KOLKATA. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) मुख्यालय से जारी आरपीएफ इंस्पेक्टरों के ताजा तबादले और पोस्टिंग सूची ने एक बार फिर महकमे के भीतर चल रहे खेल और उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है. इस बार के फेरबदल में सीधे तौर पर आईजी आरपीएफ के हस्तक्षेप की बात सामने आ रही है, जहां नियमों को ताक पर रखकर एक ही चहेते अधिकारी पर मेहरबानी की बारिश की गई है.

जोनल मुख्यालय से जारी इस सूची के तहत आदित्यपुर में इंस्पेक्टर एके सिंह के एएससी (ASC) बनने के बाद रिक्त हुए पद पर अफसर खान को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं सीआईबी आद्रा में जवान सिंह हरितवाल और संतरागाछी आरपीएफ पोस्ट में सुधीर कुमार की पोस्टिंग की गयी है. यह पोस्ट भोला सिंह के ASC बनने के बाद रिक्त हो गया था. यहां सुधीर कुमार की पोस्टिंग दी गयी है.



तबादलों के बाद बड़ा सवाल सुधीर कुमार की नई पोस्टिंग और उनके कार्यकाल को लेकर उठ रहा है. वह निवर्तमान में बेहद अहम माने जाने वाले खड़गपुर आर यार्ड (R Yard) में पदस्थापित है जबकि उससे पहले वह खड़गपुर में ही स्टेशन पोस्ट की अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. इस तबादले में बड़ी बात यह सामने आयी है कि अभी सुधीर कुमार का निर्धारित कार्यकाल पूरा भी नहीं हुआ इससे पहले ही उन्हें नयी पोस्टिंग दे दी गयी. इसके पीछे चार माह बाद होने वाले TMM से उन्हें पिछले दरवाजे से बाहर निकालना माना जा रहा है.
रेलवे के प्रशासनिक नियमों के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण पद पर कार्यकाल पूरा होने के बाद अमूमन ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ (Cooling off Period) का नियम अपनाया जाना चाहिए, ताकि अन्य योग्य अधिकारियों को भी मौका मिल सके. हैरानी की बात यह है कि आर यार्ड में अभी उनका चार महीने का कार्यकाल शेष है, इसके बावजूद उन्हें बिना किसी कूलिंग पीरियड के सीधे जोन के अहम RPF पोस्ट संतरागाछी की जिम्मेदारी सौंप दी गई.
उठ रहे अहम सवाल
खड़गपुर आर यार्ड में चार महीने का कार्यकाल बाकी रहते हुए सुधीर कुमार को संतरागाछी पोस्ट की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गयी
नियमों को ताक पर रखकर बिना ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ के लगातार तीसरी बार मलाईदार पोस्टिंग कैसे दी गयी
मिड टर्म पोस्टिंग में पहले से प्रतीक्षारत वरिष्ठ और योग्य इंस्पेक्टरों को किन परिस्थितियों में नजर अंदाज किया गया
RPF महकमे में चर्चा आम है कि आईजी कार्यालय से तगड़ी सेटिंग और तालमेल बिठाकर सुधीर कुमार लगातार तीसरी बार अहम और मनचाही पोस्टिंग पाने में सफल रहे हैं. हालांकि इस ताबड़तोड़ और पक्षपातपूर्ण तबादले से आरपीएफ में गहरा असंतोष और आक्रोश व्याप्त है. विभागीय गलियारों में यह चर्चा खुलकर हो रही है कि यह उच्च स्तर पर पनप रहे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का सीधा और क्लासिक उदाहरण है.
चर्चा यह है कि विभाग के कई वरिष्ठ और ईमानदार इंस्पेक्टर लंबे समय से अच्छी और रूटीन पोस्टिंग के इंतजार में दर-दर भटक रहे हैं और अपनी सेवा के दिन काट रहे हैं, लेकिन उच्चाधिकारियों की कृपा दृष्टि के आगे इन सभी को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया. एक ही अधिकारी को बार-बार अहम पोस्ट पर नवाजने से यह साफ जाहिर होता है कि रेलवे सुरक्षा बल में नियमों और योग्यता की जगह ऊपरी पहुंच और रसूख ने ले ली है, जिससे महकमे की छवि पर भी बट्टा लग रहा है.
सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि राउरकेला में तैनाती के दौरान सुधीर कुमार का कार्यकाल बेहद विवादों से घिरा रहा था और वे गंभीर आरोपों की चपेट में आ गए थे, जिसके बाद उन्हें विभागीय जांच प्रक्रिया का भी सामना करना पड़ा था. बावजूद बिना किसी ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ (Cooling off Period) के उन्हें लगातार तीसरी पर संतरागाछी जैसे संवेदनशील और बड़े पोस्ट की कमान सौंपना कई बड़े सवाल खड़े करता है.
आखिर रेलवे प्रशासन और आईजी कार्यालय किस मजबूरी या दबाव के तहत इस विशेष मेहरबानी को अंजाम दे रहा है? यदि निष्पक्ष जांच हो, तो इस तबादला रैकेट के कई और काले राज बेनकाब हो सकते हैं. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) में आरपीएफ के महानिरीक्षक (IG) सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त (PCSC) अभी सौरभ त्रिवेदी हैं.


