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    Home » CAG report : ट्रेन की साफ-सफाई में कोताही रेल अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा, एसी में कुछ सुधार, स्लीपर का हाल बेहाल
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    CAG report : ट्रेन की साफ-सफाई में कोताही रेल अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा, एसी में कुछ सुधार, स्लीपर का हाल बेहाल

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskAugust 25, 2025
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    NEW DELHI. लंबी दूरी की ट्रेनों (Express Train) में टॉयलेट और उसके बाहर हाथ-मुंह धोने के लिए लगे सिंक की स्थिति काफी खराब पायी गयी है. एसी डिब्बों (AC Coach) में तो गंदगी कम होती है, लेकिन स्लीपर डिब्बों (Sleeper Coach) की हालत काफी खराब है. जनरल डिब्बों की बात कहने की ही नहीं. देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General) या सीएजी (CAG) की एक रिपोर्ट सामने आयी है जो चुनिंदा ट्रेनों की जांच पर आधारित है और इसके चौंकाने वाले परिणाम हैं.

    हालांकि यह रिपोर्ट साल 2018-19 से 2022-23 के बीच रेलवे के 16 जोन की 96 ट्रेनों में 2,426 यात्रियों से बात पर आधारित है. इसमें बताया गया है कि ट्रेन की साफ-सफाई में जो कोताही बरती जा रही है, उसका मूल कारण रेल अधिकारियों की लापरवाही मानी गयी है. रेलवे ने ट्रेन में साफ-सफाई का जिम्मा निजी ठेकेदारों को दे दिया है. ठेकेदारों से रेल के अधिकारी ठीक से काम नहीं करवा पाते. ठेकेदार ट्रेनों में पर्याप्त कर्मचारी और मशीन उपलब्ध नहीं कराते. जो कर्मचारी उपलब्ध भी होते हैं, उनके पास पर्याप्त संसाधनी नहीं.

    क्या कहती है सीएजी की रिपोर्ट 

    CAG की रिपोर्ट में यह बात आयी है कि ट्रेनों में सफाई ठीक से नहीं होने के कई कारण हैं. पहला और सबसे महत्वपूर्ण कि ट्रेन में सफाई करने वाले कर्मचारियों की कमी है. कर्मचारी के पास जरूरी सामान की कमी. रेलवे अधिकारियों का सफाई को लेकर ध्यान नहीं देना. ट्रेनों में AC कोच के टॉयलेट, नॉन-AC कोच के टॉयलेट से ज्यादा साफ थे. कुछ जोन में तो 50% से ज्यादा यात्री ट्रेनों की साफ-सफाई से नाखुश थे. 16 जोन की 96 ट्रेनों में 2,426 यात्रियों से पूछे गये सवाल पर जवाब यही मिली कि ट्रेनों में सफाई की हालत ठीक नहीं है.

    2,426 यात्रियों में से 366 (15%) ने कहा कि टॉयलेट या वॉशबेसिन में पानी नहीं था. Rail Madad ऐप पर भी 2022-23 में पानी की कमी को लेकर एक लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं. तभी तो CAG ने सुझाव दिया है कि लंबी दूरी की ट्रेनों में पानी भरने की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए. खासकर उन स्टेशनों पर जहां से पानी की कमी की ज्यादा शिकायतें आती हैं.

    क्लीन ट्रेन स्टेशन योजना कितनी कारगार 

    रेलवे ने ट्रेनों की साफ-सफाई के लिए कुछ महत्वपूर्ण स्टेशनों में Clean Train Stations (CTS) स्कीम शुरू की है. इसका मकसद है स्टेशनों पर कम समय के लिए रुकने वाली ट्रेनों के टॉयलेट, दरवाजे और vestibule जैसे हिस्सों की सफाई मशीनों से की जाए. लेकिन CAG ने कहा कि इस स्कीम का फायदा पूरी तरह से नहीं मिल पाया. क्योंकि रेलवे के अधिकारियों ने ठेकेदारों से ठीक से काम नहीं करवाया. ठेकेदारों ने सफाई के लिए जरूरी मशीनें और कर्मचारी भी पूरे नहीं लगाए.

    CAG ने यह भी बताया है कि रेलवे के अधिकारी ट्रेनों में काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं करवाते हैं. जबकि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें कर्मचारियों ने अपराध किए हैं. एक उदाहरण देते हुए CAG ने बताया कि दिल्ली-अहमदाबाद स्वर्ण जयंती राजधानी ट्रेन में एक अटेंडेंट ने एक यात्री के साथ बलात्कार किया था.

    सीएजी के मुताबिक भारतीय रेल देश भर में हर रोज 12,541 ट्रेनों को चलाता है. इनमें ट्रेनों में प्रति दिन 1.75 करोड़ से भी अधिक यात्री अपने मंजिल तक पहुंचते हैं. इस समय रेलवे के नेटवर्क में 7,364 से अधिक रेलवे स्टेशन हैं. यात्री यातायात की अधिक संख्या को देखते हए, स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मसला है. तभी तो सीएजी ने इस बारे में अलग से ऑडिट किया है.

    but condition of sleepers is pathetic CAG report: Negligence in cleaning of trains is the result of negligence of railway officials some improvement in AC
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