JAIPUR. भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने बांदीकुई में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. बांदीकुई रेलवे स्टेशन पर सोलर प्लांट स्थापित कर रही एक फर्म से नेट मीटरिंग की फाइल आगे बढ़ाने और ऑर्डर जारी करने के बदले ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रेलवे के एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर, डिस्कॉम के सहायक अभियंता (AEN) और एक लाइनमैन को रंगे हाथों धर दबोचा गया. इस कार्रवाई से रेलवे महकमे के अलावा जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डिस्कॉम) में भी जबरदस्त हड़कंप मच गया है.
सोलर प्लांट फाइल की आड़ में वसूली की साजिश
मामले का मुख्य विवरण बांदीकुई रेलवे जंक्शन से जुड़ा है, जहाँ एक निजी फर्म द्वारा सोलर ऊर्जा संयंत्र (Solar Plant) की स्थापना का कार्य किया जा रहा था. नियमानुसार, प्लांट को चालू करने के लिए बिजली विभाग (डिस्कॉम) से नेट मीटरिंग और मीटर चेंजिंग का ऑर्डर जारी कराना अनिवार्य था.
जब फर्म प्रतिनिधि ने संबंधित पत्रावली विभाग में प्रस्तुत की, तो इसे आगे बढ़ाने और आवश्यक स्वीकृति जारी करने के बदले जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ₹10,000 की रिश्वत राशि मांगी जाने लगी. बार-बार चक्कर कटवाने और अधिकारियों की टालमटोल नीति से तंग आकर परिवादी ने सीधा एसीबी (ACB) का रुख किया और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई.
योजनाबद्ध सत्यापन और ट्रेप का जाल
शिकायत मिलते ही एसीबी चौकी दौसा की विशेष टीम ने एसीबी मुख्यालय (जयपुर) के निर्देशों पर गोपनीय और तकनीकी साधनों की मदद से मामले का सत्यापन कराया. सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि पूरी तरह सही पाई गई.
इसके बाद एसीबी अधिकारियों ने आरोपियों को बेनकाब करने के लिए एक सटीक व्यूह रचना रची:
- मुलाकात की जगह: डिस्कॉम कर्मचारियों ने परिवादी को रिश्वत की रकम के साथ बांदीकुई रेलवे स्टेशन स्थित सीनियर सेक्शन इंजीनियर (विद्युत) धर्मराज गुर्जर के कार्यालय में बुलाया.
- रिश्वत का आदान-प्रदान: तय योजना के अनुसार, परिवादी कार्यालय पहुंचा जहां सीनियर सेक्शन इंजीनियर धर्मराज गुर्जर ने रिश्वत की राशि लेकर खुद अपने हाथों से नोटों की गिनती की.
- बंटवारे का तरीका: रिश्वत की कुल रकम में से ₹5,000 का हिस्सा एक खाकी लिफाफे में रखकर डिस्कॉम के सहायक अभियंता (AEN) छोटेलाल सैनी और प्रथम श्रेणी लाइनमैन धर्मेंद्र सैनी को दे दिया गया. दोनों ने इस लिफाफे को तुरंत परिवादी की मूल फाइल (पत्रावली) के अंदर छिपा दिया.
एसीबी की त्वरित रेड और बरामदगी
कार्यालय के आसपास पहले से मुस्तैद एसीबी की टीम ने इशारा मिलते ही अचानक दबिश दी. टीम ने मौके से मूल पत्रावली को जब्त कर उसमें रखी ₹5,000 की रिश्वत राशि बरामद कर ली.
कार्रवाई के दौरान यह भी सामने आया कि रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर धर्मराज गुर्जर ने बाकी के ₹5,000 परिवादी को वापस लौटाने का प्रयास किया था, जिसे एसीबी ने एक अहम सबूत के तौर पर सीज कर लिया.
गिरफ्तार आरोपी
- धर्मराज गुर्जर – सीनियर सेक्शन इंजीनियर (विद्युत), रेलवे जंक्शन बांदीकुई
- छोटेलाल सैनी – सहायक अभियंता (AEN), जयपुर डिस्कॉम, बांदीकुई
- धर्मेंद्र सैनी – लाइनमैन (प्रथम), जयपुर डिस्कॉम, बांदीकुई
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
कार्रवाई पूरी होने के बाद एसीबी टीम तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस रिश्वतखोरी के खेल में और कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी या दलाल शामिल थे. तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी गई है.




