- सांतरागाछी में 25 सितंबर 2026 को होगी एसपी सिंह की शक्ति परीक्षा, कांग्रेस-यूनियन की जोर-आजमाइस का अखाड़ा बनेगा अर्बन बैंक AGM
CHAKRADHARPUR/KOLKATA.
दक्षिण पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और ईस्ट कोस्ट रेलवे से जुड़ी ऐतिहासिक वित्तीय संस्था रेलवे को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी (अर्बन बैंक) इन दिनों सत्ता और संगठन के भीषण सियासी संग्राम का केंद्र बनी हुई है. करोड़ों रुपये की परिसंपत्तियों और पूंजी वाले इस अर्बन बैंक के प्रबंधन पर वर्चस्व को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है.
सूत्रों व प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजूदा चेयरमैन एसपी सिंह (ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन – AILRSA) को कुर्सी से बेदखल करने के लिए अंदरखाने रेलवे मेंस कांग्रेस और रेलवे मेंस यूनियन के बीच एक अभूतपूर्व रणनीतिक गठजोड़ का ताना-बाना बुना जा रहा है.
‘परिवर्तन पैनल’ का वादा और मेंस कांग्रेस का असंतोष
अर्बन बैंक के पिछले चुनावों में वर्षों से चले आ रहे एकतरफा वर्चस्व को समाप्त करने के लिए ‘परिवर्तन पैनल’ का गठन किया गया था. इस गठबंधन में साउथ ईस्टर्न रेलवे मेंस कांग्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. चुनाव परिणामों में मेंस कांग्रेस के लगभग 200 डेलीगेट तीनों रेल जोन से जीतकर आए, जबकि ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के करीब 60 डेलीगेट विजयी रहे.
हालांकि, सत्ता और पदों के बंटवारे में मेंस कांग्रेस को केवल 9 डायरेक्टर पद मिले, जबकि कम डेलीगेट होने के बावजूद AILRSA को 10 डायरेक्टर पदों के साथ-साथ चेयरमैन की प्रतिष्ठित कुर्सी भी हासिल हुई. मेंस कांग्रेस के स्थानीय व केंद्रीय नेताओं का आरोप है कि चुनाव पूर्व जो वादे और सहमति AILRSA नेतृत्व द्वारा मेंस कांग्रेस के साथ बनाए गए थे, उन्हें बाद में दरकिनार कर दिया गया.
मेंस कांग्रेस चक्रधरपुर मंडल के संयोजक शशि मिश्रा और अन्य पदाधिकारियों के बयानों से स्पष्ट है कि संगठन अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है. मेंस कांग्रेस का कहना है कि 200 डेलीगेट जिताने के बावजूद उन्हें न तो महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रिया में अपेक्षित प्रतिनिधित्व दिया गया और न ही प्रबंधन में उचित भागीदारी मिली. निर्णयों के केंद्रीकरण और कथित वादाखिलाफी से मेंस कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है.
अर्बन बैंक पर वर्चस्व की होड़ और मेंस यूनियन की सेंधमारी
दूसरी ओर, रेलवे मेंस यूनियन के वरिष्ठ नेता गौतम मुखर्जी, जो कई वर्षों तक अर्बन बैंक के चेयरमैन पद पर आसीन रहे, बीते चुनाव के बाद से अर्बन बैंक की सत्ता और व्यवस्था से पूरी तरह बाहर चल रहे थे. अर्बन बैंक के विशाल वित्तीय आधार और संसाधनों को देखते हुए मेंस यूनियन लगातार पुनः वापसी के रास्ते तलाश रही है.
हाल ही में चक्रधरपुर में आयोजित बीजीएम (साधारण सभा) के दौरान एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला. सूत्रों के अनुसार, मेंस यूनियन के रणनीतिकारों ने अर्बन बैंक के निर्दलीय चुनाव जीते डायरेक्टर और डेलीगेट निर्मल जेना को अपने पाले में मिला लिया. निर्मल जेना को न केवल मेंस यूनियन में शामिल कराया गया, बल्कि आनन-फानन में उन्हें यूनियन का केंद्रीय पदाधिकारी भी घोषित कर दिया गया.
वहीं रेलवे मेंस कांग्रेस का आरोप है कि जिस मेंस यूनियन के कथित एकाधिकार को खत्म करने के लिए परिवर्तन पैनल बना था, आज उसी मेंस यूनियन की अर्बन बैंक में बैकडोर से सेंधमारी शुरू हो चुकी है और मौजूदा चेयरमैन इस पूरी प्रक्रिया में मूकदर्शक बने हुए हैं.
डायरेक्टरों का गणित और अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी
अर्बन बैंक बोर्ड में डायरेक्टरों का समीकरण बेहद नाजुक दौर में पहुंच गया है. मेंस कांग्रेस का असंतोष और मेंस यूनियन द्वारा डायरेक्टरों में लगाई जा रही सेंधमारी के कारण अब AILRSA के चेयरमैन एसपी सिंह के पास बहुमत का आंकड़ा संकट में पड़ता दिख रहा है.
मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे मेंस कांग्रेस और रेलवे मेंस यूनियन के महासचिव स्तर के नेताओं के बीच शीर्ष स्तर पर एक भीतरी रणनीति तैयार की गई है. बताया जाता है कि कांग्रेस के एसआर मिश्रा और यूनियन के गौतम मुखर्जी के बीच एक खास मुलाकात ने इस रणनीति को अर्बन बैंक का केंद्र बिंदू बना दिया है.
इसमें 25 सितंबर 2026 के वार्षिक महाधिवेशन (AGM) में चेयरमैन एसपी सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी हैं. यदि दोनों प्रमुख संगठन बोर्ड और डेलीगेट स्तर पर एकजुट होते हैं, तो अविश्वास प्रस्ताव के जरिए चेयरमैन की कुर्सी का गिरना लगभग तय माना जा रहा है. यह देखने वाली बात होगी कि अगले 24 से 30 घंटे में अर्बन बैंक चेयरमैन की कुर्सी पर किसका कब्जा रहेगा.
हॉलिडे होम, लोन और पारदर्शिता के कानूनी मुद्दे
अविश्वास प्रस्ताव को आधार देने के लिए विपक्षी गुटों ने प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है:
- पारदर्शिता की कमी: बैंक के महत्वपूर्ण निर्णयों और वित्तीय नीतियों में सदस्यों को अंधेरे में रखने का आरोप है.
- लोन और सुविधाएं: लोन स्वीकृति की प्रक्रियाओं में देरी और सदस्यों के लाभ से जुड़े मामलों पर सवाल खड़े किए गए हैं.
- हॉलिडे होम मुद्दा: दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय (गार्डन रीच, कोलकाता) में इलाज व दफ्तरी काम से आने वाले रेल कर्मचारियों के लिए हॉलिडे होम की मौजूदा व्यवस्था को असुविधाजनक और अपर्याप्त बताया गया है.
चेयरमैन एसपी सिंह ने आरोपों को नकारा, कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी
इन तमाम गंभीर आरोपों और अविश्वास प्रस्ताव की सुगबुगाहट पर अर्बन बैंक के चेयरमैन एसपी सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है. सोशल मीडिया और वक्तव्यों के जरिए उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन करार दिया है.
एसपी सिंह का तर्क है कि
- बैंक के कार्यों में डिजिटलाइजेशन और कंप्यूटरीकृत पारदर्शिता लागू की गई है, जिससे पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हुई है.
- इस पारदर्शी प्रणाली के कारण कुछ पुराने नेताओं और संगठनों के व्यक्तिगत हित प्रभावित हुए हैं, जिससे वे बौखलाहट में भ्रम फैला रहे हैं.
- चेतावनी दी कि यदि उनके और बैंक प्रबंधन के खिलाफ गलत तथ्य पेश कर छवि धूमिल करने की कोशिश की गई, तो वह संबंधित पक्षों के खिलाफ मानहानि (Defamation) का कानूनी मुकदमा दर्ज कराएंगे.
कल के महाधिवेशन पर टिकीं नजरें
करोड़ों की परिसंपत्ति वाले इस रेलवे को-ऑपरेटिव सोसाइटी पर नियंत्रण की यह लड़ाई अब सिर्फ दो यूनियनों की आपसी खींचतान न रहकर अर्बन बैंक के अस्तित्व और भविष्य की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन चुकी है.
एक तरफ जहां मेंस कांग्रेस और मेंस यूनियन का ‘गुप्त गठजोड़’ अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता तख्तापलट की बिसात बिछा चुका है, वहीं दूसरी तरफ चेयरमैन एसपी सिंह अपनी प्रशासनिक उपलब्धियों और कानूनी ढाल के सहारे किलेबंदी में जुटे हैं.
तीनों रेल जोनों के हजारों रेल कर्मचारियों और डेलीगेटों की निगाहें अब आगामी वार्षिक महाधिवेशन पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि अर्बन बैंक की यह जंग किस करवट बैठती है.
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उस पर तत्परता से संज्ञान लिया जायेगा.





