पटियाला लोकोमोटिव्स वर्क्स (पीएलडब्ल्यू) को नोडल एजेंसी बनाकर दावा किया गया था सभी लोको में एफएसडी और टूल बॉक्स लगाने का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा. आलम यह है कि डेढ़ साल बाद भी अधिकांश लोको में न तो पर्याप्त रूप से टूल बॉक्स लगाए गए हैं और न ही एफएसडी फिट की जा सकी है.
NEW DELHI. भारतीय रेलवे के चालकों (लोको पायलटों) को भारी-भरकम टूल बॉक्स और फेंग सेफ डिवाइस (एफएसडी) के साथ ड्यूटी करने की मजबूरी से मुक्ति दिलाने के लिए भले ही बड़े-बड़े दावे किए गए हों, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी दावों से कोसों दूर है.
एलआरएसए (ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन) द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश लोकोमोटिव्स में एफएसडी और टूल बॉक्स लगाने का कार्य बेहद सुस्त गति से चल रहा है.
मूल विवाद और लोको पायलटों की समस्या
वर्तमान में स्थिति यह है कि लोको पायलटों को अपनी ड्यूटी के दौरान कई किलोग्राम वजनी टूल बॉक्स और अन्य उपकरण साथ लेकर चलना पड़ता है. इससे ड्यूटी शुरू करने और समाप्त करने के दौरान कर्मियों पर शारीरिक बोझ अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है. इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए पटियाला लोकोमोटिव्स वर्क्स (पीएलडब्ल्यू) को नोडल एजेंसी बनाया गया था, जिसे यह दावा करना था कि सभी लोको में एफएसडी और टूल बॉक्स लगाने का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा. हालांकि, डेढ़ साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी लोको इंजन में न तो पर्याप्त रूप से टूल बॉक्स लगाए गए हैं और न ही एफएसडी फिट की जा सकी है, जिसके विरोध में लोको पायलटों का संघर्ष लगातार जारी है.
आरटीआई से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
एलआरएसए के महासचिव एके राउत ने इस पूरे मामले की सीधी और पारदर्शी जानकारी हासिल करने के लिए रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पटियाला लोकोमोटिव्स वर्क्स के चीफ प्लानिंग इंजीनियर से पीसीसीई/पीसीपीओ के माध्यम से आरटीआई के तहत आवेदन किया था. आरटीआई के जरिए मुख्य तौर पर तीन अहम सवाल पूछे गए थे:
सीपीओ/पीएलडब्ल्यू पत्र संख्या और एमपीएस-2/फेंग पास दिनांक 4 अप्रैल 2025 व 29 अप्रैल 2025 के अनुसार किस-किस क्षेत्रीय रेलवे ने फेंग पास उपकरणों के लिए अपनी मांग प्रस्तुत की है? केंद्रीय नोडल एजेंसी पीएलडब्ल्यू द्वारा अब तक कुल कितने फेंग डिवाइस खरीदे गए हैं और इनमें से कितने डिवाइस लोकोमोटिव्स के कैब में लगाए जा चुके हैं?
भविष्य में कुल कितने और नए डिवाइस लगाए जाएंगे?
आरटीआई से यह बात भी सामने आई कि रेलवे बोर्ड के निर्देश पर आरडीएसओ (अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन) ने सभी रेलवे यूनिट को यह स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी इंजनों में एफएसडी फिट की जाए. इसके साथ ही, लोको के भीतर एसी कार्य करने वाले इंजनों में टूल बॉक्स और फेंग सेफ डिवाइस फिट किए जाने के आदेश थे ताकि लोको पायलटों का बोझ कम किया जा सके.
सेंट्रल रेलवे के अलावा अन्य जोन ने समय पर नहीं भेजी डिमांड
इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली की पोल भी खुली है. केंद्रीय नोडल एजेंसी पीएलडब्ल्यू को सभी जोनल रेलवे से उनकी जरूरत के मुताबिक फेंग्स इंसर्ट और एफएसडी क्रय करने के लिए अधिकृत किया गया था. हाल ही में जारी एक पत्र में यह बात भी सामने आई थी कि केवल सेंट्रल रेलवे ने ही अपनी मांग भेजी जबकि अन्य जोनल रेलवे के पीसीईई ने जरूरत के हिसाब से समय पर डिमांड तक नहीं भेजा है.


