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    Home » आरा जंक्शन में महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने पर उठ रहे गंभीर सवाल, तकनीकी गड़बड़ी या सुरक्षा से बड़ा खिलवाड़!
    रेल न्यूज

    आरा जंक्शन में महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने पर उठ रहे गंभीर सवाल, तकनीकी गड़बड़ी या सुरक्षा से बड़ा खिलवाड़!

    Railhunt News DeskBy Railhunt News DeskSeptember 6, 2026
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    पूर्व मध्य रेलवे की महाप्रबंधक डिंपी गर्ग और दानापुर विनोद कुमार ने घटनास्थल का दौरा किया है. दुर्घटना के बाद स्टेशन मास्टर को निलंबित किये जाने की सूचना है. लेकिन इस कार्रवाई को जमीनी कम सतही लीपापोती अधिक बताया जा रहा.

    PATNA. बिहार के आरा जंक्शन पर रविवार तड़के अलीपुरद्वार से दिल्ली जा रही महानंदा एक्सप्रेस के दो डिब्बों के पटरी से उतरने की घटना ने एक बार फिर भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और रख-रखाव के दावों की पोल खोल दी है. रेलवे इस घटना को महज एक ‘तकनीकी गड़बड़ी’ या प्वाइंट की खराबी बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह हादसा प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर बरती गई घोर लापरवाही का परिणाम है. यदि चालक ने अपनी सूझबूझ और सतर्कता का परिचय न दिया होता, तो यह घटना एक भीषण रेल दुर्घटना में बदल सकती थी, जिससे सैंकड़ों मासूम यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी.

    घटना के विवरण के मुताबिक, यह हादसा रविवार की अहले सुबह करीब चार बजे तब हुआ जब ट्रेन आरा जंक्शन के यार्ड क्षेत्र से गुजर रही थी. जिस समय यह दुर्घटना घटी, अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे. अचानक हुए तेज झटके और ट्रेन रुकने के बाद बोगी में अफरातफरी मच गई और यात्रियों की सांसे अटक गईं. गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी यात्री के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि रेलवे की लापरवाही ने यात्रियों की जान को दांव पर लगा दिया था.

    नियमित ट्रैक मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग विंग की चेकिंग कागजों तक सीमित?

    सवाल यह उठता है कि आखिर जंक्शन के यार्ड क्षेत्र जैसे संवेदनशील हिस्से में ट्रेन के पहिए पटरी से कैसे उतर गए? क्या नियमित ट्रैक मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग विंग की चेकिंग महज कागजों तक सीमित है?

    रेलवे के उच्चाधिकारी, जिसमें पूर्व मध्य रेलवे की महाप्रबंधक डिंपी गर्ग और दानापुर मंडल के डीआरएम विनोद कुमार शामिल हैं, ने घटनास्थल का दौरा कर जल्द ट्रैक बहाली के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन उच्च अधिकारियों का यह निरीक्षण और केवल निचले स्तर पर स्टेशन मास्टर को निलंबित कर कार्रवाई का दावा करना महज एक सतही लीपापोती प्रतीत होता है.

    असल सवाल यह है कि मेंटेनेंस में चूक के असली गुनहगारों और प्रशासनिक ढिलाई पर पर्दा डालते हुए क्या छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर रेलवे अपने लचर सिस्टम की जिम्मेदारी से बच सकता है?

    हर बार हादसे के बाद जांच कमेटियों का गठन कर दिया जाता है, रिपोर्ट फाइलों में कैद हो जाती है और अगली बड़ी दुर्घटना होने तक सिस्टम गहरी नींद में सो जाता है.

    आरा जंक्शन पर हुआ यह हादसा कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि देश भर में आए दिन पटरी से उतरने की घटनाएं रेलवे की लचर कार्यशैली का प्रमाण हैं. दिल्ली-हावड़ा जैसे अति-व्यस्त और महत्वपूर्ण रूट पर इस तरह की लापरवाही यात्रियों की सुरक्षा के प्रति रेलवे की गंभीरता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है. इसे केवल ‘तकनीकी खामी‘ कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

    यदि भारतीय रेलवे को यात्रियों का भरोसा जीतना है, तो केवल औपचारिकता वाली जांच से काम नहीं चलेगा. इसके लिए ट्रैक रख-रखाव में कोताही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो सके.

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