TATANAGAR. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के चक्रधरपुर मंडल में आखिरकार वह प्रशासनिक कार्रवाई हो ही गई, जिसकी चर्चा पिछले कई दिनों से गलियारों में दबी जुबान से चल रही थी. टाटानगर में आईओडब्ल्यू (लैंड) के रूप में पदस्थापना के बाद से ही अपनी कार्यशैली और विवादों को लेकर चर्चा में रहे वरिष्ठ खंड इंजीनियर (SSE/Works) उपेंद्र कुमार सिंह का आखिरकार टाटानगर से पत्ता साफ कर दिया गया है.
सीनियर डीईएन (को-ऑर्डिनेशन) की प्रशासनिक स्वीकृति के बाद 30 अक्टूबर 2026 को डीपीओ (DPO) ने आदेश जारी कर उन्हें टाटानगर से हटाते हुए प्रिंसिपल एमडीडीटीआई, टाटा (MDDTI/TATA) में बतौर वरिष्ठ खंड इंजीनियर (वर्क्स) के पद पर भेज दिया है. उनकी जगह अब चक्रधरपुर में पदस्थापित अशोक कुमार को टाटानगर का नया एसएसई (वर्क्स)/लैंड सेल की कमान सौंपी गई है.

हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर ‘प्रशासनिक दृष्टिकोण’ पर समयबद्ध तबादला बताया जा रहा है लेकिन अंदरखाने रेलवे महकमे में यह चर्चा जोरों पर है कि उपेंद्र कुमार सिंह की कार्यप्रणाली और गतिविधियां उच्चाधिकारियों की आंखों में खटक रही थीं.
लीज की जमीनों पर अवैध निर्माण और ‘भयादोहन’ के लगे आरोप
टाटानगर में पदस्थापना के ठीक बाद से ही उपेंद्र कुमार सिंह का कार्यकाल विवादों के साये में रहा. रेलवे सूत्रों के मुताबिक, उनकी कार्यशैली हमेशा संदेह के घेरे में रही और कई मामलों में तो उनकी सीधी संलिप्तता ने रेलवे की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया.
- जुगसलाई लीज प्रकरण और जमीन निरस्तीकरण : जुगसलाई में प्रदीप मिश्रा चौक के समीप लीज की जमीन पर अवैध निर्माण, शराब व पटाखा दुकान के संचालन का मामला इस कदर उलझा कि अंततः रेलवे को मजबूर होकर लीज ही रद्द करना पड़ा. बताया जाता है कि अतिक्रमण के गंभीर मामले को महीनों तक दबाए रखने और लीजधारियों को संरक्षण देने में आईओडब्ल्यू लैंड की संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आई थी.
- गोलपहाड़ी चौक पर होटल का अवैध कब्जा : गोलपहाड़ी चौक के पास रेलवे लीज की जमीन पर होटल के लिए हो रहे अवैध निर्माण का मामला भी खूब उछला. पहले तो आईओडब्ल्यू लैंड ने इस अवैध कार्य को रोकने का नाटक किया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद रहस्यमय तरीके से उसे हरी झंडी दे दी गई. नतीजा यह हुआ कि आवंटित भू-भाग से कहीं अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा करा यहां होटल का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा है.
- कार्रवाई के नाम पर ‘ठंडे बस्ते’ की नीति: उपेंद्र कुमार सिंह ने टाटानगर में आते ही लीज जमीनों पर अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज तो बहुत जोर-शोर से उठाई, लेकिन देखते ही देखते उन सभी मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. महकमे में यह चर्चा आम हो गई थी कि लीज जमीन पर अवैध निर्माण की आड़ में भयादोहन (ब्लैकमेलिंग) का खेल खेला जा रहा है, और अंततः किसी भी बड़े अवैध निर्माण पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
- गुदड़ी बाजार नोटिस विवाद: हाल ही में गुदड़ी बाजार में लीज जमीन पर अवैध कब्जे के नाम पर 20 से अधिक लोगों को अचानक नोटिस थमा दिए गए थे, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश और हंगामा मच गया था. इस मनमाने और संदेहास्पद कदम ने आग में घी का काम किया. अब इन नोटिस पर क्या कार्रवाई रेल प्रशासन करेगा यह देखने वाली बात होगी.
रेलहंट ने रेलवे प्रशासन को किया था आगाह
विदित हो कि ‘रेलहंट’ ने टाटानगर क्षेत्र में रेलवे की बेशकीमती लीज भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण और आईओडब्ल्यू लैंड की संदिग्ध भूमिका को लगातार अपने प्रखर अंको में प्रमुखता से उठाया था. रेलहंट द्वारा इन मामलों का पर्दाफाश किए जाने के बाद से ही रेलवे के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों ने उपेंद्र कुमार सिंह की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी थी.
दबाव बढ़ने और प्रशासनिक तौर पर फाइलें खुलने के बाद आखिरकार सीनियर डीईएन को-ऑर्डिनेशन ने बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें टाटानगर लैंड सेल से चलता कर दिया. इस कार्रवाई का स्वागत करते रेलकर्मियों ने उम्मीद जताई है कि नए एसएसई अशोक कुमार के आने से टाटानगर में रेलवे भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण के खिलाफ पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी.


