Dausa. राजस्थान के दौसा रेलवे स्टेशन पर एक हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक मुल्जिम को कोर्ट में पेश करने ले जा रहे पुलिसकर्मियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच टिकट को लेकर जमकर हंगामा हुआ. इस घटना ने अब तूल पकड़ लिया है और नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर दी है.
क्या है पूरा घटनाक्रम?
जानकारी के अनुसार, राजस्थान पुलिस के 6 जवान सुरक्षा के बीच एक मुल्जिम को दौसा कोर्ट में पेश करने के लिए ला रहे थे. इन जवानों के पास भुज-बरेली ट्रेन का थर्ड एसी का वैध टिकट था. हालांकि, किसी कारणवश उनकी यह निर्धारित ट्रेन छूट गई. ट्रेन छूटने के बाद पुलिसकर्मियों ने मजबूरी में उसी रूट की शालीमार मालाणी एक्सप्रेस का सहारा लिया और उसमें सवार हो गए.
ट्रेन के अंदर शुरू हुई बहस और आरपीएफ की तीखी नोकझोंक
जैसे ही ट्रेन में टिकट चेकिंग शुरू हुई, सीटीआई (CTI) आलोक निमेष और टीटीई (TTE) ने पुलिसकर्मियों से टिकट दिखाने को कहा. शालीमार मालाणी एक्सप्रेस का टिकट न होने पर बिना टिकट यात्रा की रसीद बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिस पर पुलिसकर्मी भड़क उठे. उनका तर्क था कि वे किसी निजी या शौकिया यात्रा पर नहीं हैं, बल्कि आधिकारिक ड्यूटी पर एक मुल्जिम को कोर्ट ले जा रहे हैं.
विवाद तब और बढ़ गया जब ट्रेन में ड्यूटी पर मौजूद एक आरपीएफ हेड कांस्टेबल ने उलटे पुलिसकर्मियों पर ही अपमानजनक टिप्पणियां कर दीं. आरपीएफ कर्मी ने कहा कि यदि ट्रेन छूट गई थी, तो उन्हें निजी वाहन से आना चाहिए था. दौसा जंक्शन पहुंचने पर बिना टिकट यात्रियों का मेमो दिए जाने को लेकर भी गतिरोध बना रहा और आरोप है कि इस दौरान आरपीएफ इंचार्ज ने मेमो को फेंक दिया.
अब यूनियन उतरी विवाद में, निष्पक्ष जांच की मांग
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के तूल पकड़ने के बाद अब नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है. यूनियन का कहना है कि रेलवे और पुलिस प्रशासन के बीच इस तरह का अभद्र व्यवहार और समन्वय की कमी बेहद गंभीर विषय है. इस जांच से यह स्पष्ट हो पाएगा कि टिकट विवाद और मेमो फेंकने की इस घटना के पीछे असल लापरवाही किसकी थी.



