अवैध वसूली का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रशिक्षु (ट्रेनी) कर्मचारियों से, जिनसे चंदा लेने का कोई नियम ही नहीं है, मात्र दो महीनों के भीतर दो बार जबरन और धमकाकर वसूली की गई है. प्रभावित कर्मचारियों ने लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है.
JHANSI. झांसी मंडल में रेलवे कर्मचारियों के बीच मान्यता प्राप्त यूनियनों की तानाशाही और जबरन चंदा वसूली के खिलाफ भारी आक्रोश और तनाव का माहौल देखा जा रहा है. स्थिति यह है कि कर्मचारी अब प्रशासनिक चुप्पी के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन और आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं.
यूनियन का विरोध क्यों हो रहा है?
कर्मचारियों का मुख्य आरोप है कि मान्यता प्राप्त संगठनों की कार्यशैली से असंतुष्ट होने के कारण उन्होंने एक वर्ष पूर्व ही चंदा कटौती बंद करने के लिए आवेदन दे दिया था. इसके बावजूद, यूनियनों की मनमानी इतनी बढ़ चुकी है कि कर्मचारियों के वेतनों से जबरन चंदा काटा जाना लगातार जारी है.
इस अवैध वसूली का सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रशिक्षु (ट्रेनी) कर्मचारियों से, जिनसे चंदा लेने का कोई नियम ही नहीं है, मात्र दो महीनों के भीतर दो बार जबरन और धमकाकर वसूली की गई है. कई प्रभावित कर्मचारियों ने इस संबंध में लिखित रूप से अपनी शिकायत भी दर्ज कराई है. कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन की इस मामले में चुप्पी और उदासीनता से ऐसा प्रतीत होता है जैसे इस अवैध खेल को मौन स्वीकृति दी जा रही है. इस दमनकारी नीति के चलते रेलकर्मियों में गहरा तनाव और गुस्सा है, और उन्होंने इस समस्या को सीधे महाप्रबंधक (प्रयागराज) तथा रेलवे बोर्ड (नई दिल्ली) तक पहुंचाने की चेतावनी दी है.
प्रशासन के क्या आदेश हैं?
इस पूरे विवाद के बीच उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन द्वारा अघोषित और बाध्य चंदा वसूली पर रोक लगाने की एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. नए निर्देशों के अनुसार:
- अनिवार्य वार्षिक वसूली समाप्त: मान्यता प्राप्त यूनियनों के सदस्यता शुल्क के रूप में लगने वाले 400 रुपये की अनिवार्य वार्षिक वसूली की बाध्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.
- विकल्प का अधिकार: अब रेलकर्मियों को यह पूर्ण विकल्प दिया गया है कि वे जिस यूनियन को चुनेंगे, केवल उसी के लिए उनके वेतन से सदस्यता शुल्क काटा जाएगा. यदि कर्मचारी कटौती नहीं चाहता है, तो रेलवे प्रशासन आवेदन मिलते ही जबरन होने वाली कटौती को तुरंत रोक देगा.
- यूनियन की सहमति की अनिवार्यता नहीं: इन नए फैसलों को लागू करने के लिए मान्यता प्राप्त यूनियनों के महामंत्रियों की सहमति लेना अब आवश्यक नहीं है. प्रशासन को यह कदम कई वर्षों से अन्य संगठनों द्वारा चलाए जा रहे विरोध अभियानों और हर स्तर पर दर्ज आपत्तियों के बाद उठाना पड़ा है.
- लिखित इंकारनामा और प्रक्रिया: रेलवे प्रशासन कर्मचारियों से प्राप्त होने वाले विकल्प-पत्र को संबंधित मान्यता प्राप्त यूनियन के पास भेजेगा, जिसका जवाब यूनियन को देना होगा. यदि निर्धारित समय में यूनियन से कोई जवाब नहीं आता है, तो प्रशासन स्वतः ही कर्मचारी के वेतन से होने वाली कटौती को रोक देगा. वर्तमान नियमों के तहत एनसीआरईएस (NCRES) के लिए कटौती मार्च-अप्रैल और एनसीआरएमयू (NCRMU) के लिए मई-जून में की जाती है.
अब देखना यह होगा कि उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन इन कड़े प्रशासनिक आदेशों के बावजूद हो रही जबरन वसूली पर क्या त्वरित और ठोस कार्रवाई करता है, या फिर कर्मचारियों का यह आक्रोश और अधिक उग्र रूप लेता है.


