PATNA. भारतीय रेलवे के महत्वपूर्ण जोनों में शुमार पूर्व मध्य रेलवे (ECR) इन दिनों अपनी उपलब्धियों से कम, बल्कि भ्रष्टाचार के दलदल में धंसने के कारण सुर्खियों में है. हाजीपुर मुख्यालय से लेकर विभिन्न मंडलों तक फैले प्रशासनिक तंत्र में किस कदर घूसखोरी और मनमानी हावी हो चुकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार रोधी शाखा (ACB), पटना ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है.
डीडीयू मंडल के बिक्रमगंज स्टेशन क्षेत्र से जुड़े एक मामले में सहायक डिवीजनल इंजीनियर (ADEN/XBKJ) की संलिप्तता ने रेलवे के उच्चाधिकारियों के दावों की पोल खोल दी है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि महाप्रबंधक (GM) छत्रसाल सिंह के कार्यकाल के दौरान जोन में सीबीआई की यह दसवीं छापेमारी है, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक नियंत्रण और आंतरिक निगरानी तंत्र की नाकामी को दर्शाती है.
फिलहाल सहायक मंडल अभियंता (ADEN) भोला शंकर कुमार को सीबीआइ की टीम ने बुधवार की देर रात रेलवे कॉलोनी स्थित उनके सरकारी आवास पर छापेमारी कर गिरफ्तार किया है. अधिकारी पर ठेकेदार से इनवर्टर सेट, बैट्री और 7 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है.
ठेकेदार का मूल शिकायत पत्र और सीबीआई के समक्ष रखे गए बिंदु
मेसर्स सुरभि एंटरप्राइजेज की प्रोप्राइटर श्रीमती नंदनी पाण्डेय की ओर से उनके मैनेजर सह ऑपरेशनल इंचार्ज पति राकेश कुमार पाण्डेय द्वारा 28 जुलाई 2026 को सीबीआई, एसीबी, पटना को ईमेल के जरिए और 29 जुलाई 2026 को लिखित रूप में शिकायत दर्ज कराई गई थी.
शिकायत पत्र के अनुसार, फर्म द्वारा पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल के अंतर्गत आरा और सासाराम के बीच रेलवे बाउंड्री की मरम्मत से जुड़ा अनुबंधित कार्य 19 जनवरी 2026 को ही सकुशल पूरा कर लिया गया था, जिसका संतोषजनक समापन पत्र संबंधित अनुभाग इंजीनियर द्वारा पहले ही जारी किया जा चुका था.
इसके बावजूद, फर्म की अर्नस्ट मनी डिपॉजिट, परफॉर्मेंस गारंटी और सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में लगभग 1.35 लाख रुपये की राशि रोकी गई थी. इस बकाया राशि को जारी करने के एवज में बिक्रमगंज के सहायक डिवीजनल इंजीनियर भोला शंकर प्रसाद द्वारा रिश्वत के रूप में इन्वर्टर सेट और बैटरी की मांग की जा रही थी. तंग आकर प्रार्थी ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई थी, जिसके बाद सीबीआई ने सत्यापन कर शिकंजा कसा.
जीएम छत्रसाल सिंह के कार्यकाल में ताबड़तोड़ छापे, गंभीर सवाल
पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक पद पर वरिष्ठ आईआरटीएस अधिकारी छत्रसाल सिंह के कमान संभालने के बाद से रेलवे के भीतर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के दावे किए जाते रहे हैं, परंतु जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आती है. जानकारों का मानना है कि महाप्रबंधक के वर्तमान कार्यकाल के दौरान सीबीआई द्वारा जोन में की गई यह दसवीं छापेमारी है. इस प्रकार लगातार हो रही केंद्रीय जांच एजेंसियों की दबे-छिपे और प्रत्यक्ष कार्रवाइयों ने पूर्व मध्य रेलवे की साख को बट्टा लगा दिया है.
जब एक जोन के भीतर एक के बाद एक दस बार भ्रष्टाचार के मामलों में केंद्रीय एजेंसी को दखल देना पड़े, तो यह स्पष्ट संकेत है कि मैदानी स्तर पर बैठे अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं. ठेकेदारों के बिल भुगतान, ईएमडी और सिक्युरिटी मनी जैसे वैध फंड्स को रोकने के लिए जिस तरह प्रशासनिक उत्पीड़न का सहारा लिया जा रहा है, वह रेलवे की कार्य संस्कृति पर एक बदनुमा दाग है.
बहरहाल, बिक्रमगंज के इस ताजा प्रकरण और अब तक हुई छापों ने हाजीपुर मुख्यालय से लेकर रेल भवन तक हड़कंप मचा दिया है, और यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जोन में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सिर्फ कागजी जुमला बनकर रह गया है. सीबीआई ने इन्वर्टर सेट और बैटरी की मांग करने वाले सहायक मंडल अभियंता भोला शंकर कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.
आरोप है कि अधिकारी द्वारा लगातार यह दबाव बनाया जा रहा था कि ठेके में काफी मुनाफा हुआ है, इसलिए मांग पूरी न होने तक बकाया राशि का भुगतान निरस्त कर दिया जाएगा. इस मामले की जांच सीबीआई इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गयी है.
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