NEW DELHI. सेवानिवृत्त होने वाले रेलवे अधिकारियों को अब सोने की परत चढ़े चांदी का पदक नहीं मिलेगा. रेल मंत्रालय का यह निर्णय तत्काल प्रभाव से अमल में आ गया है.
रेल मंत्रालय द्वारा क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों के प्रमुखों को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि सेवानिवृत्त होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत चढ़े रजत पदक प्रदान करने की प्रथा बंद की जा रही है. रेलवे के पास पहले से ही उपलब्ध रजत पदकों का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए किया जाए.
रेल मंत्रालय ने करीब 20 साल पहले मार्च 2006 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले या सामान्य प्रक्रिया के तहत सेवानिवृत्त होने वाले सभी रेलवे कर्मचारियों को लगभग 20 ग्राम वजन का सोने की परत चढ़ा चांदी का पदक प्रदान करने का निर्णय लिया था.
शुरुआत में पदक को इस प्रकार डिजाइन किया गया था कि एक तरफ भारतीय रेलवे का लोगो और दूसरी तरफ संबंधित रेलवे जोन या उत्पादन इकाई (पीयू) का नाम या लोगो अंकित होता था
इन पदकों पर होने वाले व्यय को ‘अवर्गीकृत विविध’ मद के तहत रखा गया था.
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश में वर्तमान इस बदलाव के लिए कोई कारण नहीं बताया गया है, लेकिन अधिकारियों द्वारा बताए गए कारणों में आउटसोर्स विक्रेताओं की ओर से मुहैया कराए गए पदकों की खराब गुणवत्ता और चांदी की बढ़ती कीमत इसमें शामिल हैं
हालांकि यह बात कुछ दिनों पूर्व ही सामने आयी थी कि आपूर्ति किए गए पदकों में प्रयुक्त चांदी की गुणवत्ता बेहद खराब या नकली मिली थी. इसे भी इस प्रथा को बंद करने के कारणों में से एक बताया जा रहा है.
हालांकि रेलवे के कुछ अधिकारियों ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में चांदी की कीमत कई गुना बढ़ गई है, इसलिए अनावश्यक खर्चों में कटौती के प्रयास के तहत भी यह फैसला लिया गया हो सकता है.
मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि पदक में इस्तेमाल होने वाली चांदी का वजन 20 ग्राम होगा और उसकी शुद्धता 99.9 प्रतिशत होगी




