राहत की खबर है कि अवैध वसूली को अंजाम देने वाले पोर्टर मुन्ना यादव की पहचार रेल प्रशासन ने की और उसे आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया. कुली का लाइसेंस भी केंसिल कर दिया गया है.
अरे भई, रेलवे स्टेशनों की शान कहे जाने वाले कुलियों का रुतबा आजकल किसी कॉरपोरेट बॉस से कम नहीं है! ट्रेन से उतरते ही जब कोई मुसाफिर सामान उठाने के लिए कुली को पुकारता है, तो उसे लगता है कि चलो, मामूली मजदूरी देकर काम चल जाएगा.
लेकिन जनाब, पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध हावड़ा स्टेशन पर जो हुआ, उसे सुनकर तो अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएंगे. यहां कुलियों की “अमीर वाली गरीबी” का ऐसा जलवा देखने को मिला कि एक यात्री की जेब से महज़ कुछ बोरियों-बिस्तरों के नाम पर पूरे ₹4700 झटक लिए गए!
मजबूरी का फायदा और कुलियों का ‘रॉकेट’ रेट
बात कुछ ऐसी है कि एक बड़ी कंपनी के इंजीनियर अरुणाभ मुखर्जी अपने परिवार के साथ कूच बिहार से मुंबई जा रहे थे. जब वह भारी बारिश के बीच हावड़ा स्टेशन पहुंचे, तो उनके पास 7 ट्रॉली बैग और 4 हैंड लगेज थे.
परिवार में बूढ़ी मां, पत्नी और चार महीने की बच्ची होने के कारण उनकी विवशता साफ थी. बस फिर क्या था, कुलियों के एक शातिर गिरोह ने इस लाचारी को अपना तुरुप का पत्ता बना लिया. पहले तो मीठी-मीठी बातों से झांसे में लिया और जब सामान दूसरे प्लेटफॉर्म पर पहुंचा, तो असली रंग दिखाने लगे.
मोल-भाव करके बात ₹4700 पर तय हुई, जिसमें ₹1700 कैश दिए गए और बाकी ₹3000 सीधे यूपीआई (UPI) से ट्रांसफर करवाए गए. वाह भाई वाह! अब कुली भी डिजिटल इंडिया के पूरे रंग में नजर आ रहे हैं, बस फर्क इतना है कि तरीका वसूली वाला है.
कहा गया कि ₹6,000 लगेंगे! जब यात्री ने माथा पीटा और विरोध जताया, तो बेशर्मी की हद पार करते हुए धमकी दे डाली, “पैसे नहीं दिए, तो सारा सामान पटरी पर फेंक देंगे!” ऊपर से फोन घुमाकर अपने साथी कुलियों का पूरा लवाजमा मौके पर बुला लिया. अब चारों तरफ भारी बारिश, गोद में नन्ही बच्ची और सिर पर ट्रेन छूटने की टेंशन, बेचारे यात्री के पास झुकने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा था. मोल-भाव करके बात ₹4700 पर तय हुई, जिसमें ₹1700 कैश दिए गए और बाकी ₹3000 सीधे यूपीआई (UPI) से ट्रांसफर करवाए गए. वाह भाई वाह! अब कुली भी डिजिटल इंडिया के पूरे रंग में नजर आ रहे हैं, बस फर्क इतना है कि तरीका वसूली वाला है.
असली पोल खुली मुंबई पहुंचकर
मजे की बात तो तब हुई जब यही मुसाफिर अगले दिन मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल (CSMT) पहुंचे. वहां जब उन्होंने उतने ही भारी-भरकम सामान को स्टेशन से बाहर निकलवाने के लिए कुली की सेवा ली, तो कुलियों ने सिर्फ ₹800 चार्ज किए. तब जाकर हमारे साहब की आँखें खुलीं और समझ आया कि हावड़ा के कुलियों ने उन्हें किस करीने से चूना लगाया है!
प्रशासन की चुप्पी और बेलगाम होते तेवर
अब सवाल यह उठता है कि क्या रेलवे प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह खेल अधिकारियों की नींद नहीं खोलता? नियमों के मुताबिक उस भारी-भरकम सामान के लिए अधिकृत शुल्क महज ₹220 के आसपास होना चाहिए था, लेकिन वसूली का यह आंकड़ा तय सीमा से लगभग 21 गुना ज्यादा था!
कुली भाई साहब मुन्ना यादव के नेतृत्व में यह गैंग अपनी मनमानी के झंडे गाड़ रहा था. हालांकि, जब मामला सोशल मीडिया पर गरमाया और पूर्व रेलवे के कान पर जूं रेंगी, तब जाकर आरपीएफ (RPF) हरकत में आई और मुख्य आरोपी कुली को दबोचकर उसका लाइसेंस रद्द किया गया.
तो भई, हावड़ा स्टेशन के इन ‘रॉबिनहुड’ कुलियों की ये कारगुजारियां यही सिखाती हैं कि सफर करते वक्त सतर्क रहें, वरना आपकी गाढ़ी कमाई का मीटर कब रॉकेट की रफ्तार पकड़ लेगा, आपको पता भी नहीं चलेगा!
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