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खुशखबरी : रेलवे कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ, अब 2 साल की सेवा शर्त में मिली बड़ी राहत

NEW DELHI. रेलवे में पदोन्नति (Promotion) का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों के लिए रेलवे बोर्ड ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला सुनाया है. निचले ग्रेड से उच्च ग्रेड में प्रमोशन के लिए अनिवार्य 2 वर्ष की न्यूनतम सेवा (Residency Period) की गणना को लेकर रेलवे बोर्ड ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. बोर्ड के नए स्पष्टीकरण के बाद अब उन कर्मचारियों के भी प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है, जो पैनल बनने की तारीख तक अपनी 2 साल की सेवा पूरी करने से चूक जाते थे.

क्या है रेलवे बोर्ड का नया आदेश?

रेलवे बोर्ड के उप निदेशक (E/NG-I) अजय गोयल द्वारा जारी पत्र संख्या No. E(NG)/2026/PM1/24 के अनुसार, भारतीय रेलवे स्थापना नियमावली (IREM Vol-I) के पैरा 214(c)(i) के तहत लागू 2 साल की न्यूनतम सेवा की शर्त को अब रिक्ति आकलन अवधि (Vacancy Assessment Period) के दायरे में शामिल माना जाएगा.

पहले कई मामलों में यह माना जाता था कि जिस दिन पदोन्नति का पैनल जारी होता है, उस दिन तक कर्मचारी की 2 साल की नियमित या एड-हॉक सेवा पूरी होनी चाहिए. लेकिन नए आदेश के तहत:

  • Selection Posts (चयनित पद): इसके लिए रिक्तियों का आकलन 15 महीने की अवधि के लिए किया जाता है. यदि कर्मचारी इस 15 महीने की आकलन अवधि के अंत तक अपनी 2 साल की सेवा पूरी कर लेता है, तो उसे पदोन्नति के लिए पात्र (Eligible) माना जाएगा.
  • Non-Selection Posts (गैर-चयनित पद): इसके लिए आकलन अवधि 12 महीने (1 वर्ष) होती है. यदि कर्मचारी इस 12 महीने की अवधि के समाप्त होने तक 2 साल की सेवा पूरी करता है, तो उसे भी योग्य माना जाएगा.

वरिष्ठ और कनिष्ठ का संतुलन

सर्कुलर में इस बात को भी दोहराया गया है कि यदि किसी प्रक्रिया में कोई जूनियर (कनिष्ठ) कर्मचारी 2 साल की सेवा पूरी करके पदोन्नति के लिए पात्र हो जाता है, तो उससे सीनियर (वरिष्ठ) कर्मचारी को भी पदोन्नति पर विचार के लिए पात्र माना जाएगा, भले ही सीनियर कर्मचारी की 2 साल की कुल सेवा अवधि पूरी न हुई हो.

पुराने मामलों पर नहीं पड़ेगा असर

रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में पहले ही निर्णय लिया जा चुका है या प्रक्रिया पूरी हो चुकी है (Past Cases), उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा. यह नया नियम वर्तमान और आगामी पदोन्नति प्रक्रियाओं पर प्रभावी रूप से लागू होगा.

रेलवे कर्मचारियों और यूनियनों ने बोर्ड के इस कदम का स्वागत किया है. कर्मचारियों का कहना है कि आकलन अवधि के भीतर 2 साल पूरे होने की छूट मिलने से समय पर पदोन्नति मिल सकेगी और अनावश्यक प्रशासनिक देरी का नुकसान कर्मचारियों को नहीं उठाना पड़ेगा.

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