Odisha/Jharkhand Core Corridor. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण खनिज परिवहन मार्ग पर भारतीय रेलवे ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है. भारतीय रेलवे ने 6 किलोमीटर लंबे बारबिल-बोलानीखदान दोहरीकरण परियोजना (Barbil–Bolanikhadan Doubling Project) को हरी झंडी दे दी है.
₹122 करोड़ की अनुमानित लागत से पूरी होने वाली इस परियोजना के बाद क्षेत्र में लौह अयस्क (Iron Ore) और खनिजों की आवाजाही न केवल तेज होगी, बल्कि मालगाड़ियों की लेट-लतीफी में भी भारी कमी आएगी.
परियोजना के प्रमुख बिंदु
- लागत एवं लंबाई: 6 किलोमीटर लंबे इस रेल खंड के दोहरीकरण पर ₹122 करोड़ खर्च किए जाएंगे.
- माल ढुलाई क्षमता में उछाल: प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इस मार्ग पर 8.9 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी.
- वर्तमान स्थिति: यह खंड वर्तमान में सिंगल-लाइन (एकल रेल लाइन) है, जिस पर रोजाना लगभग 6 लोड रेल रेक (लगभग 9 MTPA) की आवाजाही होती है.
क्यों खास है यह रेल खंड?
यह रेल खंड ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर (Energy, Mineral and Cement Corridor) के अंतर्गत चिन्हित किया गया है. वर्तमान में इस मार्ग से सेल (SAIL) की बोलानी खदानों के साथ-साथ निजी साइडिंग्स (जैसे रुंगटा, खाटाऊ नरभेराम) से उच्च श्रेणी का लौह अयस्क और पेलेट्स उठाए जाते हैं. यह खनिज सीधे देश के प्रमुख स्टील प्लांटों और बंदरगाहों (Ports) तक भेजे जाते हैं.
सिंगल लाइन होने की वजह से इस रूट पर मालगाड़ियों का दबाव काफी अधिक रहता था, जिससे परिचालन में देरी होती थी. दूसरी लाइन बनने से क्षमता दोगुनी हो जाएगी और ट्रेनों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी.
भविष्य की औद्योगिक जरूरतों की तैयारी
सेल (SAIL) अपनी बोलानी खदानों का विस्तार कर रहा है. इसके साथ ही कई प्रमुख स्टील प्लांटों और बंदरगाहों की क्षमता में भी इजाफा हो रहा है. भविष्य में उत्पन्न होने वाली भारी लॉजिस्टिक्स मांग को पूरा करने के लिए रेलवे ने यह अग्रिम कदम उठाया है.
यह रेल परियोजना ओडिशा और झारखंड के खनिज बहुल इलाकों में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देगी. बेहतर रेल कनेक्टिविटी से इस्पात उद्योगों को कच्चा माल समय पर मिलेगा, जिससे पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास में तेजी आएगी.



