जन-संवाद में आये सुझावों का एक ‘सार्वजनिक ड्राफ्ट’ जारी कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि निराकरण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और किस समय-सीमा में इसे पूरा किया जायेगा. रेलवे पारदर्शी रिपोर्ट साझा करता है, तो यह अभियान महज औपचारिकता न रहकर यात्रियों का भरोसा जीतने वाला एक वास्तविक और प्रभावी कदम साबित हो सकेगा.
Chakradharpur/New Delhi. यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और रेल सेवाओं में सुधार के बड़े-बड़े दावों के साथ दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल सहित देश भर के रेलवे स्टेशनों पर हाल ही में ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत रेल जन-संवाद और श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस राष्ट्रव्यापी पहल के तहत चक्रधरपुर मंडल के 78 स्टेशनों पर रेलवे के बड़े अधिकारी मैदान में उतरे.
खुद मंडल रेल प्रबंधक (DRM) तरुण हुरिया टाटानगर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे, जबकि अन्य स्टेशनों पर सीनियर डीसीएम और तमाम अधिकारी यात्रियों के बीच जाकर सीधे उनकी समस्याएं और सुझाव लेते नजर आए. एक तरफ रेलवे की यह मैदानी पहल यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है, तो वहीं दूसरी तरफ इसके तौर-तरीकों को लेकर कई गंभीर और तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं.
जब तकनीकी शिकायत प्रणाली मौजूद है, तो इस ‘जन-संवाद’ की जरूरत क्यों?
आज के डिजिटल और तकनीक-प्रधान युग में रेलवे के पास शिकायतों के निवारण के लिए ‘रेल मदद’ ऐप, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न ऑनलाइन पोर्टल जैसी पुख्ता व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं. इन तंत्रों के जरिए हर दिन देश भर से हजारों की संख्या में यात्रियों की शिकायतें और सुझाव तकनीकी माध्यमों से रेलवे तक पहुंचते हैं.
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब पहले से ही तकनीकी शिकायत निवारण प्रणाली सक्रिय है, तो रेलवे अधिकारियों को स्टेशन पर उतरकर अलग से जन-संवाद करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और इन तमाम तकनीकी माध्यमों से रोज आने वाली हजारों शिकायतों के निष्पादन की वास्तविक दशा और दिशा आज क्या है, इस पर भी गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है.
“दिखावे के आयोजनों से बेहतर है मौजूदा तंत्र को संवेदनशील बनाया जाए”
इस जन-संवाद कार्यक्रम की सार्थकता पर अब स्वयं रेल यात्री और विभिन्न यात्री संगठन सवाल उठा रहे हैं. जानकारों का कहना है कि रेलवे को इस तरह के दिखावटी और कागजी आयोजनों पर अपनी ऊर्जा खर्च करने के बजाय अपने मौजूदा शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना चाहिए.
आलोचकों का तर्क है कि यदि रेलवे अपने ऑनलाइन और डिजिटल शिकायत तंत्र को दुरुस्त कर ले, तथा आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान तत्काल और पूरी गंभीरता से करने लगे, तो शायद ऐसे आयोजनों की जरूरत ही महसूस न हो.
जन-संवाद तभी सार्थक, जब जमीनी स्तर पर सुधरेगी कार्यशैली
देश भर में चलाए गए इस ‘विशेष अभियान 6.0’ की समीक्षा की जाए, तो इसके सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों पहलू सामने आते हैं:
- सराहनीय पहल: अधिकारियों का एसी कमरों से निकलकर सीधे प्लेटफॉर्म पर आम यात्रियों से रू-ब-रू होना और उनकी बात सुनना निश्चित रूप से एक स्वागतयोग्य कदम है. इससे प्रशासनिक अधिकारियों को धरातल की वास्तविक स्थिति का सीधा अनुभव मिलता है.
- संवेदनशीलता की दरकार: हालांकि, यह बेहद जरूरी है कि रेलवे केवल रस्म अदायगी या अभियानों तक सीमित न रहे. रेलवे प्रशासन को अपनी मौजूदा आंतरिक प्रणाली को बेहद संवेदनशील बनाना होगा.
- त्वरित निष्पादन पर जोर: जब तक पोर्टल पर दर्ज होने वाली हर एक शिकायत पर त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक ऐसे जन-संवाद कार्यक्रम महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएंगे.
आम यात्रियों का कहना है रेलवे को चाहिए कि वह जन-संवाद के इस जोश को अपने रोजमर्रा के शिकायत निवारण तंत्र में ढाले, ताकि आम यात्रियों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए किसी विशेष अभियान का इंतजार न करना पड़े और उनका सफर वास्तव में सुगम व सुरक्षित हो सके.
जनता के फीडबैक और समाधान का सार्वजनिक ड्राफ्ट जारी करे रेलवे
रेलवे प्रशासन यात्रियों से मिले तमाम सुझावों और शिकायतों का एक विस्तृत ‘सार्वजनिक ड्राफ्ट’ या रिपोर्ट कार्ड जारी करे. इसमें स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि यात्रियों से किस-किस तरह की शिकायतें (जैसे साफ-सफाई, ट्रेन लेट होना या यात्री सुविधाएं) और सुझाव प्राप्त हुए हैं.
इसके साथ ही, रेलवे को यह भी बताना चाहिए कि इन समस्याओं के निराकरण के लिए क्या-क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए एक निश्चित समय-सीमा (टाइमलाइन) क्या होगी. यदि रेलवे इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता अपनाते हुए पारदर्शी रिपोर्ट साझा करता है, तो यह अभियान महज औपचारिकता न रहकर यात्रियों का भरोसा जीतने वाला एक वास्तविक और प्रभावी कदम साबित होगा.
रविशंकर : “लेखक एक समर्पित उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता हैं, जो उपभोक्ता संगठन से जुड़कर जन-जागरूकता फैलाने में सक्रिय हैं.”


