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Home » SER : RPF के “जांबाज इंस्पेक्टर” पर मेहरबानी या अवैध “अन-लोडिंग” का कथित खेल? एक्सटेंशन मिला पर अवार्ड से कटे, … जानें डांगुवापोसी में Extension की इनसाइड स्टोरी!
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SER : RPF के “जांबाज इंस्पेक्टर” पर मेहरबानी या अवैध “अन-लोडिंग” का कथित खेल? एक्सटेंशन मिला पर अवार्ड से कटे, … जानें डांगुवापोसी में Extension की इनसाइड स्टोरी!

Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskJuly 27, 2026
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RPF IPF विजेंद्र कुमार व संजय कुमार तिवारी (फाइल फोटो)
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KOLKATA/CKP. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के RPF में इन दिनों एक अजीबोगरीब वाकया चर्चा और बहस का केंद्र बना हुआ है. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में (ट्रांसफर मैनेजमेंट मॉड्यूल) TMM लागू होने के बाद, जोन के एक इंस्पेक्टर विजेंद्र कुमार को एक साल का सेवा विस्तार (Extension) दिया गया. यह एक्सटेंशन पूर्व आरपीएफ आईजी संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल में, डांगुवापोसी जैसे दुरुह और संवेदनशील स्टेशन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन और विशेष अनुरोध के आधार पर स्वीकृत हुआ था.

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जिस अफसर को ड्यूटी हार्ड और चुनौतीपूर्ण मानकार एक्सटेंशन दिया गया, उनका नाम देश के प्रतिष्ठित ‘अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ के लिए नामांकित तक नहीं किया गया. आखिर क्या वजह है कि एक तरफ विशेष परिस्थितियों में सेवा विस्तार दिया गया, तो दूसरी तरफ पुरस्कार की लिस्ट से उन्हें दूर रखा गया? आइए सिलसिलेवार जानते हैं इस पूरी उठापटक के अंदर की सच्चाई.

नो-लोडिंग पॉइंट पर ‘कमाई’ का कथित खेल और राजस्व को चपत

सूत्रों के हवाले से मिल रही अंदरूनी खबरों के मुताबिक, पूर्व आईजी द्वारा डांगुवापोसी इंस्पेक्टर को दिया गया सेवा विस्तार अब रेलवे प्रशासन के लिए भारी पड़ता दिख रहा है. इस स्टेशन पर बड़े पैमाने पर हो रही संदिग्ध गतिविधियों और लौह अयस्क (Ore) की हेराफेरी ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है.

  • अवैध निकासी का अड्डा: जानकारों के अनुसार, डांगुवापोसी एक ऐसा स्टेशन है जहां कोई आधिकारिक कमर्शियल लोडिंग नहीं होती. यहां सिर्फ वेइंग मशीन (Weighment) के जरिए वैगनों में लदे सामान का वजन जांचा जाता है और ओवरलोड अतिरिक्त माल को उतार दिया जाता है.
  • ‘स्वीपिंग चालान’ की आड़ में खेल: बिना किसी लोडिंग पॉइंट के, इस स्टेशन पर दर्जनों डंपर और ट्रकों की आवाजाही देखी जाती है. सूत्रों का कहना है कि वैगनों से अतिरिक्त लोड या माल उतारकर उसे ‘स्वीपिंग चालान’ (Sweeping Challan) की आड़ में ट्रकों में भरकर खुलेआम जमशेदपुर, आदित्यपुर, चांडिल आदि इलाकों में खपाया जा रहा है.
  • आरपीएफ की कार्यशैली पर सवाल: रेलवे राजस्व के नुकसान की शिकायतों के बीच विभागीय गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यह पूरी गतिविधि स्थानीय आरपीएफ तंत्र की निगरानी और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

बुनियादी सुविधाओं का अभाव बनाम एक्सटेंशन पाने का ‘लोभ’

रेलवे महकमे में आम तौर पर यह परंपरा और नियम रहा है कि कोई भी अधिकारी या रेलकर्मी अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा (Education) और परिवार के स्वास्थ्य के लिए चिकित्सीय सुविधाओं (Medical Facilities) वाले स्थानों पर ही एक्सटेंशन या ट्रांसफर की मांग करता है, ताकि उसका पारिवारिक जीवन प्रभावित न हो.

इसके ठीक विपरीत, डांगुवापोसी जैसे सुदूर, विरान और दुर्गम क्षेत्र में, जहां न तो बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्कूल हैं और न ही बेहतर अस्पताल, वहां किसी अधिकारी का बार-बार टिके रहने का प्रयास करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  • गतिविधियों पर उठते सवाल: क्या इस विषम स्थान पर बने रहने की वजह वहां से जुड़ी अनलोडिंग और कमर्शियल गतिविधियों को लेकर उठने वाले विवाद हैं ?

  • विशेष प्रशासनिक फैसले पर चर्चा : TMM नियमों के तहत आईजी स्तर से दिए गए सेवा विस्तार के फैसले को लेकर विभागीय गलियारों में तरह-तरह की प्रशासनिक चर्चाएं और सवाल तैर रहे हैं.

यह भी पढ़ें :

  •  RPF के ‘काबिल’ मुंह ताकते रहे … अवार्ड ले आये संजय तिवारी…बधाई, जमशेदपुर के अखबार ने बताया ‘रेलवे का रियल हीरो’
  • SER के नये RPF IG होंगे सौरभ त्रिवेदी, संजय मिश्रा बनाये गये मेट्रो रेल के आईजी सह PCSC

पुरस्कार और विभागीय विरोधाभास, टाटानगर से दिल्ली तक का सच

महकमे की खुफिया रिपोर्टों और जमीनी हकीकत का विरोधाभास इस बात से भी उजागर होता है कि दक्षिण पूर्व रेलवे जोन से टाटानगर के तत्कालीन पोस्ट कमांडर संजय कुमार तिवारी का नाम ‘अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ के लिए आगे बढ़ाया गया था.

  • पुरस्कार और उसके बाद कार्रवाई: उन्होंने बेहतर उपलब्धियों का दावा कर दिल्ली में रेल मंत्री के हाथों पुरस्कार हासिल किया, लेकिन कुछ ही समय बाद उनके कार्यकाल के दौरान टाटानगर में गंभीर सुरक्षा चूक और वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आ गए.
  • चला चार्जशीट का दौर: स्थिति यह है कि अब उन्हें बाकायदा चार्जशीट जारी कर विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के घेरे में ला खड़ा किया गया है. अब सवाल यह उठता है कि क्या पुरस्कार के लिए उनको बिना जांच-पड़ताल के नामित कर दिया गया था?

यह पूरा घटनाक्रम आरपीएफ के खुफिया (Intelligence) तंत्र के मूल्यांकन, चयन प्रक्रिया और विभागीय कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है. विभागीय गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि चयन के दौरान निष्पक्ष मानकों की अनदेखी कर प्रक्रियाओं को प्रभावित किया गया.

शीर्ष नेतृत्व की भूमिका और प्रशासनिक फेरबदल

पूर्व SER आरपीएफ आईजी संजय कुमार मिश्रा वर्तमान में कोलकाता मेट्रो रेलवे में आईजी पद पर तैनात हैं. उन्हें आरपीएफ की तत्कालीन डीजी सोनाली मिश्रा के बेहद करीबियों में गिना जाता है.

दक्षिण पूर्व रेलवे जोन में गिरती साख, सीबीआई की छापेमारी और भ्रष्टाचार की खबरों के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि चक्रधरपुर कमांडेंट की ही तरह आईजी पर गाज गिरेगी और उन्हें साइड लाइन पोस्टिंग दी जा सकती है. हालांकि, इसके विपरीत उन्हें सुरक्षित कोलकाता मेट्रो में ट्रांसफर दे दिया गया.

विभागीय हलकों में यह सुगबुगाहट भी है कि आगामी समय में होने वाले शीर्ष प्रशासनिक फेरबदल के तहत आईजी संजय कुमार मिश्रा को किसी नई या महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में देखा जा सकता है. हालांकि, इन चर्चाओं पर आधिकारिक तौर पर अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है. यदि आने वाले समय में ऐसा होता है, तो इसमें किसी को भी कोई अचरज नहीं होना चाहिए.

रेलहंट का प्रयास है कि सच रेल प्रशासन के सामने आये. ऐसे में अगर किसी को यह लगता है उसकी बात नहीं सुनी जा रही है तो वह अपना पक्ष whatsapp 9905460502 पर भेज सकते है, उसे पूरा स्थान दिया जायेगा.

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