HUBLI. दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) ने दूध परिवहन करने वाले निजी व्यवसायियों और आम उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत दी है. रेलवे प्रशासन ने ट्रेन के विशेष टैंकरों (Railway Milk Tankers – RMT) के ज़रिए होने वाले दूध के परिवहन (Haulage Charges) की दरों में अगले एक साल तक कोई बढ़ोतरी न करने का फैसला किया है. इसका सीधा मतलब यह है कि देश भर में दूध की आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहेगी और परिवहन लागत न बढ़ने से दूध की कीमतों में इस वजह से बढ़ोतरी नहीं होगी.
दक्षिण पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (PCCM) कार्यालय द्वारा जारी वाणिज्य परिपत्र सं. 17/2026 के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक दूध परिवहन के लिए पुरानी दरें ही लागू रहेंगी.
क्या है इस परिपत्र की मुख्य बातें
पुरानी दरों का ही विस्तार: रेलवे ने फैसला लिया है कि 30 जून 2023 को जारी ‘फ्रेट मार्केटिंग सर्कुलर नंबर 11’ में तय की गई दरों को ही आगे भी जारी रखा जाएगा. यह व्यवस्था 30 जून 2027 तक लागू रहेगी.
नए टैंकरों (VVNH1) के लिए नियम: जो कारोबारी नए डिज़ाइन वाले आधुनिक रेल मिल्क टैंकरों (VVNH1) का इस्तेमाल करेंगे, उनसे सामान्य दरों की तुलना में 1.12 गुना (12% अधिक) शुल्क लिया जाएगा. यह नियम वर्ष 2019 के सर्कुलर के तहत यथावत रखा गया है.
खाली टैंकर की आवाजाही मुफ्त: दूध खाली होने के बाद जब टैंकरों को दोबारा दूध भरने के लिए शुरुआती स्टेशन पर वापस भेजा जाता है, तो उस खाली यात्रा (Empty Movement) का कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. यह छूट पहले की तरह जारी रहेगी.
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
भारतीय रेलवे में दूध का परिवहन विशेष इंसुलेटेड टैंकरों में किया जाता है, ताकि लंबी दूरी तय करने के बावजूद दूध की गुणवत्ता और ताज़गी बनी रहे. रेलवे द्वारा माल भाड़े या परिवहन शुल्क न बढ़ाने से दूध उत्पादक कंपनियों और डेयरी फार्मों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे अंततः बाज़ार में उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिलेगी.
यह सर्कुलर रेलवे बोर्ड के वित्त निदेशालय की सहमति से जारी किया गया है और दक्षिण पश्चिम रेलवे के सभी प्रमुख मंडलों (हुब्बल्लि, बेंगलुरु और मैसूरु) को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.
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