AGRA. आगरा रेल मंडल से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज मामला सामने आया है. आगरा के डीआरएम (DRM) ऑफिस में तैनात 30 वर्षीय असिस्टेंट ऑपरेशंस मैनेजर (AOM) अभिषेक सिंह का शव उनके चैंबर में कुर्सी पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है. इस घटना के बाद से रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है और कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या माना जा रहा है, हालांकि पुलिस और फोरेंसिक टीम हर पहलू से मामले की गहराई से जांच कर रही है.
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. टीम ने अभिषेक सिंह के चैंबर का मुआयना किया और वहां से सुराग जुटाने के लिए जरूरी साक्ष्य (फॉरेंसिक सबूत) एकत्र किए. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों की तहरीर के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस दुखद घटना के पीछे वास्तव में किन परिस्थितियों और लोगों की लापरवाही या प्रताड़ना का हाथ है.
क्या है घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, अभिषेक सिंह रविवार (2 नवंबर 2026) की सुबह अपने ऑफिस आए थे. दोपहर करीब 3 बजे वह अपने घर गए और वहां से एक डायरी लेकर वापस दफ्तर लौटे थे, जिसके बाद वह घर नहीं लौटे. जब देर रात 9 बजे तक वह घर नहीं पहुंचे और उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आने लगा, तो परिजनों को गहरी चिंता हुई.
परिजनों ने इसकी सूचना तुरंत उनके साथी कर्मचारियों को दी. जब साथी कर्मचारी उनके चैंबर के पास पहुंचे तो दरवाजा खुला हुआ था और अभिषेक सिंह अपनी कुर्सी पर मृत अवस्था में पाए गए. उनके मुंह से झाग निकल रहा था और आसपास कुछ गोलियां भी पड़ी हुई थीं. घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और वे तुरंत दफ्तर पहुंचे. शव को देखते ही उनकी पत्नी और मां बुरी तरह फूट-फूटकर रोने लगे, जिन्हें संभालना मुश्किल हो गया था.
परिवार के गंभीर आरोप: “सीनियर अधिकारी करते थे टॉर्चर”
मृतक की पत्नी आस्था और मां सुशीला देवी ने सीनियर अधिकारियों पर भारी मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं. पत्नी आस्था ने मीडिया के सामने बताया कि उनके पति पिछले कुछ समय से भारी तनाव में चल रहे थे. सीनियर अधिकारी लगातार उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे और उन पर अत्यधिक काम का दबाव बना रहे थे. आस्था का आरोप है कि अधिकारी उन्हें ट्रेनिंग पर भी नहीं जाने दे रहे थे और दो बार नाम आने के बावजूद उनकी ट्रेनिंग कैंसिल कर दी गई थी.

अधिकारियों द्वारा हमेशा उन्हें यह कहकर धमकाया जाता था कि “तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर देंगे और नौकरी से निकाल देंगे.” आस्था ने यह भी बताया कि वह अक्सर अपने पति से कहती थीं कि यदि नौकरी में बहुत ज्यादा परेशानी है, तो वे इसे छोड़कर गांव वापस लौट सकते हैं और कोई अन्य काम कर सकते हैं.

मां ने बिलखते हुए कहा कि उनके बेटे से ऑफिस में जरूरत से ज्यादा काम करवाया जाता था और उसे मानसिक रूप से बेहद प्रताड़ित किया जाता था. यहां तक कि उसे धमकी दी जाती थी कि उसका ट्रांसफर साउथ (दक्षिण भारत) में कर दिया जाएगा और उसे छुट्टियां भी नहीं दी जाती थीं. मां का रो-रोकर बुरा हाल है क्योंकि अभिषेक उनके परिवार का इकलौता सहारा था.
तीन महीने पहले ही हुआ था प्रयागराज से ट्रांसफर
अभिषेक सिंह अपने परिवार के इकलौते बेटे थे. महज तीन महीने पहले ही उनका ट्रांसफर प्रयागराज से आगरा हुआ था. वह डीआरएम ऑफिस परिसर में ही बने सरकारी आवास में अपनी पत्नी, मां और दो छोटे बच्चों के साथ रह रहे थे. उनका घर और ऑफिस के बीच की दूरी महज 200 मीटर थी. उनके परिवार में एक छोटा बेटा भी है जिसका जन्म मात्र 4 महीने पहले ही हुआ था. घर की खुशियां अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई थीं कि इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को उजाड़ कर रख दिया.
आक्रोशित कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
घटना की जानकारी मिलते ही सोमवार सुबह बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी भड़क उठे. उन्होंने डीआरएम ऑफिस के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और ‘कर्मचारियों का शोषण बंद करो’ तथा ‘दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार करो’ के नारे लगाए. इस हंगामे के बाद रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को शांत कराने तथा निष्पक्ष जांच का आश्वासन देने में जुटे रहे.


