Lucknow. राजधानी लखनऊ के मवैया लोको कॉलोनी में ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर तैनात टेक्नीशियन सूरज पांडेय (45) द्वारा फांसी लगाकर खुदकुशी करने की घटना सामने आई है. मूल रूप से कानपुर के गोविंद नगर निवासी सूरज अपनी पत्नी निधि और बेटी के साथ कॉलोनी में रहते थे.
परिजनों के अनुसार, बुधवार रात घर लौटने के बाद वे अपने कमरे में चले गए थे. बृहस्पतिवार सुबह जब पत्नी बेटी को स्कूल छोड़कर लौटी, तो उन्हें पंखे से दुपट्टे के सहारे लटका पाया. आलमबाग पुलिस के अनुसार, फिलहाल परिजनों की ओर से कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर रेलवे कर्मचारियों में बढ़ रहे मानसिक तनाव और आत्महत्या की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
हाल के वर्षों में भारतीय रेलवे के कर्मचारियों और अधिकारियों में आत्महत्या और मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है. ऐशबाग और मवैया की यह घटना कोई अकेली त्रासदी नहीं है, बल्कि उस गहरे दबाव की ओर इशारा करती है जिससे रेलकर्मी रोज गुजरते हैं.
रेलवे कर्मचारियों में बढ़ते तनाव के मुख्य कारण
अत्यधिक कार्यभार और लंबे कार्य घंटे: रेलवे में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मौजूदा स्टाफ पर 12 से 16 घंटे तक शिफ्ट में काम करने का दबाव रहता है.
- पारिवारिक दूरी और अनियमित दिनचर्या: नाइट ड्यूटी, लगातार ट्रांसफर और छुट्टियों की कमी के कारण कर्मचारी अपने परिवार को उचित समय नहीं दे पाते, जिससे व्यक्तिगत और मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है.
- कार्यस्थल का मानसिक दबाव: सुरक्षा और समयबद्धता (Punctuality) का भारी दबाव, अधिकारियों की सख्ती और दंड का भय कर्मचारियों को डिप्रेशन की ओर धकेलता है.
सुरक्षा बल हो या तकनीकी विभाग, रेलवे के हर मोर्चे पर काम करने वाले कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जतायी गयी है. रेलकर्मियों का मानना है कि रेलप्रशासन नियमित काउंसलिंग सत्र, कार्य के घंटों का उचित सीमांकन और एक संवेदनशील कार्य माहौल तैयार करने की दिशा में ठोस कदम उठाये ताकि सूरज पांडेय जैसे और किसी रेलकर्मी को ऐसा आत्मघाती कदम न उठाना पड़े.



