“यदि कार्यस्थल पर सब कुछ सामान्य था, तो एक अधिकारी ने अपने घर के बजाय सीधे कार्यालय के चैंबर में ऐसा कदम क्यों उठाया?” यह सवाल अपने आप में प्रशासनिक व्यवस्था की उस काली सच्चाई को बयां करता है, जिसके साये में रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी घुट-घुटकर काम करने को मजबूर हैं.
AGRA. आगरा डिवीजन में 32 वर्षीय असिस्टेंट ऑपरेशंस मैनेजर (AOM) अभिषेक सिंह कुशवा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने रेलवे महकमे की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को एक तरह से बेनकाब कर दिया है. इस पूरी घटना के केंद्र में सीनियर डिवीजनल ऑपरेशंस मैनेजर (को-ऑर्डिनेशन) कुलदीप मीना की कार्यप्रणाली आ गई है, जिन पर पहले से ही अधिनस्थों के उत्पीड़न के आरोप लगते रहे हैं.
स्थिति यह है कि ऑपरेटिंग विभाग में मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर इससे पहले भी कई अधिकारी और कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) तक ले चुके हैं. इसके बावजूद उत्पीड़न का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है, जिससे रेलवे बोर्ड के उन तमाम दावों की पोल खुलती है जिनमें वर्क कल्चर सुधारने और कर्मचारियों को तनावमुक्त माहौल देने की बात कही जाती है.
अभिषेक के परिजनों ने मामले में सीनियर डीओएम की प्रताड़ना को ही मुख्य कारण बताया है. फिलहाल मामले की जांच रेल पुलिस के अलावा आरपीएफ के स्तर पर विभागीय टीम भी कर रही है. इसमें क्या सामने आयेगा यह देखने वाली बात होगी.
विवादों में रही है कुलदीप मीना की कार्यशैली
आगरा मंडल में अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक उत्पीड़न का यह कोई पहला मामला नहीं है. आरोपी अधिकारी कुलदीप मीना का विवादों से पुराना नाता रहा है. इससे पहले तत्कालीन डिवीजनल चीफ कंट्रोलर दिनेश कपिल ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में याचिका दायर कर गंभीर आरोप लगाए थे. मामला 3 नवंबर 2022 का था, जब कुलदीप मीना के साथ तीखी बहस और अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना के बाद श्री कपिल को इस हद तक मजबूर कर दिया गया था कि उन्होंने जबरन वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) का आवेदन दे दिया था.

हालांकि बाद में उन्होंने वीआरएस आवेदन वापस लेना चाहा, तो रेलवे प्रशासन ने उसे सिरे से खारिज कर दिया था. बाद में मामला कैट (CAT) में गया और दिनेश कपिल के पक्ष में फैसला आया. इस तरह उनकी बहाल करने के साथ-साथ 30 लाख रुपये से अधिक का बकाया वेतन व भत्ते का बोझ भी रेलवे पर पड़ा. यह क्रम अब भी जारी है. तीन से अधिक क्रू कंट्रोलरों ने बीते माह वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) का आवेदन दिया है. हालांकि उन्होंने कारण तो पारिवारिक व स्वास्थ्य बताया है लेकिन AOM की संदिग्ध मौत के बाद ये आवेदन चर्चा का विषय बन चुके हैं.
परिवार के गंभीर आरोप: सुबह 9 से रात 11 बजे तक टॉर्चर
मृतक एओएम अभिषेक सिंह कुशवा की पत्नी और मां ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में सीनियर डीओएम (कोऑर्डिनेशन) कुलदीप मीना पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परिवार का कहना है कि कुलदीप मीना के अनुचित दबाव और टॉक्सिक वर्क कल्चर के कारण अभिषेक काफी तनाव में थे. उन्हें सुबह 9 बजे से लेकर रात के 11 बजे तक जबरन कार्यालय में रोका जाता था. आदेशों का पालन करने में असमर्थता जताने पर करियर को बर्बाद करने की धमकियां दी जाती थीं. रविवार रात करीब 11 बजे उनका शव डिवीजनल कार्यालय के ही एक चैंबर में संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया.
AIRF की सख्ती और रेलवे बोर्ड का आश्वासन
ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार से मिलकर मामले में उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है. बतौर महासचिव चेयरमैन ने घटना पर गहरी संवेदना जताते हुए निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है और आश्वस्त किया है कि दोषी अधिकारी खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
रेल प्रशासन का प्रताड़ना के आरोपों से इंकार
एक युवा अधिकारी की कार्यालय में AOM की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद आगरा मंडल रेल प्रशासन सकते में है. इस मामले में आरोपों के घेरे में आये सीनियर डीओएम कुलदीप मीना ने मीडिया के सामने टिप्पणी से इंकार किया तो जनसंपर्क अधिकारी (PRO) संजय गौतम ने अधिकारी पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है. उनका कहना था कि पुलिस की जांच चल रही है ऐसे में कुछ भी कहना ठीक नहीं.
वहीं, उत्तर मध्य रेलवे (NCR) जोन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बड़ा सवाल उठाया है कि “यदि कार्यस्थल पर सब कुछ सामान्य था, तो एक अधिकारी ने अपने घर के बजाय सीधे कार्यालय के चैंबर में ऐसा कदम क्यों उठाया?” यह सवाल अपने आप में प्रशासनिक व्यवस्था की उस काली सच्चाई को बयां करता है, जिसके साये में रेलवे के मैदानी और कार्यालयीन अधिकारी घुट-घुटकर काम करने को मजबूर हैं. बोर्ड के सख्त एक्शन के आश्वासनों के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार महकमा अपनी ही कार्यसंस्कृति को सुधारने के लिए कोई ठोस और नजीर पेश करने वाला कदम उठाएगा या मामला फाइलों में ही दबी रह जाएगी.
आगरा DRM ऑफिस में संदिग्ध हालत में मिला AOM का शव, परिवार ने लगाया मानसिक प्रताड़ना के आरोप
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उस पर तत्परता से संज्ञान लिया जायेगा.


