SIWAN. भारतीय रेलवे में सुरक्षा और कर्मचारियों के काम के घंटों को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है. लगातार 12 घंटे की कठिन ड्यूटी से परेशान रेलवे कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. ऑल इंडिया पॉइंट्समैन एसोसिएशन और ऑल इंडिया रेलवे ट्रैकमैन यूनियन के संयुक्त बैनर तले सीवान रेलवे कॉलोनी में एक दिवसीय ‘सेफ्टी सेमिनार सह कर्मचारी जागरूकता अभियान’ का आयोजन किया गया, जिसमें कर्मचारियों के मानसिक तनाव, सुरक्षा और लंबित मांगों पर गंभीर चर्चा हुई.
12 घंटे की ड्यूटी से मानसिक-शारीरिक तनाव
सेमिनार को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया पॉइंट्समैन एसोसिएशन के महामंत्री मनोज गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान में पॉइंट्समैन और गेटमैन (चाहे वे परिचालन विभाग के हों या इंजीनियरिंग के) से 12-12 घंटे तक लगातार ड्यूटी ली जा रही है. संरक्षा से जुड़े इन पदों पर तैनात कर्मचारियों को हर पल गुजरती ट्रेनों पर नजर रखनी होती है.
बिना पर्याप्त विश्राम के इतने लंबे समय तक काम करने से कर्मचारियों पर भारी मानसिक और शारीरिक दबाव बन रहा है, जिससे हादसों की आशंका भी बनी रहती है. उन्होंने रेलवे प्रशासन से सभी कर्मचारियों के लिए तुरंत 8 घंटे का ड्यूटी रोस्टर लागू करने की मांग की.
महिला रेलकर्मियों की सुरक्षा और कैडर री-स्ट्रक्चरिंग
महामंत्री ने महिला पॉइंट्समैन और ट्रैकमैन की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्हें केवल दिन की ड्यूटी में तैनात करने तथा आवश्यकतानुसार विभाग परिवर्तन (Track Maintainer to other departments) का अवसर देने की बात कही. इसके साथ ही, उन्होंने रेलवे बोर्ड से पॉइंट्समैन श्रेणी के लिए स्वीकृत 1800, 1900, 2400 और 2800 ग्रेड पे के कैडर री-स्ट्रक्चरिंग को अविलंब धरातल पर उतारने की मांग रखी.
लंच ब्रेक के नाम पर भी ट्रैक पर तैनाती
ऑल इंडिया ट्रैकमैन यूनियन के जोनल कोषाध्यक्ष जबीउल्लाह अंसारी ने ट्रैकमैन को रेलवे की रीढ़ बताते हुए कहा कि विषम परिस्थितियों में काम करने वाले ट्रैकमैन से 11 घंटे तक काम लिया जाता है. विडंबना यह है कि लंच के समय भी उन्हें ट्रैकों पर ही रुकना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अपने परिवार और स्वास्थ्य के लिए समय मिलना बेहद जरूरी है, इसलिए 8 घंटे की ड्यूटी लागू होना अनिवार्य है.
18 हजार बेसिक पर मिले दशहरा बोनस
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए वक्ताओं ने रेलवे बोर्ड से इस बार कर्मचारियों को 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी के आधार पर ‘उत्पादकता आधारित बोनस’ (PLB) देने की पुरजोर मांग की. कर्मचारियों ने एकजुट होकर चेतावनी दी कि यदि कार्यस्थल पर ग्रुप-डी कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया और उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन तेज करने को मजबूर होंगे.



