- दूसरे पक्ष ने कहा – आधा-अधूरा सच है सामने, इलाहाबाद उच्च न्यायालय जा रहे है और जल्द ही सही स्थिति सामने आयेगी
PRAYAGRAJ. उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहे प्रशासनिक और सांगठनिक विवाद पर श्रम एवं रोजगार विभाग ने मामले को न्यायालय के पाले में डाल दिया है. उप रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन्स, प्रयागराज ने जारी अपने आदेश में कई बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्थिति में उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) पर रूपम पाण्डेय का नेतृत्व बरकरार है.
जारी आदेश में बताया गया है कि उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ, प्रयागराज क्षेत्र (जोन), जिसका पंजीयन संख्या-8927 और दिनांक 12/05/1998 है, ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 के अंतर्गत पंजीकृत एक वैध निकाय है. संघ का संचालन उत्तर प्रदेश ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित पंजीकृत विधान (Constitution) के नियमों के अनुसार किया जाता है. इसके विधान की धारा-37 के तहत कार्यकारी चुनाव प्रत्येक 3 वर्ष में जनवरी से अप्रैल माह के बीच कराए जाने का स्पष्ट प्रावधान है.
हाल ही में उठे आंतरिक विवाद और कुछ गुटों द्वारा पैरेलल बैठकों व पत्राचार किए जाने पर उप श्रम आयुक्त और रजिस्ट्रार कार्यालय ने संज्ञान लिया. विभाग के स्पष्टीकरण के अनुसार, 6 अगस्त 2026 को जारी फॉर्म ‘J’ पूरी तरह से वैध है और बरकरार है. इसके आधार पर रूपम पाण्डेय ही उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ के आधिकारिक और वैध महामंत्री बने हुए हैं.
रजिस्ट्रार कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि अधिकृत नेतृत्व के इतर यदि किसी अन्य गुट द्वारा संघ के नाम पर कोई बैठकें, समानांतर पत्राचार या ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, तो उन्हें कोई कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसे तमाम असंवैधानिक दावों और ज्ञापनों को प्रशासनिक स्तर पर खारिज (Dismiss) कर दिया गया है. विभाग ने साफ किया है कि संगठन के नाम पर भ्रम फैलाने वाली ऐसी गतिविधियों का कोई वैधानिक आधार नहीं है.
इस विवाद के सिलसिले में संघ के महामंत्री रूपम पाण्डेय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या (सी)-36361/2026 दायर की थी. इस मामले पर 11.09.2026 को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल एक नोटिस को चुनौती दी है, जबकि याचिकाकर्ताओं के पास अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मौजूद है. अदालत ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता 14.09.2026 तक नोटिस के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हैं, तो संबंधित प्राधिकारी द्वारा उन आपत्तियों पर उसके सात दिन के भीतर उचित निर्णय लिया जाएगा.
इस तरह पूरे विवाद में उप श्रम आयुक्त कार्यालय ने उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में फॉर्म ‘J’ की वैधता को स्वीकारते हुए स्पष्ट किया है कि इस विवाद का निबटारा संबंधित न्यायालय में संभव है. ऐसे में प्रतिवादी पक्ष कानूनी बिंदुओं के तहत अपनी बात कोर्ट के सामने रख सकते हैं. उप श्रम आयुक्त कार्यालय ने अपने आदेश में माना कि UMRKS का संचालन विधिवत रूप से अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा ही किया जा रहा है.
उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) के महामंत्री रूपम पांडेय ने बयान जारी कर इसे कानूनी जीत बताया है जबकि दूसरे पक्ष से कुंदन कुमार ने कहा कि यह आधा-अधूरा सच है. रूपम पांडेय का दावा संघ के संविधान के विपरीत है. हम इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय जा रहे है और जल्द ही सही स्थिति सामने आयेगी.




