बिमलगढ़ में आरपीएफ जवान शंभू सिंह के सीबीआई हत्थे चढ़ने और इंस्पेक्टर डीके सिंह पर गिरी गाज के बाद भी बारसुआं, रांगरा और डांगुवापोसी जैसी प्रमुख रेलवे साइडिंगों में संगठित गिरोहों की गतिविधियां तेज है. पुलिस की कार्रवाई के बाद अवैध स्वीपिंग में आरपीएफ के कथित गठजोड़ की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग अब तेज हो गई है.
CKP/KOLKATA. लहुणीपाड़ा पुलिस द्वारा 30 टन अवैध कोयले से लदे ट्रोलर को जब्त किए जाने और चालक व हेल्पर की गिरफ्तारी के बाद अब रेलवे परिसरों और साइडिंगों में चल रहे अवैध कोयला और अयस्क स्वीपिंग का मामला गहराता जा रहा है. पुलिस की इस कार्रवाई ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्यशैली को फिर से सवालों में खड़ा कर दिया है. यह बताना लाजिमी है कि बिमलगढ़ में आरपीएफ जवान शंभू सिंह को सीबीआई ने अवैध कार्य के लिए घूस लेते पकड़ा था और इसकी गाज इंस्पेक्टर डीके सिंह पर भी गिरी थी.
30 टन अवैध कोयला जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-143 पर दरजिंग टोलगेट के पास संदिग्ध अवस्था में खड़े कोयला लदे ट्रोलर (JH-EF-3736) को गश्ती टीम ने जांच के लिए रोका. चालक द्वारा कोयले के वैध दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने पर पुलिस ने करीब 30 टन अवैध कोयला और वाहन जब्त कर लिया.

इस मामले में झारखंड निवासी चालक सुशील कुमार (34) तथा हेल्पर अभिषेक कुमार (30) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है. लहुणीपाड़ा पुलिस ने केस नंबर 222/26 दर्ज कर मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि अवैध कोयला राउरकेला की ओर ले जाया जा रहा था और लहुणीपाड़ा कॉलेज के पीछे भी कोयले की बोरियां डंप किए जाने की बात सामने आई है.
रेलवे क्षेत्र में कहां से आया इतना कोयला?
लहुणीपाड़ा में हुई बड़ी जब्ती के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में कोयला आखिर बाहर कैसे निकाला गया? यह काेयला कहां से निकाला गया? चर्चा है कि यह कोयला रेलवे साइडिंगों से अवैध स्वीपिंग कर बोरियों में भरकर निकाला जाता है. तब सवाल यह क्या यह कृत्य रेलवे क्षेत्र में आरपीएफ की मिलीभगत से चल रहा?
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का आरोप है कि बिमलगढ़, बारसुआं, पाटासाही और रांगरा जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों की साइडिंगों में बड़े पैमाने पर मालगाड़ियों से अवैध स्वीपिंग (कोयला चोरी व उतारा) का खेल धड़ल्ले से चल रहा है.
आरोप हैं कि आरपीएफ की मौन सहमति और कथित मिलीभगत के बिना रेलवे परिसरों में इतना बड़ा नेटवर्क पनपना संभव ही नहीं है. स्टेशन परिसरों में खुलेआम चल रही इस तस्करी के बावजूद सुरक्षा एजेंसियों का शांत रहना कई गंभीर संदेह पैदा करता है.
DPS से संचालित है कि अवैध स्वीपिंग का पूरा नेटवर्क
कारोबार के तरीके पर गौर करें तो लौह अयस्क और कोयले की ढुलाई के लिए पहुंचने वाली मालगाड़ियों से तस्कर योजनाबद्ध तरीके से कोयला बोरियों में भरकर नीचे उतार (स्वीपिंग कर) लेते हैं. बाद में इस चोरी के माल को एक जगह एकत्र कर बड़े ट्रोलरों और ट्रकों के जरिए झारखंड के धनबाद तथा अन्य इलाकों में भेज दिया जाता है.
डांगुवापोसी में अन-लोडिंग का ‘अवैध’ खेल, दिन के उजाले में उतार जा रहा ‘आयरन ओर’, RPF का संदिग्ध मौन!
यह कोई अकेली घटना नहीं है. रेलवे क्षेत्र में अवैध स्वीपिंग का यह धंधा कई इलाकों में जड़ों तक फैला हुआ है. इसका एक प्रमुख उदाहरण डांगुवापोसी है, जहां लंबे समय से आयरन ओर (लौह अयस्क) की संदिग्ध और अवैध स्वीपिंग का काला कारोबार बदस्तूर जारी है.
डांगुवापोसी में सालों से एक संगठित गिरोह के रूप में संचालित यह अवैध धंधा रेलवे के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन स्थानीय रेल प्रशासन व आरपीएफ की ओर से कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिलती.
सीबीआई की गिरफ्त में आ चुका है RPF जवान
विमलगढ़ में आरपीएफ का जवान शंभू सिंह को सीबीआई ने अवैध कृत्य के लिए घूस लेते पकड़ा था. इस मामले में RPF प्रभारी इंस्पेक्टर डीके सिंह पर भी गाज गिरी थी. लहुणीपाड़ा पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब यह मांग शुरू हो गयी है कि बिमलगढ़, बारसुआं, रांगरा और डांगुवापोसी समेत पूरे रेल मंडल की साइडिंगों में चल रहे अवैध कोयला व आयरन ओर स्वीपिंग के इस गठजोड़ की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए.
यदि आरपीएफ कर्मियों और तस्करों की सांठगांठ की जांच की जाती है, तो बड़े अंतरराज्यीय अवैध परिवहन और स्वीपिंग नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है. इस मामले में डांगुवापोशी में आरपीएफ सहायक कमांडेंट की जांच रिपोर्ट का भी खुलासा करने की मांग की गयी है.




