देव कुमार देव
RAILWAY BONUS 2026. चक्रधरपुर रेल मंडल के 22 हजार से अधिक रेलकर्मियों के बैंक खातों में दुर्गा पूजा बोनस की राशि पहुंच गई है. गुरुवार को दोपहर करीब दो बजे रेलकर्मियों के खातों में कुल लगभग 38 करोड़ 89 लाख रुपये का भुगतान किया गया.
एक दिन पहले ही रेलवे ने पात्र कर्मचारियों को 78 दिन का उत्पादकता आधारित बोनस (पीएलबी) देने की घोषणा की थी, जिसके बाद मंडल में भुगतान शुरू कर दिया गया.
दुर्गा पूजा से पहले बोनस की राशि मिलने से रेलकर्मियों के एक वर्ग में जहां त्योहार की तैयारियों को गति मिली है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों में भारी असंतोष और आक्रोश भी सुलग रहा है.
18 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, फिर बोनस की गणना 7 हजार पर क्यों?
रेलकर्मियों का कहना है कि मौजूदा समय में न्यूनतम वेतन करीब 18 हजार रुपये होने के बावजूद बोनस की गणना के लिए अब भी 7,000 रुपये की पुरानी वेतन सीमा का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके कारण 78 दिनों के बोनस की अधिकतम निर्धारित राशि 17,951 रुपये तक सीमित रह जाती है.
कर्मचारियों का सवाल है कि जब महंगाई लगातार बढ़ रही है और घर का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है, तो बोनस की गणना के लिए निर्धारित वेतन सीमा की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है?
यूनियनों की भूमिका पर उठे सवाल, कटघरे में नेतृत्व
बोनस मिलने की खुशी के बीच रेलकर्मियों का गुस्सा अब अपनी नुमाइंदा यूनियनों पर फूट पड़ा है. कर्मचारियों का सीधा सवाल है कि आखिर क्या वजह है कि बड़े-बड़े दावे करने वाली मान्यता प्राप्त यूनियनें पिछले 10 सालों में बोनस की सीलिंग (सीमा) को तोड़ पाने में असफल रही हैं?
कर्मचारियों का आरोप है कि चुनाव और बैठकों के दौरान बड़े-बड़े वादे करने वाले यूनियन नेता डीए और बोनस जैसे मुद्दों पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं. रेलवे बोर्ड के सामने कर्मचारियों के इस सबसे बड़े और गंभीर मुद्दे पर मुखर होकर दबाव बनाने में यूनियनें नाकाम साबित हुई हैं. नतीजा यह है कि हर साल कर्मचारियों को पुरानी और अव्यवहारिक सीमा के हिसाब से ही ठगा सा महसूस करना पड़ता है.
रेलकर्मियो में आक्रोश के स्वर
रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि बोनस की घोषणा और समय पर भुगतान राहत भरा कदम जरूर है, लेकिन जब तक गणना का आधार नहीं सुधारा जाता, तब तक इस भुगतान का कोई बड़ा औचित्य नहीं रह जाता. विभिन्न अन्य संस्थानों की तुलना में रेलवे कर्मचारियों का बोनस सीमित रह जाने से मेहनतकश वर्ग में नाराजगी व्याप्त है.
रेलकर्मियों की नाराजगी के बीच चक्रधरपुर रेल मंडल में एक तरफ जहां खातों में पैसे आने से बाजारों में चहल-पहल बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ यूनियनों की कार्यशैली को लेकर चर्चाओं और असंतोष का बाजार भी गर्म है.


