भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके रेलवे के निर्माण संगठनों पर पहली बार रेलवे बोर्ड की नजर गयी है. बोर्ड ने भाई-भतीजावाद और मलाईदार पोस्टिंग की पहचान बन चुके Construction Organisation में पोस्टिंग के लिए सख्त प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया है.
NEW DELHI. रेलवे बोर्ड ने पहली बार निर्माण संगठनों (Construction Organisation) की कार्यसंस्कृति को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाया है. रेलवे बोर्ड की ओर से जारी आदेश में यह निर्णय लिया गया है कि अब रेलवे निर्माण संगठनों में अधिकारियों की कोई भी सीधी तैनाती (Direct Posting) नहीं हो सकेगी.
इस नई नीति के तहत, अब केंद्रीय चयन बोर्ड (CSB) पारदर्शी साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से ही योग्य अधिकारियों का चयन करेगा. रेलवे बोर्ड के इस बड़े बदलाव का मुख्य उद्देश्य वर्षों से चली आ रही मनमाने ढंग की नियुक्तियों पर रोक लगाना और निर्माण कार्यों में पनप रहे भ्रष्टाचार व भाई-भतीजावाद पर पूरी तरह लगाम कसना है.
हालांकि आकंठ तक भ्रष्टाचार में डूबी व्यवस्था में रेलवे की नयी पहल कितनी कारगर होती यह देखने वाली बात होगी और इसका परिणाम आने वाले समय में दिखायी पड़ेगा. रेलवे बोर्ड की इस नयी व्यवस्था को फिलहाल रेलवे के वरीय अधिकारी संदिग्ध नजरों से ही देख रहे हैं.
मनमानी नियुक्तियों और भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
अब तक रेलवे के निर्माण संगठनों में तैनाती को लेकर प्रक्रियाएं कई बार सवालों के घेरे में रहती थीं और वरिष्ठता या व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर मनचाही पोस्टिंग मिलने की चर्चाएं आम थीं. इस पुरानी परिपाटी को खत्म करने के लिए रेलवे बोर्ड ने अब तय किया है कि केवल वही अफसर निर्माण संगठन में जा सकेंगे, जिन्हें केंद्रीय चयन बोर्ड (CSB) इस योग्य पाएगा.
बोर्ड द्वारा निर्धारित पदों से पांच गुना अधिक अधिकारियों के इंटरव्यू लिए जाएंगे. इस प्रक्रिया में केवल वरिष्ठता को आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि अधिकारी की वास्तविक उपयुक्तता और निष्पक्षता को परखा जाएगा. इससे उन पर भी लगाम लगेगी जो बिना तकनीकी दक्षता या अनुभव के निर्माण परियोजनाओं में पैठ बना लेते थे.
तकनीकी दक्षता, गुणवत्ता और योग्यता बनेगी मुख्य पैमाना
नई रेल लाइनों के निर्माण, बड़े पुलों, सुरंगों, हाई-स्पीड रेल मार्गों, सिग्नलिंग और आधुनिकीकरण के दौर में पारंपरिक रेलवे निर्माण अनुभव अब नाकाफी साबित हो रहा था. इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने नई व्यवस्था में ‘तकनीकी दक्षता’ और ‘गुणवत्ता’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है.
- अनिवार्य प्रशिक्षण (Mandatory Training): नई नीति के तहत चुने गए अधिकारियों के लिए दो से तीन सप्ताह का विशेष और अनिवार्य प्रशिक्षण रखा गया है. इस प्रशिक्षण के दौरान तकनीकी रूप से पूरी तरह दक्ष पाए जाने वाले अफसरों को ही अंतिम रूप से मौका दिया जाएगा.
- दो वरिष्ठ अधिकारियों की पारदर्शी परख: केंद्रीय चयन बोर्ड में अतिरिक्त सदस्य, प्रधान निदेशक या निदेशक स्तर के दो वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. यह बोर्ड कागजी दस्तावेजों या केवल सर्विस रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय सीधे साक्षात्कार के जरिए अधिकारियों की क्षमता, परियोजना प्रबंधन की समझ और ईमानदारी का आकलन करेगा.
कार्यकाल और पारदर्शिता से जुड़े अन्य कड़े नियम
भ्रष्टाचार मुक्त और गतिशील माहौल तैयार करने के लिए रेलवे बोर्ड ने कुछ और बेहद कड़े प्रावधान लागू किए हैं:
- पोर्टल के जरिए आवेदन: निर्माण संगठन में सेवा देने के इच्छुक अधिकारियों को अब एक निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से आवेदन करना होगा.
- दो साल का अनिवार्य अंतराल: किसी भी अधिकारी को निर्माण संगठन में दोबारा तैनाती तभी मिलेगी जब वह पहले कार्यकाल के बाद कम से कम दो साल का अंतराल पूरा करेगा. इससे कुछ चुनिंदा अधिकारियों के पास ही लंबे समय तक मलाईदार पद टिके रहने की संस्कृति समाप्त होगी.
- कार्यकाल की सीमा: निर्माण संगठनों में अधिकारियों का कार्यकाल पांच साल तय किया गया है, जिसे अधिकतम सात साल तक ही बढ़ाया जा सकता है. पांच साल से अधिक समय से जमे विभिन्न स्तर के अधिकारियों के लिए केंद्रीय चयन बोर्ड द्वारा अलग से सख्त रिटेंशन प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
पारदर्शी व्यवस्था से विकास कार्यों को मिलेगी गति
रेलवे बोर्ड के इस क्रांतिकारी फैसले से न केवल निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि बिना किसी बाधा के समय पर परियोजनाएं पूरी हो सकेंगी. अब तक जिन पदों पर जुगाड़ या सिफारिश के बल पर तैनाती होती थी, वहां अब केवल काबिल और ईमानदार अफसरों को काम करने का अवसर मिलेगा. भ्रष्टाचार की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में उठाया गया यह कदम भारतीय रेलवे के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा.
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