NEW DELHI. भारतीय रेलवे की रीढ़ माने जाने वाले सिग्नल और टेलीकॉम (S&T) विभाग के कर्मचारियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलीकॉम मेंटेनर्स यूनियन (IRS&TMU) ने 5 नवंबर 2026 को देशभर में ‘टूल डाउन’ (काम बंद) आंदोलन करने का ऐलान किया है. यदि रेलवे बोर्ड ने समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर फैसला नहीं लिया, तो देशभर में ट्रेनों के पहिए थम सकते हैं या उनका परिचालन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
क्यों भड़का कर्मचारियों का आक्रोश?
यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कुमार और महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश के अनुसार, रेल प्रशासन को लगातार पत्र भेजने के बावजूद उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला गया है. कर्मचारियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- रिस्क एंड हार्डशिप अलाउंस: 11 फरवरी 2019 को कमेटी का गठन होने के 7 साल बाद भी जोखिम और कठिनाई भत्ता लागू नहीं किया गया.
- HOER नियमों का उल्लंघन: ‘आवर्स ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड पीरियड ऑफ रेस्ट रूल्स (HOER) 2005’ का पालन नहीं हो रहा है. सिग्नल खराब होते ही कर्मचारियों को लगातार फोन कर परेशान किया जाता है. जरा सी देरी होने पर कर्मचारियों को चार्जशीट या चेतावनी पत्र थमा दिया जाता है.
- स्प्लिट ड्यूटी रोस्टर पर रोक: कर्मचारियों से 24 घंटे की शिफ्ट में नियमित 8-घंटे की ड्यूटी ली जाए और स्प्लिट ड्यूटी रोस्टर को तुरंत बंद किया जाए.
- नाइट ड्यूटी फेलियर गैंग का गठन: रात्रि कालीन सिग्नल खराबी से निपटने के लिए अलग से गैंग का गठन किया जाए.
- पदनाम में बदलाव: ‘टेक्निशियन सिग्नल’ को ‘सिग्नल इंटरलोकिंग मैनेजर’ और ‘टेक्निशियन टेलीकॉम’ को ‘टेलीकम्युनिकेशन मैनेजर’ का नया पदनाम दिया जाए.
- हाई-स्पीड अलाउंस: लोको पायलटों की तर्ज पर S&T स्टाफ को भी हाई-स्पीड स्टैंडर्ड IV इंटरलोकिंग अलाउंस दिया जाए.
रेल सेवाओं पर क्या पड़ेगा असर?
S&T विभाग रेलवे के सुरक्षित और निर्बाध संचालन के लिए जिम्मेदार होता है. ‘टूल डाउन’ आंदोलन के दौरान कर्मचारी अपने तय ब्रेक (लगभग 2 से 3 घंटे) के दौरान काम पूरी तरह ठप रखेंगे.
यदि इस अवधि में सिग्नलिंग सिस्टम में कोई खराबी आती है, तो उसे ठीक करने वाला कोई नहीं होगा. ऐसी स्थिति में रेलवे को ट्रेनों का संचालन मैनुअल प्रक्रियाओं (मैनुअल सिग्नलिंग) के जरिए करना पड़ेगा. इससे ट्रेनों की रफ्तार धीमी हो जाएगी, रूट प्रभावित होंगे और यात्रियों को भारी देरी व असुविधा का सामना करना पड़ सकता है.



