड़कर उसमें से केबुल-बैटरी समेत तमाम उपकरण ले गये थे. इसमें अब तक पांच लोगों को पकड़ा गया है जबकि अन्य की तलाश जारी है. इस तरह डीआरएम ने RPF की सुरक्षा व्यवस्था को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है.
डीआरएम ने माना कि चोरी की घटना के बाद चोर तो पकड़े जाते है लेकिन जो डैमेज हुआ और उसके कारण ट्रेन विलंब से हजारों यात्रियों की परेशानी हुई उसकी भरपाई नहीं हो सकती है. डीआरएम ने इसमें मीडिया से भी सहयोग मांगा. डीआरएम ने कहा कि वह घुमा-फिराकर बात करने के आदि नहीं है वह जो बात सामने आयेगी उस पर स्पष्ट रूख रखेंगे. उनका प्रयास है कि यात्रियों का यात्रा सुरक्षित तरीके से पूरी हो.
हाथी की समस्या आने पर सिर्फ मेमु ट्रेनें क्या रद्द की जाती है !
डीआरएम के सामने यह बात उठायी गयी कि बीते दिनों में हाथी की समस्या आते ही मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया जाता है. डीआरएम के सामने यह बात रखी गयी कि आखिर यह भेदभाव क्यों ? इस बार डीआरएम ने कहा कि ऐसा नहीं है, आवश्यकता के अनुसार सभी ट्रेनों के परिचालन में बाधा आती है. डीआरएम ने कहा कि रेल प्रशासन की पूरी कोशिश है कि ट्रेनें समय पर चले. लेकिन हालात और चोरियों पर उनका बस नहीं है. उन्होंने चोरियों को रोकने में अपनी बेबसी जतायी और कहां कि मीडिया भी इसमें भूमिका निभाये.















































































