DURG. रेलवे की सतर्कता और ईमानदारी का एक अनोखा और दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है, जहां दुर्ग आरपीएफ (RPF) की पहल ने यह साबित किया कि यात्री की सुविधा व सुरक्षा में सामान का छोटा या बड़ा होना मायने नहीं रखता. यही कारण है कि एक यात्री के ट्रेन में छूट गये जूते को ढूंढ निकालने में RPF ने जो मुस्तैदी दिखाई, उसकी तारीफ होनी तय है.
क्या है पूरा मामला
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले दुर्ग आरपीएफ को गुरुवार की सुबह 11:22 बजे नियंत्रण कक्ष रायपुर से ‘रेल मदद’ पोर्टल के जरिए सूचना मिली कि गाड़ी संख्या 12854 के कोच M-1, सीट नंबर 7 पर सफर कर रहे एक यात्री का जूता ट्रेन में ही छूट गया है.
जब तक आरपीएफ को शिकायत का संदेश मिला, तब तक ट्रेन दुर्ग स्टेशन के प्लेटफॉर्म से रवाना होकर सीधे ‘वॉशिंग लाइन’ पहुंच चुकी थी. लेकिन आरपीएफ ने इसे हल्के में नहीं लिया और जूते की खोज शुरू हुई.
वॉशिंग लाइन में तैनात जवान चंद्रमणि कोच M-1 में पहुंचा और छानबीन की. उसे कोच के भीतर एक सफेद पॉलीथीन में रखा जूता सुरक्षित मिल गया.
RPF ने दिया ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय
बरामद जूते को दुर्ग आरपीएफ पोस्ट लाया गया. अब नियमानुसार यात्री को संपर्क कर उसका सामान वापस करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
रेलवे के अधिकारियों की माने तो ‘रेल मदद’ प्रणाली यात्रियों की हर छोटी-बड़ी समस्या को हल करने में कारगर साबित हो रही है. हालांकि ट्रेन में छूट गये जूते को लेकर जो गंभीरता रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की ओर से दिखायी गयी उसने यात्री का दिल जीतने वाला काम किया जो जूते की बरामदगी की उम्मीद खो बैठा था.
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