- हावड़ा से झारसुगुड़ा तक फोर्थ लाइन और टाटा से अनारा की ओर थर्ड लाइन का प्रस्ताव
- राजखरसावां से जरुली की ओर थर्ड और फोर्थ लाइन पर चल रहा काम
- झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में रेलवे योजनाओं पर ₹3,169 करोड़ होंगे खर्च
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने झारखंड में रेल बुनियादी ढांचे (Railway Infrastructure) को मजबूत करने और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए एक ऐतिहासिक वित्तीय सौगात दी है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बड़े बयान में खुलासा किया है कि इस वर्ष झारखंड के लिए रेलवे बजट को बढ़ाकर लगभग 7,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह राशि राज्य में रेल यात्रियों की सुविधाओं और आधुनिक परियोजनाओं के विकास में मील का पत्थर साबित होगी.
मुख्य घोषणाएं और बड़े आंकड़े
- बजट में अभूतपूर्व उछाल: रेल मंत्री के अनुसार, लगभग 14 साल पहले झारखंड को रेलवे बजट के तहत मात्र 400 करोड़ रुपये मिलते थे, जो अब बढ़कर सीधे 7,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं.
- तेज गति से रेल कनेक्टिविटी का विस्तार: इस भारी-भरकम बजट के जरिए राज्य के सुदूर और औद्योगिक क्षेत्रों में रेल नेटवर्क का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है.
- बुनियादी ढांचे और नई परियोजनाओं पर जोर: बढ़ी हुई राशि का उपयोग नई रेल लाइनों के बिछाने, लाइनों के दोहरीकरण (Doubling), विद्युतीकरण (Electrification) और स्टेशनों के आधुनिकीकरण जैसे विकास कार्यों में किया जा रहा है.
- यात्री सुविधाओं में सुधार: बजट आवंटन का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की बेहतर उपलब्धता, सुरक्षा व्यवस्था और समय पर परिचालन सुनिश्चित करना है, जिससे आम यात्रियों का सफर सुगम हो सके.
- क्षेत्रीय विस्तार: यह महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट मुख्य रूप से झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा, जिससे तीनों राज्यों के बीच आवागमन और माल ढुलाई बेहद सुगम हो जाएगी।
- रूट्स और कनेक्टिविटी: साझा किए गए रूट मैप के अनुसार, इसमें दामोदर, बांकुरा, बिष्णुपुर, खड़गपुर, चक्रधरपुर और दुर्गापुर जैसे अहम औद्योगिक व व्यावसायिक क्षेत्र शामिल हैं, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और यात्रा को नई गति मिलेगी।
झारखंड के औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
झारखंड देश के सबसे समृद्ध खनिज राज्यों में से एक है. यहां कोयला, लौह अयस्क और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की ढुलाई के साथ-साथ यात्री ट्रेनों का निर्बाध परिचालन राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. रेलवे बजट में हुई इस ऐतिहासिक वृद्धि से न केवल माल ढुलाई अधिक प्रभावी होगी, बल्कि व्यापारियों, नौकरीपेशा वर्ग, विद्यार्थियों और दैनिक यात्रियों को भी सुगम यातायात का बड़ा लाभ मिलेगा.
विकास कार्यों की रफ़्तार पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों और आम जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आवंटित 7,500 करोड़ रुपये की इस राशि का उपयोग किन-किन परियोजनाओं में और किस गति से किया जाता है. समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा होना और निर्माण की उच्च गुणवत्ता बनाए रखना राज्य के रेलवे विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा. बहरहाल, इतने बड़े पैमाने पर फंड मिलने से झारखंड के रेल नेटवर्क के स्वर्ण काल की शुरुआत तय मानी जा रही है.


