ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के सहायक महामंत्री केएल गुप्ता का शुक्रवार की दोपहर 110 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होने गोरखपुर के पुर्दिलपुर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली. रेलवे के गांधी कहे जाने वाले केएल गुप्ता 60 साल तक कर्मचारियों और मजदूरों की आवाज बने रहे. उन्होंने रेलवे कर्मचारियों-मजदूरों की तीन पीढ़ियों को नेतृत्व और मार्गदर्शन प्रदान किया. यह आवाज आज खामोश हो गयी.
भारतीय रेल और श्रमिक आंदोलन के इतिहास में कॉमरेड के.एल. गुप्ता (कन्हैया लाल गुप्ता) एक ऐसा नाम है, जिनकी पूरी जिंदगी त्याग, संघर्ष, सादगी और निष्ठा की एक जीवंत मिसाल थी. 109 वर्ष की दीर्घायु प्राप्त करने वाले कॉमरेड गुप्ता ने स्वतंत्रता से बहुत पहले रेलवे सेवा में प्रवेश किया और जीवन के अंतिम क्षण तक श्रमिकों के अधिकारों के लिए समर्पित रहे. उनका जीवन केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय मजदूर आंदोलन के करीब आठ दशकों का प्रामाणिक इतिहास है.
संघर्ष और जुझारू तेवर ने 1960, 1968 और 1974 को बनाया ऐतिहासिक पड़ाव
कॉमरेड गुप्ता के जीवन की कसौटी स्वतंत्र भारत के केंद्रीय और रेल कर्मचारी आंदोलन के तीन सबसे बड़े पड़ाव बने—1960, 1968 और 1974.
- 1960 का केंद्रीय कर्मचारी आंदोलन: द्वितीय वेतन आयोग के बाद बढ़ती महंगाई और वेतन के अपर्याप्त निर्धारण के विरोध में केंद्रीय कर्मचारियों ने व्यापक हड़ताल की थी, जिसमें रेलकर्मी सबसे आगे थे.
- 1968 का संघर्ष: आवश्यकता-आधारित न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मिलाने की मांग को लेकर यह आंदोलन हुआ, ताकि पेंशन और अन्य लाभ सुरक्षित रह सकें.
- 1974 की ऐतिहासिक रेल हड़ताल: 8 मई 1974 को जॉर्ज फर्नांडीज के नेतृत्व में शुरू हुई यह हड़ताल दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक आंदोलनों में गिनी जाती है, जिसमें लगभग 17 लाख रेलकर्मी शामिल हुए और यह करीब बीस दिन तक चली.
इन आंदोलनों में मुखर भागीदारी के कारण कॉमरेड गुप्ता को भारी कीमत चुकानी पड़ी. सेवाकाल के दौरान उन्हें चार बार नौकरी से बर्खास्त किया गया और कई बार जेल की सजा काटनी पड़ी, लेकिन वे अपने मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए. 1979 में चरण सिंह सरकार द्वारा रेलकर्मियों को दिया गया उत्पादकता-आधारित बोनस उनकी प्रमुख मांगों में से एक था, जिसका लाभ आज भी हर रेलकर्मी उठा रहा है.
एनईआरएमयू (NERMU) का नेतृत्व और अजेय विश्वास
वर्ष 1981 में रेलवे सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कॉमरेड गुप्ता ने संगठन का साथ नहीं छोड़ा. वे निरंतर पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (NERMU) के महामंत्री चुने जाते रहे. दिसंबर 2022 में फतेहगढ़ में हुए यूनियन के 62वें वार्षिक अधिवेशन में, 106 वर्ष की आयु में उन्हें लगातार 62वीं बार निर्विरोध महामंत्री चुना गया. उनके इस असाधारण कार्यकाल और छह दशकों से अधिक के जनविश्वास ने उन्हें दुनिया के सबसे वयोवृद्ध ट्रेड यूनियन नेताओं में ला खड़ा किया. बाद में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने महामंत्री का दायित्व छोड़कर केंद्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और अंत तक संगठन के मार्गदर्शक बने रहे.
सादगी, अनुशासन और अंतिम पायदान के कर्मचारी की चिंता
कॉमरेड गुप्ता का व्यक्तिगत जीवन किसी तपस्या से कम नहीं था. वे प्रतिदिन तड़के करीब तीन बजे उठते, दिनभर काम करते और बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीते थे. उनके जीवन का केंद्रीय बिंदु हमेशा सबसे निचले पायदान का कर्मचारी रहा. रेलवे बोर्ड की स्थायी वार्ता तंत्र (PNM) बैठकों में ट्रैक मेंटेनर्स को 4200 ग्रेड पे दिलाने और गेटमैन तथा सफाई कर्मियों को अन्य विभागों में अवसर दिलाने जैसे मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने में उनकी अहम भूमिका रही.
श्रमिक नेतृत्व के लिए एक मार्गदर्शन
कॉमरेड के.एल. गुप्ता का जीवन आज के श्रमिक नेतृत्व के लिए तीन स्पष्ट सूत्र छोड़ जाता है:
- निरंतरता: श्रमिक अधिकारों का संघर्ष किसी एक कार्यकाल तक सीमित नहीं, बल्कि सतत दायित्व है.
- शुचिता: नेतृत्व का अर्थ पद-लाभ नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सुख-सुविधा का त्याग है.
- प्राथमिकता: सबसे निचले ग्रेड के कर्मचारी की समस्या ही संगठन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए.
उनका भौतिक रूप से चले जाना भले ही एक युग का अंत हो, लेकिन उनके विचार, आदर्श और संघर्ष की मशाल आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी. ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन और एनई रेलवे मजदूर यूनियन ही नहीं अन्य कर्मचारी संगठनों ने उनके निधन को मजदूर आंदोलन के लिए अपूर्णीय क्षति करार देते हुए शोक जताया है. फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्र, फेडरेशन के सहायक महामंत्री नरमू के महामंत्री बसंत लाल चतुर्वेदी, फेडरेशन के जोनल सेक्रेटरी और यूनियन के संयुक्त महामंत्री ओंकार नाथ सिंह, मंडल मंत्री संजय कुमार पांडेय समेत कई लोगों ने शोक-संवेदना जतायी है.
वीरेंद्र कुमार पालीवाल, पूर्व स्टेशन मैनेजर, मध्य रेलवे


