KOLKATA. विभिन्न स्टेशनों पर फैली गंदगी और पीने के पानी में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने की शिकायतों के बाद रेलवे बोर्ड द्वारा जारी कड़े दिशानिर्देशों के आधार पर दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) हरकत में आया है. बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन में SER प्रशासन द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी स्टेशनों पर पेयजल तथा जलापूर्ति व्यवस्था की उपलब्धता, गुणवत्ता, स्वच्छता एवं विश्वसनीयता में सुधार के उद्देश्य से विशेष maintenance, सफाई, परीक्षण और सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं.
साफ-सफाई, क्लोरीनेशन और फिल्ट्रेशन का बड़ा अभियान
रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस सतत अभियान के तहत जल स्रोतों, ट्रीटमेंट प्लांट्स, टैंकों, वाटर बूथों और सप्लाई लाइनों का गहन निरीक्षण किया गया है:
- जल टैंकों की शत-प्रतिशत सफाई: दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत आने वाले कुल 24,033 जल टैंकों (भूमिगत, ओवरहेड, RCC एवं PVC टैंक) की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है.
- क्लोरीनेशन एवं आयरन रिमूवल: दक्षिण पूर्व रेलवे में स्थित सभी 63 क्लोरीनेशन प्लांट्स का अनुरक्षण किया गया है और क्लोरीन डोजिंग को आवश्यकतानुसार समायोजित किया गया है. इसके अलावा, अत्यधिक लौह तत्व वाले इलाकों में लगे सभी 23 आयरन रिमूवल प्लांट्स का मेंटेनेंस पूरा कर लिया गया है.
- फिल्टरों का रख-रखाव: जल शोधन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 52 प्रेशर/ग्रेविटी फिल्टरों की गहन सफाई की गई और खराब कलपुर्जों को बदला गया.
- गुणवत्ता और सैंपल टेस्टिंग: स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के समन्वय से पानी की जांच की जा रही है. रेसिड्यूअल क्लोरीन लेवल (RCL) की जांच के लिए 3,413 सैंपल, बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्टिंग के लिए 334 सैंपल और रासायनिक जांच के लिए 21 सैंपल एकत्र किए गए हैं.
कागजी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
रेलवे बोर्ड के कड़े रुख के बाद कागजों पर तो बड़े पैमाने पर मेंटेनेंस, AMC अनुबंध और वाटर कूलरों की मरम्मत के काम दर्ज कर दिए गए हैं, लेकिन कई स्टेशनों पर आज भी जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है.
कई स्टेशनों पर यात्रियों को अब भी नलों के पास गंदगी, लीकेज और दूषित पानी की शिकायत का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में केवल बोर्ड के निर्देशों पर कागजी खानापूर्ति करने के बजाय, सभी स्टेशनों पर शुरू किए गए इन सुधार कार्यों के निष्पक्ष और जमीनी इंस्पेक्शन की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि रेल यात्रियों को वास्तव में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके.



