- 2013 बैच के लोको पायलट थे दिलीप कुमार यादव, खरसिया में थी पोस्टिंग, सुबह 6 बजे की घटना
- हादसे में दोनों पैर कटे, जिंदल फोर्टिस अस्पताल में डॉक्टरों की जान बचाने की कोशिश नाकाम
BILASPUR. रेल की पटरियों को सुरक्षित रफ्तार देने वाले वे खुद ज़िंदगी की दौड़ में पीछे छूट गए. 15 घंटे की भीषण और थका देने वाली लंबी ड्यूटी के बाद घर लौट रहे 40 वर्षीय लोको पायलट दिलीप कुमार यादव की दर्दनाक मौत ने रेलवे व्यवस्था की उन सुस्त और कठोर परतों को उजागर कर दिया है, जो इंसानी जान से ज्यादा नियमों की फाइलों को अहमियत देती हैं. यह महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की नाकामी है जो अपनों के बीच लौटने का सपना देख रहे एक मेहनतकश कर्मचारी को बक्से में लौटने पर मजबूर कर कर गई.
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल के खरसिया रेलवे स्टेशन पर शनिवार सुबह जो हुआ, उसने हर संवेदनशील दिल को झकझोर कर रख दिया. वर्ष 2013 बैच के लोको पायलट दिलीप कुमार यादव की पोस्टिंग बिलासपुर डिवीजन के खरसिया लॉबी में थी, जबकि उनका परिवार बिलासपुर में रहता था.
13 अप्रैल को जारी हुआ था तबादला आदेश, छह माह बाद भी रिलीव नहीं
हैरानी की बात यह है कि उनका ट्रांसफर आदेश बीते 13 अप्रैल को ही सीनियर डीओपी द्वारा जारी कर दिया गया था, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर उन्हें रिलीव नहीं किया गया. अब इस बात की चर्चा होने लगी है कि यदि समय पर उनका तबादला हो जाता, तो शायद वे अपने परिवार के करीब होते और यह हौलनाक मंजर टल सकता था.
15 घंटे की मैराथन ड्यूटी खत्म कर दिलीप अपने घर बिलासपुर जाने के लिए हावड़ा-पोरबंदर एक्सप्रेस पकड़ने खरसिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचे थे. शनिवार की सुबह करीब 6 बजे ट्रेन से गिरकर उनके दोनों पैर कट गये, उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बचायी जा सकी.
शनिवार की सुबह करीब 6 बजे, लगातार 15 घंटे की मैराथन ड्यूटी समाप्त करने के बाद दिलीप बिलासपुर जाने के लिए हावड़ा-पोरबंदर एक्सप्रेस पकड़ने खरसिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचे थे. अत्यधिक थकान, लगातार काम का बोझ और शरीर की जवाब देती ऊर्जा के बीच संतुलन बिगड़ा और वे ट्रेन से नीचे गिर पड़े. इस भयावह हादसे में उनके दोनों पैर कट गए. रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल तक ले जाए जाने के बावजूद डॉक्टरों की तमाम कोशिशें उनकी सांसों को थाम न सकीं.
कर्मचारी किल्लत का खामियाजा जमीनी स्तर पर काम करने वाले जान देकर चुका रहे
यह दुर्घटना भारतीय रेलवे में कर्मचारियों की भारी कमी के कड़वे सच को भी सामने लाती है. रेलवे बिलासपुर डिवीजन में 3262 लोको पायलटों की जरूरत है, वहीं केवल 2211 कर्मचारी ही कार्यरत हैं और 1051 पद खाली पड़े हैं. स्टाफ की इस भारी किल्लत का खामियाजा अंततः जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है.
रेलवे के नियमों के मुताबिक दिन में औसतन 9 घंटे ड्यूटी का प्रावधान है, लेकिन कागजी दावों और हकीकत के बीच का यह फासला अब कर्मचारियों की जान लील रहा है. फिलहाल, प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन एक हंसता-खेलता एक परिवार हमेशा के लिए बिखर चुका है. दिलीप कुमार यादव अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं.



