BILASPUR. बिलासपुर जोन में एक बार फिर आरपीएफ की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गयी है. आरपीएफ डीजी और जोन के वरिष्ठ RPF अधिकारियों के दौरे के चंद दिनों बाद ही बिलासपुर स्टेशन पर वेंडरों के दो गुट आपस में भिड़ गए. प्लेटफॉर्म नंबर एक से शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते प्लेटफॉर्म नंबर दो तक जा पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले. इस सनसनीखेज घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, इसमें बार रेल पुलिस ने हस्तक्षेप कर तीन लोगों को हिरासत में लिया है.
मालूम हो कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के 42वें स्थापना दिवस (राइजिंग डे) पर 12 अक्टूबर 2026 को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर (डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड) में भव्य आयोजन किया गया था. आरपीएफ डीजी सोनाली मिश्रा समेत देश भर से करीब 1600 आरपीएफ स्टाफ और तमाम उच्च अधिकारी शामिल हुए थे. उस दौरान सुरक्षा व्यवस्था ऐसी चाक-चौबंद थी कि स्टेशन परिसर पूरी तरह शांत नजर आ रहा था. लेकिन अधिकारियों के लौटते ही वेंडरों के हौसले इस कदर बुलंद हो गए कि वे कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए खुलेआमसड़कों और प्लेटफार्मों पर भिड़ गए.
सुरक्षा दावों की वेंडरों ने खुली पोल, चिंताजनक स्थिति
यह घटना उस समय हुई जब प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पटना-चर्लपल्ली एक्सप्रेस खड़ी थी और यात्रियों की भारी आवाजाही थी. ट्रेन के ठीक पास खुलेआम चल रहे इस संघर्ष ने यात्रियों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया. अब यह बात स्पष्ट नहीं हो सकी है यह विवाद अवैध वेंडिंग को लेकर था अथवा वेंडिग को लेकर.
रेल पुलिस मामले की जांच कर रही है. हालांकि वेंडरों के हिंसक झड़प को चिंताजनक माना जा रहा है. बताया जाता है कि स्टेशनों पर खानपान और नाश्ता बेचने वाले वेंडरों के बीच वर्चस्व की लड़ाई लंबे समय से चल रही है. यात्रियों की सुरक्षा और सुगम यात्रा का दावा करने वाले आरपीएफ के सामने वेंडरों का यह दुस्साहस यह साबित करता है कि मैदानी स्तर पर निगरानी और प्रशासनिक पकड़ कितनी कमजोर हो चुकी है.
जीआरपी ने दर्ज किया मामला
हंगामे की सूचना मिलने पर हरकत में आई जीआरपी ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आरोपित वेंडरों को गिरफ्तार भी किया गया है. बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वीवीआईपी दौरों और बैठकों के समय दिखाई जाने वाली सख्ती सिर्फ दिखावा साबित होती है. उच्च अधिकारियों के जाने के बाद रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा या अप्रिय घटना घट सकती है.


