Jalandhar/Chandigarh. पंजाब के जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन स्थित ब्रिज वर्कशॉप में भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की चंडीगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है. सीबीआई की टीम ने उत्तर रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE – इनचार्ज) मिलिंद कुमार को 66,000 रुपये की अवैध रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.
यह कार्रवाई चंडीगढ़ से आयी सीबीआई ने की. टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह कर रहे थे. गिरफ्तारी के बाद सीबीआई आरोपी अधिकारी को अपने साथ चंडीगढ़ ले गई है.
क्या है पूरा मामला, 2% कमीशन का खेल
बठिंडा स्थित मेसर्स जेएमडी ट्रेडर्स की ओर इसे इस मामले में सीबीआई को शिकायत दर्ज करायी गयी थी. इसमें बताया गया था कि एजेंसी के अधिकृत प्रतिनिधि हेमंत बंसल ने जुलाई 2024 में उत्तर रेलवे, जालंधर कैंट के ब्रिज वर्कशॉप के शेड की छत की मरम्मत, पेंटिंग और क्षतिग्रस्त स्टील सदस्यों को बदलने का ठेका (टेंडर नंबर OT-10-JRC-2024) हासिल किया था.
कार्य निष्पादन के दौरान जून 2026 में जब ठेकेदार हेमंत बंसल बिलों पर लगाई जा रही पेनल्टी और कटौतियों के सिलसिले में सीनियर सेक्शन इंजीनियर मिलिंद कुमार से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे, तब आरोपी अधिकारी ने रिश्वत की मांग रखी. SSE मिलिंद कुमार ने स्पष्ट कहा कि ठेकेदार द्वारा पूर्व में पास कराए जा चुके सभी रनिंग बिलों और भविष्य में जमा होने वाले बिलों की शुद्ध राशि (GST और अन्य वैधानिक कटौतियों के बाद) पर 2% रिश्वत देनी होगी.
आरोपी ने ठेकेदार को यह चेतावनी भी दी कि यदि 2% का कमीशन नहीं दिया गया, तो आने वाले सभी बिलों में भारी पेनल्टी और मनमानी कटौतियां की जाएंगी. जब ठेकेदार ने तत्काल रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो उनके लगभग ₹10.50 लाख के रनिंग बिल पर करीब ₹3 लाख की पेनल्टी व कटौती कर दी गई. इसके बाद भी ठेकेदार को लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि उन्हें उसी अनुबंध के तहत आगे का काम पूरा कर नए बिल जमा कराने थे.
CBI की गुप्त जांच और रिश्वत की पुष्टि
रिश्वतखोरी से तंग आकर शिकायतकर्ता हेमंत बंसल ने 21 जुलाई 2026 को सीबीआई, एसीबी, चंडीगढ़ के डीआईजी डॉ. नवदीप सिंह बरार के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलते ही सीबीआई के उप-निरीक्षक सचिन सिंह को आरोपों की सत्यता जांचने की जिम्मेदारी दी गई.
सीबीआई अधिकारी ने 21 जुलाई और 27 जुलाई 2026 को गोपनीय तरीके से सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की. इस दौरान आरोपी मिलिंद कुमार और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया गया. रिकॉर्डेड बातचीत के विश्लेषण से यह साफ प्रमाणित हो गया कि सीनियर सेक्शन इंजीनियर मिलिंद कुमार ने पिछले पास हो चुके बिलों के एवज में और लंबित बिलों पर अतिरिक्त पेनल्टी न लगाने की एवज में ₹66,000 की रिश्वत तय की थी.
FIR दर्ज और गिरफ्तारी की कार्रवाई
शिकायत और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने 3 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत प्राथमिकी (FIR No. RC0052026A0019) पंजीकृत की. इसके तुरंत बाद, सीबीआई की चंडीगढ़ टीम ने जालंधर कैंट स्थित ब्रिज वर्कशॉप पर छापा मारकर आरोपी इंजीनियर मिलिंद कुमार को ₹66,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया.
देखे सीबीआई को दी गयी शिकायत की प्रति
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