ROURKELA. सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाले राउरकेला में रेलवे इंजीनियरिंग विभाग (SSE Works) की एक शर्मनाक और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. विभाग की अनदेखी और कार्यशैली का आलम यह है कि हादसों को न्योता देने वाले जर्जर निर्माणों को दुरुस्त करने के बजाय खानापूर्ति के अस्थायी ‘जुगाड़’ किए जा रहे हैं.
ताजा मामला राउरकेला रेलवे कॉलोनी स्थित SSE (WORKS) कार्यालय के सामने क्वार्टर नंबर 14-B/6 के पास का है, जहां बाउंड्री वॉल (सीमा दीवार) ढह जाने से एक बड़ा हादसा होते-होते बचा.
सुरक्षा के साथ खिलवाड़, झुकी दीवार को पाइप का सहारा
रेल कर्मचारियों के अनुसार साल 2023 में कॉलाेनी परिसर की एक मुख्य दीवार अचानक एक तरफ खतरनाक तरीके से झुक गई थी. इसकी सूचना रेलवे रेलवे इंजीनियरिंग विभाग को दी गयी. हालांकि इस जर्जर दीवार को ढहाकर नई दीवार का निर्माण कराना चाहिए था या पक्की मरम्मत करानी चाहिए थी. लेकिन विभाग ने सुरक्षा मानकों को ताक पर रखते हुए दीवार को रोकने के लिए लोहे के दो बड़े-बड़े पाइप टेक (सहारा) के रूप में अड़ा दिए. यह सुरक्षा की दृष्टि से बेहद बचकाना और गंभीर लापरवाही भरा था, जिसे अधिकारियों ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया.
चोर चुरा ले गए पाइप, मूसलाधार बारिश में ढह गई दीवार
इंजीनियरिंग विभाग का यह अस्थायी जुगाड़ उस वक्त पूरी तरह फेल हो गया जब चोर दीवार के सहारे लगाए गए लोहे के दोनों पाइपों को उखाड़कर ले गए. बिना किसी सहारे के खड़ी जर्जर दीवार किसी भी वक्त गिरने की कगार पर पहुंच गई. 27 जुलाई 2026 की शाम करीब 4:30 बजे जब इलाके में मूसलाधार बारिश हुई, तो पानी के दबाव और बिना सहारे के खड़ी यह दीवार भरभराकर गिर गई. यह गनीमत रही कि जिस समय दीवार गिरी, उस वक्त आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे जान-माल की बड़ी क्षति होने से बच गई. वरना एक बड़ा हादसा तय था.
ऑनलाइन और लिखित शिकायतें भी दबाईं
दीवार के झुकने और पाइप चोरी होने के बाद स्थानीय रेलकर्मियों ने लगातार अधिकारियों को सतर्क किया. उन्होंने 28 जुलाई को रेलवे के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और इसके साथ ही संबंधित विभाग के रजिस्टर में भी लिखित आवेदन दिया. इसके बावजूद इंजीनियरिंग विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोते रहे और समय रहते दीवार की कोई सुध नहीं ली गई.
अब ठेकेदारी और ‘अतिरिक्त कमाई’ का जुगाड़
शिकायत मिलने पर तुरंत विभागीय कर्मियों से मरम्मत कराने या सुरक्षा घेरा बनाने के बजाय, इंजीनियरिंग विभाग अब इस काम को ठेके पर देने की योजना बना रहा है. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विभाग मरम्मत कार्य का टेंडर निकालकर ठेकेदारी प्रथा के जरिए वित्तीय आवंटन का लाभ उठाना चाहता है. आरोप है कि अपनी नाकामी छुपाने और ‘अतिरिक्त कमाई’ का जुगाड़ बैठाने के लिए ही शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं की गई और दीवार के गिरने का इंतजार किया गया.
रेलवे प्रशासन के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से स्थानीय कर्मचारियों और निवासियों में भारी रोष व्याप्त है. लोगों की मांग है कि लापरवाही बरतने वाले SSC (Works) के संबंधित अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.
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