DDU DIVISION. भारतीय रेलवे में जब कोई लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) भर्ती होता है, तो उसकी ज़िंदगी धूप-धूल, लाल-हरी बत्तियों के तनाव और पटरियों के बीच ही बीतती है. लेकिन पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) मंडल में एक ऐसा अजूबा देखने को मिला है, जिसकी दास्तान सुनकर खुद रेलवे बोर्ड भी माथा पकड़ ले!
यहां बात हो रही है वर्ष 1997 में भर्ती हुए लोको पायलट एस. डी. शर्मा की. इन्होंने अपनी 29 साल की लंबी सरकारी नौकरी में कुल जमा 17 किलोमीटर ही ट्रेन चलाई है! यानी बिना पटरी पर पसीना बहाए पूरी सल्तनत खड़ी कर ली. यह तो एक बानगी है जो डीडीयू में रेलवे के सिस्टम की जमीनी हकीकत को बयां करती है, अब अगर जांच हो तो ऐसे कितने गुरु जी सामने आयेंगे यह तो देखने वाली बात होगी.
बिना अनुभव कैसे बने ‘मुख्य अनुदेशक’?
68,000 रुपये से अधिक की बेसिक सैलरी पाने वाले शर्मा जी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी ठोस वास्तविक परिचालन अनुभव के वे आखिर नए लोको पायलटों के “गुरुजी” कैसे बन गए?
बताया जा रहा है कि उच्च अधिकारियों की असीम और अंधभक्त कृपा के चलते क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी गई. नतीजतन, शर्मा जी को ETTC/DDU (इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन ट्रेनिंग सेंटर) का मुख्य अनुदेशक (Chief Instructor) बना दिया गया. यानी जिसने खुद कभी ठीक से इंजन नहीं संभाला, वह अब नए नवेले ड्राइवरों को ट्रेन चलाने की बारीकियां सिखा रहा है.
असली ड्यूटी: साहिबों की खातिरदारी और बनारस की सैर!
आरोप है कि ट्रैक से दूर रहने वाले शर्मा जी का असली हुनर पटरियों के बाहर काम आता है. मंडल में आने वाले बड़े अफसरों की आवभगत करना, बनारस के घाटों और आसपास के पर्यटन स्थलों का वीआईपी भ्रमण करवाना और साहबों को ‘गिफ्ट्स’ से खुश रखना ही इनकी 24 घंटे की मुख्य ड्यूटी रही है. इसी जी-हुज़ूरी का इनाम इन्हें घर बैठे रनिंग अलाउंस (Running Allowance) और तमाम सरकारी सुविधाओं के रूप में मिल रहा है.
कागज़ों पर ‘मिस्टर इंडिया’ और गर्ल्स हॉस्टल में अवैध डेरा!
नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए CMS में आज तक इनका फोटो और सही पता अपडेट नहीं है. इनका ‘कॉल सर्व एड्रेस’ छत्तीसगढ़ का दर्ज है. हद तो तब हो जाती है जब शर्मा जी हर महीने सरकारी खजाने से आवास भत्ता (HRA) भी ले रहे हैं और दूसरी तरफ ETTC/DDU के गर्ल्स हॉस्टल के एक रेक रूम पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठे हैं, जहाँ हॉस्टल की मेस से तीनों टाइम का शाही खाना उड़ रहा है.
लड़कियों के हॉस्टल में सालों से एक पुरुष कर्मचारी का इस तरह डटे रहना और हाजीपुर (HJP) मुख्यालय से लेकर DRM तक की चुप्पी, पूरे रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है. देखना होगा कि इस खुलासे के बाद रेलवे विजिलेंस नींद से जागती है या यह ‘सुल्तान’ यूँ ही अपनी तानाशाही चलाता रहेगा!
रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उस पर तत्परता से संज्ञान लिया जायेगा.




