रेलवे सुरक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि सुरक्षित रेल परिचालन केवल कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ाकर हासिल नहीं किया जा सकता. लोको पायलटों का पूरा ध्यान “Safe Train Operation” पर केंद्रित रहने देना ही भारतीय रेल और यात्रियों के सर्वोत्तम हित में है!
NEW DELHI. भारतीय रेल में ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट इन दिनों एक नए आदेश को लेकर भारी दबाव और आक्रोश में हैं. ट्रेनों के सुचारू संचालन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाए, अब रनिंग स्टाफ पर गैर-परिचालन कार्य थोपे जाने का आरोप लग रहा है.
हाल ही में रेलवे बोर्ड द्वारा जारी निर्देश के तहत बिना ट्रेन मैनेजर (गार्ड) या ब्रेक वैन वाली मालगाड़ियों में ‘टेल लैंप’ लगाने और जमा करने की जिम्मेदारी भी लोको पायलटों को सौंपने की बात कही गयी है. इसे लेकर आक्रोश उबाल रहा है.
रेलवे कर्मचारियों और रनिंग स्टाफ यूनियनों का मानना है कि ड्राइविंग जैसे अति-संवेदनशील कार्य के दौरान ऐसा करना सुरक्षा मानकों और कार्य-कुशलता दोनों के लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है. अब तक इस मामले में AILRSA ने विरोध शुरू कर दिया जबकि मान्यता प्राप्त यूनियनों की ओर से भी इस आदेश पर विरोध दर्ज कराया गया है.
क्या है नया आदेश और क्यों जटिल है प्रक्रिया
रेलवे बोर्ड की उपनिदेशक (यातायात रेल) श्वेता शर्मा द्वारा जोनल मुख्यालयों को जारी आदेश के अनुसार, बिना ट्रेन मैनेजर चलने वाली मालगाड़ियों के संचालन से पहले:
- लॉबी से रसीद और कस्टडी: लोको पायलटों को ट्रेन चालू करने से पहले रनिंग लॉबी से ‘टेल लैंप’ प्राप्त करना होगा, उसकी रसीद देनी होगी और उसकी सुरक्षा की कस्टडी लेनी होगी.
- टेल लैंप की जांच और मेंटेनेंस: प्रस्थान से पहले यह जांचना होगा कि टेल लैंप पूरी तरह चार्ज और चालू स्थिति में है या नहीं.
- ट्रेन के अंतिम डिब्बे तक ले जाना: लोकोमोटिव से लेकर पूरी लंबी मालगाड़ी (जो कई सौ मीटर लंबी होती है) के आखिरी डिब्बे/वैगन तक टेल लैंप को खुद ले जाकर लगाना होगा.
- यात्रा समाप्ति पर हैंडओवर: यात्रा खत्म होने पर फिर से उस भारी-भरकम उपकरण को उतारकर सुरक्षित रूप से लॉबी या स्टेशन स्टाफ को वापस सौंपना होगा.
रात के समय या आपातकालीन परिस्थितियों में मालगाड़ी के सबसे पिछले वैगन तक जाकर इस भारी उपकरण को लगाना अत्यंत दुष्कर, थकाऊ और जोखिम भरा कार्य है.
प्राथमिक जिम्मेदारी से भटकने का खतरा, सुरक्षा पर सवाल
लोको पायलटों की प्राथमिक और सबसे अहम जिम्मेदारी हाई-स्पीड ट्रेन या भारी-भरकम मालगाड़ियों का सुरक्षित परिचालन (Safe & Smooth Operation) है. पूरी यात्रा के दौरान उनका ध्यान इन प्रमुख बिंदुओं पर रहता है.
- सिग्नल मॉनिटरिंग एवं स्पीड कंट्रोल: ट्रैक पर लगे सिग्नलों पर निरंतर नजर रखना और स्पीड लिमिट का पालन करना.
- SPAD की रोकथाम: सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) जैसी गंभीर रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मानसिक रूप से 100% सतर्क रहना.
- आपातकालीन स्थितियां: अचानक ब्रेक एप्लीकेशन या ट्रैक की गड़बड़ियों से तुरंत निपटना.
रेलवे यूनियनों का तर्क है कि ड्राइविंग से पहले या बाद में क्लर्क, स्टेशन मास्टर या ऑपरेटिंग स्टाफ जैसे प्रशासनिक व दूसरे कार्यों में उलझने से पायलटों पर अत्यधिक मानसिक तनाव और शारीरिक थकान बढ़ेगी, जिसका सीधा असर ट्रेन सुरक्षा पर पड़ सकता है.
पहले हैंड ब्रेक, अब टेल लैंप, बढ़ रहा है असंतोष
कर्मचारी एसोसिएशन का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब लोको पायलटों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई है. इससे पहले भी ऑपरेटिंग विभाग का काम (जैसे हैंड ब्रेक लगाना) लोको पायलटों को सौंपा जा चुका है. अब टेल लैंप का अतिरिक्त काम थोपे जाने से रनिंग स्टाफ में आक्रोश बढ़ रहा है.
गौरतलब है कि मालगाड़ियों के आखिरी डिब्बे पर जलती हुई लाल ‘टेल लैंप’ स्टेशन मास्टरों को यह आश्वस्त कराती है कि पूरी ट्रेन बिना किसी वैगन के छूटे सुरक्षित रूप से गुजर चुकी है. यदि टेल लैंप न दिखे तो कंट्रोल रूम तुरंत सतर्क होता है. ऐसे महत्वपूर्ण उपकरण की कस्टडी और टेस्टिंग का काम स्टेशन या यार्ड स्टाफ के पास होना चाहिए, न कि लोको पायलटों के पास.
रनिंग स्टाफ की प्रमुख मांगें
रेलवे प्रशासन के समक्ष कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट मांगें रखी हैं:
- निर्देश की तत्काल वापसी: LP/ALP को लॉबी से टेल लैंप इश्यू कराने और जमा करने के आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए.
- ऑपरेटिंग व स्टेशन स्टाफ को जिम्मेदारी: टेल लैंप का रखरखाव, चार्जिंग, अकाउंटिंग और टेस्टिंग स्टेशन, यार्ड या ऑपरेटिंग स्टाफ का ही काम रहना चाहिए.
- रिक्त पदों को भरना: ट्रेन मैनेजर (गार्ड) की कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियां की जाएं, न कि लोको पायलटों को ‘डिफ़ॉल्ट मैनपावर’ बनाकर काम चलाया जाए.
- वर्कलोड एवं थकान मूल्यांकन: किसी भी नई व्यवस्था से पहले लोको पायलटों की मानसिक और शारीरिक थकावट (Fatigue Assessment) का निष्पक्ष आंकलन किया जाए.




