PATNA/DDU. पूर्व मध्य रेल (ECR) के प्लांट डिपो डीडीयू (DDU) में कार्मिक विभाग की हठधर्मिता और बेलगाम रवैये ने रेलवे बोर्ड के नियमों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं. कर्मचारियों के कल्याण और अधिकारों की रक्षा के लिए बने IRPS कैडर की नाक के नीचे डीडीयू प्लांट डिपो में मनमानी का खेल जारी है.
नियुक्ति पत्र में बाकायदा लिखकर दिए गए अधिकारों पर डाका डालते हुए स्थापना शाखा ने नौ (09) नव नियुक्त प्रशिक्षु जूनियर इंजीनियरों (JE/TMC) के जायज HRA और TA के दावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.
परीक्षा पास कर अपनी मेहनत के दम पर हक पाने वाले ये युवा इंजीनियर आज कार्मिक विभाग की प्रशासनिक सुस्ती और तानाशाही के कारण आर्थिक और मानसिक शोषण झेलने को मजबूर हैं.
दिलचस्प बात यह है कि दूसरे मंडलों में यही भत्ते बिना किसी रुकावट के मिल रहे हैं. अब सवाल उठता है कि क्या DDU का कार्मिक विभाग रेलवे बोर्ड और हाजीपुर मुख्यालय से ऊपर होकर अपना अलग संविधान चला रहा है?
चयन और नियुक्ति प्रक्रिया में प्रशासनिक विलंब
वर्ष 2023 में आरसीसी (RRC) द्वारा जूनियर इंजीनियर के पदों के लिए विभागीय परीक्षा का विज्ञापन जारी किया गया था. इस प्रक्रिया के बाद वर्ष 2026 में प्लांट डिपो डीडीयू में नियुक्तियां शुरू हुईं. हालांकि, प्रशासनिक सुस्ती के कारण जनवरी 2026 के शुरुआती सप्ताह में अपने मूल कार्यस्थल से विरमित होने वाले इन कर्मचारियों की ज्वॉइनिंग 21 से 23 जनवरी तक टलती रही. नियुक्ति पत्र हाथ में होने के बावजूद उन्हें कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े.
नियुक्ति पत्र में स्पष्ट उल्लेख के बावजूद भत्तों से वंचित
नियुक्ति प्रक्रिया RBE 48/06 नियमावली के अंतर्गत संपन्न हुई थी, जिसके तहत अभ्यर्थियों से विकल्प मांगे गए थे. विभागीय प्रक्रिया के बाद जारी नियुक्ति पत्र में स्पष्ट रूप से लेवल-06 के तहत ₹35,400 स्टाइपेंड के साथ-साथ महंगाई भत्ता (DA) और अन्य अनुमन्य भत्तों (Usual Allowances) का उल्लेख किया गया था. पत्र पाकर उत्साहित ये कर्मचारी फील्ड ट्रेनिंग और बाद में ज़ोनल ट्रेनिंग (ZRTI) के लिए गए, जहां से उन्हें टीए (TA) से संबंधित दिशा-निर्देश भी प्राप्त हुए.
जब इन कर्मचारियों ने अपने दावे प्लांट डिपो, डीडीयू के स्थापना विभाग में जमा किए, तो उन्हें सिरे से खारिज कर दिया गया. प्लांट डिपो का कार्मिक विभाग केवल बेसिक और डीए का भुगतान कर रहा है, जबकि नियमानुसार देय HRA और TA पर विचार ही नहीं किया जा रहा है.
अन्य मंडलों और रेलवे बोर्ड के नियमों की अनदेखी
प्रभावित कर्मचारियों ने समस्तीपुर, धनबाद और दक्षिण रेलवे समेत अन्य मंडलों के उदाहरण और वेतन विवरण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए, जहां रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार ट्रेनी जेई को HRA और TA का लाभ मिल रहा है. इसके बावजूद प्लांट डिपो की स्थापना शाखा का रवैया असहयोगी बना हुआ है. कर्मचारियों का आरोप है कि प्लांट डिपो का कार्मिक विभाग LDCE और GDCE के नियमों के अंतर को ठीक से समझ नहीं पा रहा है.
साथ ही यह भी बड़ा सवाल उठाया जा रहा है कि यदि नियुक्ति पत्र में भत्तों का स्पष्ट उल्लेख था, तो अब सात महीने बाद दोबारा नया विकल्प मांगने का क्या औचित्य है? और यदि विकल्प नहीं लिया गया था, तो पिछले महीनों से केवल बेसिक और डीए का भुगतान किस आधार पर किया जा रहा था?
रेलवे प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग
समूचे प्रकरण से यह प्रतीत होता है कि प्लांट डिपो का कार्मिक विभाग रेलवे बोर्ड और पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के दिशा-निर्देशों से इतर कार्य कर रहा है. पीड़ित प्रशिक्षु इंजीनियरों ने महाप्रबंधक, हाजीपुर कार्यालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और नियमानुसार HRA, TA तथा अन्य अनुमन्य भत्तों का त्वरित भुगतान सुनिश्चित कराने की अपील की है ताकि कर्मचारियों को न्याय मिल सके और रेलवे प्रशासन में नियमों की पारदर्शिता बरकरार रहे.
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