NEW DELHI. रेलवे बोर्ड ने ट्रैक मेंटेनरों (Track Maintainers) की लंबे समय से चली आ रही मांगों और कैडर ढांचे को लेकर एक नया आदेश जारी किया है. आदेश में ट्रैक मेंटेनरों के कैडर मर्जर (Cadre Merger) और उन्हें टैक्निशियन (ट्रैक) MSTT (Multi-Skilled Track Technician) के रूप में पुनर्गठित करने के संबंध में दिशानिर्देश दिए गए हैं.
यह आदेश ट्रैक मेंटेनरों के भविष्य, उनके प्रमोशन के रास्तों तथा अन्य विभागों में स्थानांतरण की संभावनाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है. इस आदेश के कई बिंदूओं को लेकर विश्लेषण भी शुरू हो चुका है.
कैडर पुनर्गठन और नई व्यवस्था (MSTT)
रेलवे बोर्ड के इस नए पत्र के अनुसार, इंजीनियरिंग (ट्रैक) विभाग के कर्मचारियों के लिए मल्टी-स्किलिंग व्यवस्था लागू की जा रही है. इसके तहत विभिन्न पे-लेवल के आधार पर ट्रैक मेंटेनरों को Technician (Track) Grade-I, Grade-II, और Grade-III के पदनाम से पुनर्गठित करने का प्रावधान किया गया है.
- पे-लेवल 2 (Grade-III): इसमें 25% पद सीधी भर्ती (Direct Recruitment) से भरे जाएंगे, 50% पद सीनियरिटी-सह-सुटेबिलिटी (Seniority-cum-Suitability) के आधार पर ट्रैक मेंटेनरों से भरे जाएंगे तथा 25% पद LDCE (विभागीय परीक्षा) कोटा के तहत भरे जाएंगे.
- पात्रता की शर्तें: LDCE कोटा या प्रमोशन के लिए कम से कम 2 साल की नियमित सेवा होना अनिवार्य है.
किस कर्मचारी वर्ग को होगा फायदा और किसे नुकसान?
इस आदेश का सबसे अहम पहलू यह है कि प्रमोशन और कैडर मर्जर का लाभ पात्रता (Qualification) के आधार पर तय होगा:
- आईटीआई (ITI) और टेक्निकल डिग्री धारक: जिन ट्रैक मेंटेनरों के पास ITI, डिप्लोमा या 10वीं में मैथ्स और साइंस जैसे टेक्निकल विषय हैं, उन्हें इस कैडर मर्जर और MSTT पद पर आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे.
- गैर-तकनीकी (Non-Technical / Non-ITI) कर्मचारी: आर्ट्स (Arts) या साधारण 10वीं/12वीं पास ट्रैक मेंटेनरों के लिए इस नए नियम के तहत सीमित अवसर बचते दिख रहे हैं, जिसे लेकर कर्मचारियों में असंतोष भी देखा जा रहा है.
कैडर मर्जर के बाद अन्य विभागों में जाने पर रोक!
इस आदेश के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि रेलवे प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ट्रैक मेंटेनरों को ट्रैक मेंटेनेंस के कार्यों तक ही सीमित रखना और उसी विभाग में मल्टी-स्किलिंग के जरिए पदोन्नति देना है. इससे कर्मचारियों के अन्य विभागों (जैसे C&W, लोको, या सिग्नलिंग) में जाने के विकल्प बेहद सीमित हो जाएंगे.
कुल मिलाकर, रेलवे बोर्ड का यह लेटर एक तरफ जहां तकनीकी योग्यता रखने वाले ट्रैक मेंटेनरों के लिए प्रमोशन के नए रास्ते खोलता है, वहीं दूसरी तरफ गैर-तकनीकी कर्मचारियों और सालों से एक ही पद पर काम कर रहे वरिष्ठ मेंटेनरों के सामने योग्यता की नई चुनौती खड़ी करता है.



