रेलवे अपने इलेक्ट्रिकल सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसके कारण यात्रियों को एक बेहद जरूरी और बुनियादी सुविधा से वंचित करना किसी भी लिहाज से सही दृष्टिकोण नहीं है.
NEW DELHI. भारतीय रेलवे बोर्ड द्वारा आग से सुरक्षा का हवाला देते हुए रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के बीच ट्रेनों में मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि, रेलवे के इस पुराने फैसले और इसके कड़ाई से पालन कराने के आदेश पर देश के कई वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों, पूर्व सदस्यों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने तीखा सवाल उठाया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेनों में आग लगने की मुख्य वजह सॉकेट, इलेक्ट्रिकल सर्किट या वायरिंग में खराबी होती है, न कि मोबाइल या लैपटॉप चार्ज करना. रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य (इंजीनियरिंग) सुबोध जैन ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि रेलवे अपने इलेक्ट्रिकल सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसके कारण यात्रियों को एक बेहद जरूरी और बुनियादी सुविधा से वंचित करना किसी भी लिहाज से सही दृष्टिकोण नहीं है.
क्या है विशेषज्ञों का सुझाव?
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस समस्या का समाधान चार्जिंग पॉइंट बंद करना नहीं, बल्कि तकनीकी सुधार करना है. विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि रेलवे को डिब्बों और सर्किट्स में ‘फ्यूज’ या ‘सर्किट ब्रेकर’ लगाने के निर्देश देने चाहिए. इससे सर्किट में अचानक अत्यधिक करंट या ओवरलोडिंग होने पर बिजली की आपूर्ति अपने आप कट जाएगी और हादसों को टाला जा सकेगा.
इसके अलावा, नवंबर 2023 में नई दिल्ली-दरभंगा हमसफर क्लोन स्पेशल ट्रेन के शयनयान में लगी आग की घटना का हवाला देते हुए रेलवे सुरक्षा आयुक्त की रिपोर्ट में भी सभी डिब्बों में पर्याप्त क्षमता वाले फ्यूज लगाने की सिफारिश की गई थी.
नया विवाद और पुराना आदेश
रेलवे बोर्ड ने हाल ही में (26 अक्टूबर 2026) सभी जोनों को अपने 2014 के पुराने आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा है, जिसके तहत रात के समय चार्जिंग पॉइंट्स बंद रखने का प्रावधान है. लेकिन जानकारों का तर्क है कि आधुनिक दौर में जब लगभग हर यात्री के पास फोन और लैपटॉप होते हैं, तब इस तरह की पाबंदियां लगाने के बजाय रेलवे को अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाना चाहिए, ताकि यात्रियों को बिना किसी असुविधा के सुरक्षित सफर मिल सके.


