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    Home » 30 जुलाई 2024 : हावड़ा-मुंबई मेल हादसे के एक साल बाद पूरे, सामने नहीं आयी रेलवे की जांच रिपोर्ट, कहां हुई चूक!
    रेलहंट स्पेशल

    30 जुलाई 2024 : हावड़ा-मुंबई मेल हादसे के एक साल बाद पूरे, सामने नहीं आयी रेलवे की जांच रिपोर्ट, कहां हुई चूक!

    News DeskBy News DeskJuly 30, 2025
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    • हावड़ा-मुंबई मेल हादसे को एक साल, जांच रिपोर्ट अब तक लंबित – चक्रधरपुर मंडल की लापरवाही फिर सवालों के घेरे में

    CHAKRADHARPUR. चक्रधरपुर रेल मंडल में हुए एक बड़े हादसे को आज एक वर्ष पूरे हो गये. लेकिन न तो जांच पूरी हुई है और न ही किसी की जबावदेही तय की गयी. कार्रवाई का तो पता नहीं. 30 जुलाई 2024 को हावड़ा से मुंबई जा रही मेल एक्सप्रेस ट्रेन बड़ाबंबू स्टेशन के समीप एक पटरी से उतरी मालगाड़ी से टकरा गई थी. हादसा इतना भीषण था कि मेल एक्सप्रेस के 20 डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इस दुर्घटना में राउरकेला निवासी दो यात्रियों की मौत हुई, जबकि दर्जनों यात्री घायल हो गए थे.

    रेलवे को इस हादसे से न केवल जानमाल की हानि हुई, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा. दो दिनों तक चक्रधरपुर से टाटानगर रेल खंड पर परिचालन पूरी तरह बाधित रहा. इस मामले में कुछ लोगों को आनन-फानन में इधर से उधर भी किया गया, लेकिन एक साल बाद भी न तो हादसे की फाइनल जांच रिपोर्ट सामने आई और न ही किसी की जिम्मेदारी तय की गयी. तो क्या मामले को पूरी तरह दबा दिया गया?

    जांच में 35 से पूछताछ, क्या हो गयी लीपापोती

    हादसे के बाद 35 रेलकर्मियों से पूछताछ की गई. इसमें दोनों ट्रेनों के लोको पायलट, ऑन ड्यूटी स्टाफ, व नियंत्रण से जुड़े विभिन्न विभागों के कर्मी शामिल थे. हालांकि जांच का परिणाम आज तक सामने नहीं आया. न किसी कर्मचारी पर कार्रवाई हुई और न ही किसी दोषी को चिन्हित किया गया. रेल जीएम ने भी बयान दिया था कि “प्राथमिक जांच में कोई मानवीय भूल सामने नहीं आई है.” ऐसे में सवाल उठता है कि फिर यह हादसा हुआ कैसे?

    हादसों में रिकॉर्ड बना रहा है चक्रधरपुर मंडल

    चक्रधरपुर रेल मंडल आज देश के उन मंडलों में शामिल होता जा रहा है, जहां रेल हादसे नियमित होते जा रहे हैं. कई बार तो एक ही दिन में दो-दो घटनाएं भी हो चुकी हैं. हाल यह है कि एक ही ट्रेन दो बार दुर्घटना का शिकार बन चुकी है. मंडल माल ढुलाई के क्षेत्र में भले ही रिकॉर्ड बना रहा हो, लेकिन सुरक्षा के मामले में इसकी हालत चिंताजनक है.

    यह भी पढ़ें : हावड़ा-मुंबई मेल हादसा : पहले से बेपटरी मालगाड़ी में 120 की रफ्तार से टकराई मुम्बई मेल ट्रेन

    सेफ्टी से बार-बार समझौता बना कारण !

    रेलवे के जानकार बताते हैं कि माल ढुलाई में कीर्तिमान बनाने की होड़ में सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है. लोको पायलट और ट्रेन मैनेजरों से तय सीमा से अधिक ड्यूटी कराई जा रही है. उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा. मालगाड़ियों के रैक व डिब्बों की स्थिति जर्जर हो चुकी है, लेकिन उन्हें बदला नहीं जा रहा. हादसे का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है.

    चुप्पी और छुपाने की बढ़ रही संस्कृति

    मंडल में हादसों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय उन्हें ढंकने की परंपरा बन चुकी है. अधिकारी जांच से ज्यादा इस बात की कोशिश में रहते हैं कि खबर बाहर न जाए. इसी का परिणाम है कि बड़ाबंबू स्टेशन पर दुर्घटनाग्रस्त पड़ी मालगाड़ी, जिसके बीच का डिब्बा दूसरी पटरी तक आ चुका था, उसके कारण मेल एक्सप्रेस से टकराकर इतना बड़ा हादसा हुआ – पर कोई जवाबदेह नहीं है.

    न न्याय, न जवाबदेही

    हावड़ा-मुंबई मेल हादसे में मारे गए दो यात्रियों को आज तक न्याय नहीं मिला है. रेलवे न तो किसी दोषी को चिन्हित कर पाई और न ही इस लापरवाही की जिम्मेदारी तय कर सकी. यह घटना चक्रधरपुर रेल मंडल की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है – क्या यहां जान से बड़ी माल ढुलाई की दौड़ बन चुकी है?

    अब सवाल यह है कि क्या रेलवे इस लापरवाही का जवाब देगा या फिर यह हादसा भी इतिहास की फाइलों में एक और ‘अनुत्तरित दुर्घटना’ बनकर दफन हो जाएगा?

    30 July 2024: One year has passed since the Howrah-Mumbai Mail accident but the investigation report has not been revealed whose negligence was it?
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