दानापुर आरपीएफ प्रभारी प्रदीप बरनवाल की अचानक विदाई और एक माह पहले ही हरनौत पदस्थापित हुए संजीव कुमार को अचानक दानापुर भेजा जाना भले ही प्रशासनिक मामला बताया जा रहा हो लेकिन इसे नये डीजी जितेंद्र कुमार के भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
NEW DELHI/PATNA. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के दानापुर पोस्ट में लंबे समय से जमे प्रभारी निरीक्षक प्रदीप बरनवाल पर गाज गिर चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स और रेल सूत्रों के अनुसार, अवैध हॉकर-वेंडिंग को संरक्षण देने के आरोपों और एक सुनियोजित ‘छुट्टी के खेल’ के खुलासे के बाद उन्हें दानापुर से हटाकर समस्तीपुर कंट्रोल में अटैच कर दिया गया है.
उनकी जगह हरनौत के तेज-तर्रार और ईमानदार छवि वाले इंस्पेक्टर संजीव कुमार को दानापुर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन की कमान सौंपी गई है. संजीव कुमार फिलहाल बिहार नालंदा के हरनौत में तैनात है. उन्होंने जून 2026 में सासाराम आरपीएफ पोस्ट में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया था. उसके बाद उन्हें हरनौत भेजा गया था.
हरनौत में अक्टूबर 2026 में उनके नेतृत्व में हरनौत रेलवे कारखाना के पावर कार से हो रही 240 लीटर डीजल चोरी का पर्दाफाश किया गया था, जिसमें रेलवे कर्मचारी समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें अचानक दानापुर का अस्थायी प्रभार दिये जाने को RPF महकमे में खास माना जा रहा है.
रेलवे बोर्ड में RPF के नये डीजी जितेंद्र कुमार के प्रभार लेने के कुछ घंटों बाद ही दानापुर आरपीएफ प्रभारी पर कार्रवाई से महकमे के भ्रष्ट अधिकारियों में बेचैनी बढ़ गयी है.
क्या था मामला और ‘छुट्टी का खेल’?
सूत्रों के मुताबिक, दानापुर स्टेशन परिसर और ट्रेनों में अवैध हॉकर-वेंडिंग और कथित वसूली को संरक्षण दिए जाने की शिकायतें सीधे रेलवे बोर्ड तक पहुंच रही थी. मामला इतना गंभीर था कि स्थिति की जांच के लिए रेलवे बोर्ड की IVG (इंसपेक्शन एंड विजिलेंस ग्रुप) टीम को विशेष तौर पर दानापुर भेजा गया.
हालांकि जांच टीम के आने के ठीक पहले RPF इंस्पेक्टर प्रदीप बरनवाल 23 अक्टूबर को अचानक छुट्टी पर चले गए. 25 और 26 अक्टूबर को रेलवे बोर्ड की IVG टीम दानापुर पहुंची, तो उससे ठीक पहले सभी अवैध वेंडर गायब हो चुके थे और पूरा बाजार साफ-सुथरा दिखा. लिहाजा टीम खाली हाथ वापस लौट गयी.
इधर, अवकाश के पूरे होने से पहले ही इंस्पेक्टर साहब ने 31 अक्टूबर (यानी पूर्व डीजी के रिटायरमेंट के दिन) तक छुट्टी और बढ़ा ली. चर्चा तो यहां तक थी कि डीजी के रिटायरमेंट के बाद दानापुर में कथित तौर पर जश्न मनाया गया और इसके ठीक बाद यहां अवैध वेंडिंग दोबारा पूरी रफ्तार से शुरू हो गई.
नए DG जितेन्द्र कुमार के प्रभार लेने के 24 घंटे के भीतर एक्शन
इस बीच बिहार कैडर के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी जितेंद्र कुमार ने 1 नवंबर को RPF के नए महानिदेशक (DG) के रूप में पदभार ग्रहण किया. पद संभालने के महज 24 घंटे के भीतर ही दानापुर के चर्चित इंस्पेक्टर को हटाने का आदेश जारी हो गया. आरपीएफ में इसे नए DG के सख्त तेवरों का ट्रेलर माना जा रहा है, यही कारण है कि पूर्व मध्य रेल (ECR) से लेकर दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) समेत सभी जोन में RPF के भ्रष्ट तंत्र में बेचैनी मच गयी है.
दानापुर आरपीएफ प्रभारी की अचानक विदाई को प्रशासनिक ट्रांसफर भले ही बताया जा रहा हो लेकिन इसे डीजी के भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है. वहीं दानापुर में इंस्पेक्टर संजीव कुमार के आने से उम्मीद से यह उम्मीद जगी है कि दानापुर स्टेशन पर अवैध गतिविधियों पर तत्काल नकेल कसेगी और रेलवे की बेपटरी हो चुकी छवि फिर से पटरी पर लौटेगी.


