Bhopal/Betul. मध्य रेल (Central Railway) के नागपुर मंडल द्वारा रेलवे स्टेशनों पर आवारा कुत्तों की समस्या के संदर्भ में प्रस्तुत की गई अनुपालन (कम्प्लायंस) रिपोर्ट विवादों के घेरे में आ गई है. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में सौंपी गई इस रिपोर्ट को भोपाल एवं बैतूल निवासी दो वरिष्ठ नागरिकों तथा व्हिसलब्लोअर्स ने भ्रामक व तथ्यहीन करार दिया है. इस संबंध में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CRB) और राज्य मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की औपचारिक मांग की गई है.
क्या है मामला
उच्चतम न्यायालय ने “City Hounded by Strays, Kids Pay Price” शीर्षक वाली स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान 7 नवंबर 2025 और 19 मई 2026 को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे. अदालत ने सभी रेलवे स्टेशनों पर एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया था, ताकि परिसरों में स्वच्छता बनी रहे और आवारा मवेशियों व कुत्तों के प्रवेश पर प्रभावी रोक लग सके.
न्यायालय ने यह भी हिदायत दी थी कि आदेश की अवहेलना या शिथिलता पाए जाने पर संबंधित प्राधिकारियों के विरुद्ध अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही की जाएगी. इसी क्रम में नागपुर मंडल ने 31 जुलाई 2026 को रिपोर्ट दाखिल कर दावा किया था कि मंडल के सभी 94 स्टेशनों पर स्टेशन मैनेजर अथवा डिप्टी स्टेशन मैनेजर को नोडल अधिकारी नामित कर दिया गया है.
RTI खुलासे से दावों पर उठे सवाल
व्हिसलब्लोअर्स वी. के. पालीवाल और ए. के. कटारे द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है. नागपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (Sr. DOM), जो स्वयं स्टेशन मास्टरों के नियंत्रक अधिकारी हैं, ने 10 अगस्त 2026 के अपने RTI उत्तर में स्पष्ट किया कि उनके विभाग में रेलवे बोर्ड के आदेश या नोडल अधिकारियों के नामांकन से संबंधित कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि जब नियंत्रक विभाग के पास ही कोई आधिकारिक अभिलेख मौजूद नहीं है, तो अनुपालन रिपोर्ट में प्रस्तुत तथ्य स्वतः निराधार सिद्ध होते हैं.
जमीनी वास्तविकता और प्रशासनिक विसंगतियां
पत्र में उल्लेख किया गया है कि नागपुर मंडल के स्टेशन मास्टरों के आंतरिक संचार समूहों में अधिकारियों ने स्वयं इस प्रकार की किसी नियुक्ति अथवा आदेश की जानकारी होने से इनकार किया है. इसके अतिरिक्त, वर्तमान में लागू तीन-शिफ्ट ड्यूटी रोस्टर के कारण किसी एक स्टेशन पर स्थाई व पहचान योग्य नोडल अधिकारी की उपस्थिति व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.
तुलनात्मक अध्ययन के तौर पर मुंबई मंडल (मध्य रेल) का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जिसने अपनी अनुपालन रिपोर्ट में 128 नोडल अधिकारियों के नाम, पदनाम और संपर्क नंबर सहित पारदर्शी व सत्यापन योग्य सूची जारी की है.
कानूनी कार्यवाही और मानवाधिकार आयोग में शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रतियां महाप्रबंधक (मध्य रेल), बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर खंडपीठ) और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) के रजिस्ट्रार जनरल को प्रेषित की गई हैं. शिकायतकर्ताओं ने जांचोपरांत दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की प्रक्रिया शुरू करने की गुहार लगाई है.
साथ ही, प्लेटफॉर्मों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यात्रियों, कर्मचारियों एवं बच्चों के जीवन व सुरक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन मानते हुए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग की गई है.
शिकायतकर्ताओं ने यह आशंका भी व्यक्त की है कि बैक-डेट में स्वीकृति पत्र बनवाने का प्रयास किया जा सकता है, अतः मूल अभिलेखों के संरक्षण एवं कर्मचारियों पर अनुचित दबाव रोकने हेतु विशेष निर्देश देने का आग्रह किया गया है.
वीके पालीवाल, बैतूल




