New Delhi/Zurich. स्विट्जरलैंड की राष्ट्रीय रेलवे एजेंसी स्विस फेडरल रेलवे (SBB) ने अपने पूरे रेल नेटवर्क के डिजिटल आधुनिकीकरण और सिग्नलिंग डिज़ाइन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय निविदा (Tender) के तहत स्विस टेक कंपनी trafIT solutions को चुना है. यह अनुबंध SBB के सिग्नलिंग और कंट्रोल-कमांड सिस्टम को आधुनिक और पूरी तरह वेब-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
तकनीक और मुख्य कार्यप्रणाली
इस प्रोजेक्ट का मुख्य आधार trafIT solutions का railOscope प्लेटफॉर्म है. यह एक ऐसा वेब-आधारित सॉफ़्टवेयर है जो रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, टाइमटेबल, रोलिंग स्टॉक (ट्रेन व डिब्बे) और सिग्नलिंग डेटा को एक ही संरचित और केंद्रीकृत मॉडल में प्रबंधित करता है.
- डिजिटल मैपिंग व डिज़ाइन: यह टूल ‘स्कीमैटिक ट्रैक नेटवर्क’ पर सिग्नलिंग एलिमेंट्स और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का सटीक और वर्जन-नियंत्रित (version-controlled) डिज़ाइन तैयार करता है.
- पारदर्शिता और इंटीग्रेशन: यह प्लेटफ़ॉर्म खुले APIs के माध्यम से अन्य रेलवे प्रणालियों के साथ आसानी से डेटा साझा कर सकता है.
- वैश्विक अनुभव: इस तकनीक का सफल उपयोग नार्वेजियन रेलवे (Bane NOR) अपने ERTMS (यूरोपीय रेल ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) प्रोजेक्ट में पिछले 7 वर्षों से कर रही है.
भारतीय रेलवे के लिए क्यों अहम है यह मॉडल?
वर्तमान में भारतीय रेलवे अपने महत्वाकांक्षी ‘कवच’ (Kavach – Automatic Train Protection System) को तेज़ी से लागू कर रही है और अपने सिग्नलिंग नेटवर्क का डिजिटलीकरण कर रही है. ऐसे में स्विस और नार्वेजियन रेलवे का यह मॉडल भारतीय रेल के लिए अत्यंत प्रासंगिक है:
- कवच (Kavach) के लिए सटीक डेटाबेस: कवच जैसे ऑटोमैटिक ट्रेन सुरक्षा तंत्र को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए ट्रैक-साइड सिग्नलिंग, लोकोमोटिव डेटा और स्टेशन यार्ड का सटीक और रीयल-टाइम डिजिटल डेटा चाहिए होता है. railOscope जैसा प्लेटफ़ॉर्म इस डेटा को बिना किसी मानवीय त्रुटि के व्यवस्थित कर सकता है.
- यार्ड री-मॉडलिंग व नई पटरियों का त्वरित नियोजन: भारत में बड़े पैमाने पर पटरियों के दोहरीकरण, नए कॉरिडोर और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का काम चल रहा है. डिजिटल और वेब-बेस्ड स्कीमैटिक प्लानिंग टूल्स से डिज़ाइनिंग का समय और लागत दोनों काफी कम हो सकते हैं.
- सिस्टम इंटरऑपरेबिलिटी: जैसे ERTMS पूरे यूरोप में अलग-अलग सिस्टम को जोड़ता है, वैसे ही भारत में भी विभिन्न वेंडर्स द्वारा लगाए जा रहे कवच और सिग्नलिंग इक्विपमेंट के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए एक ओपन-API डेटा मॉडल की आवश्यकता है.
भविष्य की राह
SBB द्वारा अपनाया गया यह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल यह साबित करता है कि आधुनिक सिग्नलिंग सिर्फ पटरियों पर उपकरण लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत डिजिटल डेटा प्लेटफ़ॉर्म उसकी रीढ़ होता है. 22 से 25 सितंबर 2026 तक बर्लिन में आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय रेलवे प्रदर्शनी InnoTrans 2026 (Hall 4.1, Stand 280) में इस तकनीक का सीधा प्रदर्शन किया जा रहा है, जो भारतीय रेलवे के इंजीनियरों और नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है.
प्रेस विज्ञप्ति



